साकार होगा अनाया का सपना?

ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय क्रिकेटर अनाया बांगर के लिए क्रिकेट में वापसी का रास्ता खोल दिया है। उन्हें कम्युनिटी महिला क्रिकेट खेलने की अनुमति मिल गई है और पात्रता शर्तें पूरी करने पर एलीट महिला क्रिकेट में खेलने का अवसर मिल सकता है। इससे ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित महिला ‘बिग बैस लीग’ में जगह बनाने की उम्मीद भी जगी है लेकिन आईसीसी के नियमों के अनुसार ट्रांसजेंडर महिला खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में नहीं खेल सकतीं। लिहाजा अनाया घरेलू स्तर पर आगे बढ़ सकती हैं मगर भारत या ऑस्ट्रेलिया की महिला अंतरराष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं बन सकतीं। हालांकि भविष्य में यदि आईसीसी अपनी नीति में बदलाव करता है तो स्थिति बदल सकती है

भारतीय क्रिकेट में संजय बांगर का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। भारत के लिए टेस्ट और वनडे क्रिकेट खेलने वाले बांगर बाद में भारतीय टीम के बल्लेबाजी सलाहकार और कोचिंग स्टाफ का हिस्सा भी रहे। अब उनकी संतान अनाया बांगर क्रिकेट की वजह से चर्चा में हैं लेकिन इस बार चर्चा किसी मैच, पारी या चयन को लेकर नहीं बल्कि महिला क्रिकेट में उनकी वापसी और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने की पात्रता को लेकर है। अनाया ने जेंडर ट्रांजिशन के बाद क्रिकेट से दूरी बना ली थी। लम्बे समय तक यह सवाल उनके सामने था कि क्या वह दोबारा प्रतिस्पर्धी क्रिकेट खेल पाएंगी। इस बीच ऑस्ट्रेलिया में उन्हें कम्युनिटी क्रिकेट खेलने की अनुमति मिलना उनके क्रिकेट करियर के लिए महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा कम्युनिटी गाइडलाइंस ट्रांसजेंडर और जेंडर-डाइवर्स खिलाड़ियों को उनकी जेंडर आइडेंटिटी के अनुरूप कम्युनिटी क्रिकेट में भाग लेने की अनुमति देती हैं। यानी अनाया के लिए क्रिकेट का मैदान एक बार फिर खुल गया है। मगर इसके साथ ही एक बड़ा सवाल यह कि क्या वह भविष्य में महिला बिग बैश लीग खेल सकती हैं? उससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या वह भारत या ऑस्ट्रेलिया जैसी किसी महिला अंतरराष्ट्रीय टीम की ओर से क्रिकेट खेल सकती हैं? अनाया के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट का रास्ता क्यों बंद है? क्या क्रिकेट में अनाया की वापसी का सपना फिर जिंदा हुआ जैसे तमाम प्रश्न मीडिया, सोशल मीडिया और खेल जगत की सुर्खियों में हैं।

गौरतलब है कि अनाया का क्रिकेट से रिश्ता नया नहीं है। जेंडर ट्रांजिशन से पहले आर्यन के रूप में वह मुम्बई के क्रिकेट सर्किट में खेल चुकी हैं और मुम्बई अंडर-19 स्तर तक पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने सरफराज खान और मुशीर खान जैसे खिलाड़ियों के साथ भी क्रिकेट खेला। यही वजह है कि उनके लिए क्रिकेट महज एक शौक नहीं बल्कि लम्बे समय से जुड़ा हुआ सपना है। मार्च 2026 में जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी के बाद उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि आगे क्रिकेट का रास्ता क्या होगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक अनाया ने बताया कि एक समय उन्हें लगा था कि शायद वह दोबारा क्रिकेट नहीं खेल पाएंगी। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से अनुमति मिलने के बाद उन्होंने इसे अपने लिए बेहद भावुक और महत्वपूर्ण दिन बताया। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उनके लिए प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटने का रास्ता खुला है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की कम्युनिटी गाइडलाइंस के अनुसार खिलाड़ी अपनी जेंडर आइडेंटिटी के अनुरूप कम्युनिटी क्रिकेट में भाग ले सकते हैं। इन प्रतियोगिताओं में क्लबों को सामान्य तौर पर मेडिकल जांच या हार्मोन टेस्ट के आधार पर जेंडर सत्यापन करने के लिए नहीं कहा जाता।

इस लिहाज से अनाया की वापसी केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं है बल्कि यह उस सवाल का जवाब भी है कि जेंडर ट्रांजिशन के बाद किसी खिलाड़ी के लिए क्रिकेट का दरवाजा पूरी तरह बंद हो जाता है या नहीं।  ऑस्ट्रेलिया की नीति बताती है कि कम से कम कम्युनिटी स्तर पर ऐसा नहीं है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया काफी समय से जेंडर-डाइवर्स और ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को क्रिकेट से जोड़ने की नीति पर काम करता रहा है। 2019 में उसने कम्युनिटी क्रिकेट के लिए ट्रांसजेंडर और जेंडर-डाइवर्स खिलाड़ियों को शामिल करने सम्बंधी गाइडलाइंस जारी की थीं। मौजूदा गाइडलाइंस का मूल सिद्धांत है कि क्रिकेट एक ऐसा खेल होना चाहिए जिसमें लोग अपनी जेंडर आइडेंटिटी के अनुरूप हिस्सा ले सकें और उन्हें सुरक्षित तथा सम्मानजनक माहौल मिले। हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। कम्युनिटी क्रिकेट और एलीट क्रिकेट एक ही चीज नहीं हैं। क्लब स्तर पर खेलने की अनुमति का मतलब यह नहीं कि खिलाड़ी अपने आप पेशेवर या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए योग्य हो जाता है। यही अंतर अनाया के मामले को बेहद दिलचस्प बनाता है।

अनाया की नजर अब ऑस्ट्रेलिया की महिला एलीट क्रिकेट संरचना पर है। रिपोर्टों के अनुसार क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने उन्हें मार्च 2027 से एलीट महिला क्रिकेट के लिए पात्र होने की दिशा में रास्ता दिया है, बशर्ते वह संबंधित पात्रता शर्तों को पूरा करें। इसका मतलब यह नहीं है कि मार्च 2027 में अनाया को सीधे महिला बिग बैस लीग की किसी टीम में जगह मिल जाएगी। पात्रता और चयन दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। अगर अनाया सभी आवश्यक पात्रता मानकों को पूरा कर लेती हैं तो उन्हें क्लब या एलीट स्तर पर प्रदर्शन करना होगा, फिटनेस साबित करनी होगी और चयनकर्ताओं को प्रभावित करना होगा। महिला बिग बैस लीग में जगह पाने के लिए केवल नियमों के तहत योग्य होना पर्याप्त नहीं है। यानी दूसरे शब्दों में कहें तो क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की पात्रता मंजूरी रास्ता खोलती है, टीम में जगह की गारंटी नहीं देती। यह अंतर अनाया के सम्भावित करियर को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

ऑस्ट्रेलिया की एलीट क्रिकेट नीति में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के लिए टेस्टोस्टेरोन से जुड़े पात्रता मानक मौजूद हैं। क्रिकेट  ऑस्ट्रेलिया ने पहले स्पष्ट किया था कि एलीट स्तर पर महिला क्रिकेट के लिए ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के मामले में सीरम टेस्टोस्टेरोन का स्तर 10 नैनोमोल प्रति लीटर से कम लगातार कम से कम 12 महीने रहने की शर्त लागू हो सकती है। हालांकि कम्युनिटी क्रिकेट के नियम इससे अलग हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा कम्युनिटी गाइडलाइंस में क्लब स्तर पर खिलाड़ियों से मेडिकल या हार्मोन सम्बंधी प्रमाण मांगने से बचने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है। इसलिए अनाया के लिए मौजूदा यात्रा को तीन चरणों में समझा जा सकता है। पहला चरण कम्युनिटी क्रिकेट। इस स्तर पर उन्हें ऑस्ट्रेलिया में महिला क्रिकेट खेलने का रास्ता मिल गया है। दूसरा चरण एलीट घरेलू क्रिकेट। इसके लिए उन्हें क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की सम्बंधित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी। तीसरा चरण महिला बिग बैस लीग या अन्य उच्चस्तरीय प्रतियोगिता। पात्रता हासिल करने के बाद प्रदर्शन और चयन के आधार पर ही टीम में जगह सम्भव होगी।

अब रहा सवाल कि क्या अनाया भारत या ऑस्ट्रेलिया जैसी किसी महिला अंतरराष्ट्रीय टीम की ओर से क्रिकेट खेल सकती हैं का तो आईसीसी ने नवम्बर 2023 में महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए अपनी जेंडर पात्रता नीति में बदलाव किया था। उनके अनुसार जो पुरुष से महिला ट्रांसजेंडर खिलाड़ी पुरुष यौवन से गुजर चुकी हैं वे सर्जरी या जेंडर री-असाइनमेंट ट्रीटमेंट कराने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में भाग लेने के लिए पात्र नहीं हैं। इस नियम का सीधा असर अनाया की अंतरराष्ट्रीय सम्भावनाओं पर पड़ता है। इसका मतलब यह है कि अगर अनाया ऑस्ट्रेलिया में कम्युनिटी क्रिकेट खेलती हैं, फिर एलीट क्रिकेट में पहुंचती हैं और भविष्य में महिला बिग बैस लीग में खेलने की पात्रता हासिल करती हैं, तब भी इससे उन्हें आईसीसी के तहत महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का अधिकार नहीं मिल जाता क्योंकि महिला बिग बैस लीग और इंटरनेशनल क्रिकेट के नियम अलग हैं। यही सवाल सोशल मीडिया या सामान्य चर्चा में भ्रम पैदा कर सकता है। यदि किसी खिलाड़ी को किसी देश की घरेलू प्रतियोगिता में खेलने की अनुमति मिलती है तो इसका अर्थ यह नहीं कि वह उसी देश की राष्ट्रीय टीम के लिए भी पात्र हो गई है। जहां तक सवाल है क्या अनाया भारत की महिला टीम में खेल सकती हैं का तो बीसीसीआई की घरेलू नीति और आईसीसी की अंतरराष्ट्रीय नीति को अलग-अलग देखना होगा।
अनाया की पात्रता को लेकर बीसीसीआई से सम्पर्क किए जाने की खबरें सामने आई हैं। सार्वजनिक रूप से बीसीसीआई ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है लेकिन भारतीय महिला टीम से
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने के सवाल पर अंतिम निणर्य आईसीसी के अंतरराष्ट्रीय नियमों से प्रभावित होगा। इसलिए केवल यह कहना कि बीसीसीआई अनुमति दे दे तो अनाया भारत के लिए खेल सकती हैं, मौजूदा आईसीसी नियमों की तस्वीर को अधूरा बताना होगा। आईसीसी नियमों के आधार पर वे उस श्रेणी में आती हैं जिसे आईसीसी की नीति पुरुष यौवन से गुजर चुकी ट्रांसजेंडर महिला के रूप में अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट से बाहर करती है। इसलिए उनका भारतीय महिला टीम में खेलना सम्भव नहीं है वहीं ऑस्ट्रेलिया अपने घरेलू क्रिकेट में अधिक समावेशी नीति रख सकता है। गौरतलब है कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह कम्युनिटी क्रिकेट में ट्रांसजेंडर और जेंडर-डाइवर्स खिलाड़ियों की भागीदारी को समर्थन देता है लेकिन  ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय टीम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलती है और अंतरराष्ट्रीय मैचों में आईसीसी के नियम लागू होते हैं। इसलिए घरेलू स्तर पर मिली अनुमति अपने आप अंतरराष्ट्रीय पात्रता में नहीं बदलती।

बहरहाल अनाया के सामने सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य क्रिकेट में नियमित वापसी करना है। पहले उन्हें कम्युनिटी क्रिकेट में अपनी लय हासिल करनी होगी। इसके बाद एलीट घरेलू क्रिकेट की पात्रता और प्रदर्शन की चुनौती होगी। अगर वह इन पड़ावों को पार करती हैं तो महिला बिग बैस लीग जैसी प्रतियोगिता तक पहुंचने की सम्भावना बन सकती है लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए स्थिति स्पष्ट है। पुरुष यौवन से गुजर चुकी ट्रांसजेंडर महिला खिलाड़ियों को महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेलने की अनुमति नहीं है। इसलिए अनाया के लिए क्रिकेट का मैदान खुल गया है मगर अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट का दरवाजा अभी बंद है। हालांकि भविष्य में यदि आईसीसी अपनी नीति में बदलाव करता है तो स्थिति बदल सकती है। उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से ज्यादा महत्वपूर्ण दोबारा क्रिकेट के मैदान पर उतरना है। अनाया की यात्रा इसलिए सिर्फ एक क्रिकेटर की वापसी की कहानी नहीं है। यह क्रिकेट, पहचान, समावेशन, प्रतिस्पर्धात्मक समानता और अंतरराष्ट्रीय खेल नियमों के बीच संतुलन की एक बड़ी बहस भी है।

आर्यन यानी अनाया का क्रिकेट करियर
  1. मुम्बई अंडर-16 क्रिकेट : अनाया ने मुम्बई की अंडर-16 टीम /उम्र-समूह क्रिकेट में प्रतिनिधित्व किया।
  2. पुडुचेरी अंडर-19 : उन्होंने पुडुचेरी की अंडर-19 क्रिकेट के साथ टीम का प्रतिनिधित्व भी किया।
  3. कूच बिहार ट्रॉफी : अनाया ने राज्य स्तर की कूच बिहार ट्रॉफी क्रिकेट में भी हिस्सा लिया था।
  4. मुम्बई अंडर-23 ट्रायल : वह मुम्बई की अंडर-23 टीम के ट्रायल तक पहुंचीं। यह उनके उम्र-समूह क्रिकेट में लगातार आगे बढ़ने का संकेत था। अपने जूनियर क्रिकेट दौर में उन्होंने सरफराज खान, मुशीर खान और यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट खेला।
  5. बल्लेबाजी की पहचान : वह बाएं हाथ की टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज थीं और मुम्बई के प्रतिस्पर्धी क्रिकेट सर्किट में प्रशिक्षण ले रही थीं।
  6. 2026 में क्रिकेट में वापसी की तैयारी : जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी के बाद उन्होंने दोबारा क्रिकेट प्रशिक्षण शुरू किया। अगस्त 2026 में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया से कम्युनिटी क्रिकेट खेलने की अनुमति मिलना उनके करियर का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *