फिर खिलेगा कमल या लौटेगा हाथ?

देश की राजनीति में इस समय तीन राज्यों केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को हुए बम्पर मतदान के बाद चुनाव परिणामों को लेकर सस्पेंस चरम पर है। चुनाव … Read More

बंगाल में एसआईआर के नाम पर 89 लाख वोट गायब वोटर लिस्ट की सफाई या लोकतंत्र की छंटनी?

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के नाम पर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से भारतीय लोकतंत्र पर गम्भीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है … Read More

सेंसरशिप के साये में लोकतंत्र

हाल ही में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा द वाॅयस ऑफ हिंद रजब (The Voice of Hind Rajab) पर लगाया गया प्रतिबंध एक साधारण प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक व्यापक … Read More

काश! काशीपुर में होता विकास

उत्तराखण्ड का मिनी पंजाब कहे जाने वाले काशीपुर विधानसभा में सिख और मुस्लिम आबादी काफी संख्या में है। चीमा परिवार विशेषकर हरभजन सिंह चीमा ने इस अल्पसंख्यक बाहुल्य सीट पर … Read More

61 कैंटोनमेंट बोर्ड खत्म करने का फैसला ‘छावनियों का अंत या नई शुरुआत?’

केंद्र सरकार ने देश के 61 कैंटोनमेंट बोर्ड को समाप्त कर उनके नागरिक क्षेत्रों को नगर निकायों में विलय करने का फैसला लिया है। सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मोहन भंडारी के … Read More

भाजपा की पॉलिटिकल सर्जिकल स्ट्राइक

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार हो चुका है। जिसमें 4 मंत्री उनकी पसंद के बने हैं उससे कयास लगाए जा रहे हैं कि अब वे अपने विरोधियों … Read More

सवाल साख का

भारतीय न्याय व्यवस्था की मूलाधारा यह रही है कि न्याय केवल निष्पक्ष होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि वह निष्पक्ष दिखाई भी देना चाहिए। यही वह सिद्धांत है जो अदालतों … Read More