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केंद्र में अमेरिका

साल के आगाज और अंजाम के बीच सिमटी दुनिया की तस्वीर अगर हम घटनाओं के जरिए देखें तो पाएंगे कि वर्ष 2018 का समय वैश्विक स्तर पर हलचल भरा रहा। जैसा कि हर साल होता है, दुनिया का दारोगा कहे जाने वाला अमेरिका अधिकांश घटनाओं के केंद्र में रहा। वह प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष ढंग से घटनाओं का सबब भी बना रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति फितरतन सुर्खियों में बने रहे और कई मौकों पर उन्होंने दुनिया के कई देशों को डराने का भी काम किया। दक्षिण कोरिया, रूस, चीन, सीरिया और सऊदी अरब में शाही परिवार में छिड़े घमासान बार-बार खबरों में बने रहे। जाते- जाते इंडोनेशिया में आए सुनामी ने जो तबाही मचाई वह दुःखद है। अमेरिका, सीरिया, रूस, चीन, सऊदी अरब के अलावा भारत के पड़ोसी देशों में भी राजनीतिक हलचलें सबसे ऊपर रहीं। पड़ोसी देश श्रीलंका में सत्ता परिवतर्न की कोशिश वहां के राष्ट्रपति ने ही की जो कामयाब नहीं हो पाई। राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने 26 अक्टूबर को रानिल विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर राजपक्षे को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त कर दिया था। राष्ट्रपति सिरिसेना के इस फैसले पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने संसद को भंग करने का आदेश दे दिया, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने उनके इसआदेश को संविधान का उल्लंघन बताते हुए इस पर रोक लगा दी। संविधान के मुताबिक श्रीलंका में जब तक संसद पांच साल की निर्धारित अवधि में से साढ़े चार साल पूरी नहीं कर लेती, राष्ट्रपति उसे भंग नहीं कर सकता। कहा गया कि राजपक्षे को चीन का समर्थन हासिल था।

सीरिया लंबे समय से गृहयुद्ध के हालात को झेल रहा है। वहां हजारों लोग मारे जा चुके हैं। लाखों ने दूसरे देशों की शरण ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का एलान कर पूरी दुनिया को हैरत में डाल दिया। उन्होंने दो टूक लहजे में कहा है कि अमेरिका दुनिया की रखवाली का ठेका नहीं ले सकता। उनकी दलील थी कि अब सीरिया में अमेरिका की जरूरत नहीं है, क्योंकि आईएस को हटा दिया गया है। स्मरण रहे, ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान में मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने का वादा किया था। असल में सीरिया में अमेरिकी सैनिक सीरिया डेमोक्रेटिक फॉरसेफ की मदद कर रहे थे। कुर्द नेतृत्व वाले ये बल सीरिया में चरमपंथी समूह इस्लामिक स्टेट को हराने और उसके प्रभाव क्षेत्र को सीमित करने में अहम रहे हैं। सच तो यह है कि इन कुर्द बलों को अमेरिका ने ही हथियार दिए थे। साथ ही जमीनी स्तर पर मजबूत किया। अब अमेरिका के अचानक हट जाने से इनके सामने गहरा संकट उत्पन्न हो गया है। इस मामले का एक दूसरा अहम पक्ष यह भी है कि ईरान और इजराइल के बीच सीरिया पिसता रहा है।

अब ऐसी आशंका व्यक्त की जाने लगी हैं कि क्या सऊदी अरब का कुनबा बिखर जाएगा। जानकारों के मुताबिक आने वाले वक्त में सऊदी अरब पूरी तरह अस्थिर हो सकता है। इसकी शुरूआत तभी हो चुकी थी जब वहां के शासन की कमान क्राउन प्रिंस सलमान ने ली थी। उन्हें अनुभवहीन बताया गया। क्राउन प्रिंस ने अपने कई चचेरे भाईयों को जेल में बंद कर दिया था। शाही परिवार का संकट अचानक तब बढ़ गया जब शाही परिवार के कभी अजीज रहे पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या हुई। इस हत्या का आरोप बीओए ने प्रिंस क्राउन पर लगाया।


चीन वह देश है जो भारत विरूद्ध लगातार जाल बिछा रहा है। वह भारत के अन्य पड़ोसी देशों कभी नेपाल तो कभी पाकिस्तान और कभी श्रीलंका के साथ मिलकर भारत के खिलाफ गतिविधियों में सलंग्न है। बेशक जी-20 शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति के साथ भारतीय प्रधानमंत्री मंच पर साथ नजर आए। दोनों देशां के प्रतिनिधियों में आपस में कुछ अहम समझौता भी किया। लेकिन कुल मिलाकर चीन के रवैये को भारत के लिए सुखद नहीं कहा जा सकता। चीन दक्षिणी चीनी सागर और पूर्वी चीनी सागर में लगातार विवाद खड़े कर रहा है। दोनों ही क्षेत्र खनिज, तेल और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हैं। चीन के आक्रामक रवैये को लेकर एशिया की दो बड़ी ताकतें भारत-जापान भी चिंतित हैं। भारत-चीन के बीच दक्षिण एशिया में वर्चस्व बनाने की होड़ है। हाल में मालद्वीव और श्रीलंका में भी दोनों के बीच वर्चस्व की रेस देखने को मिली। बीच-बीच में कुछ सुखद बातें जरूर हो जाती हैं। दोनों देशों के बीच कुछ कारोबारी सौदे भी हुए। असल में अमेरिका चीन के बीच ट्रेड वार भारत-चीन को करीब लाया है। चीन भारत के सेब और डेयरी प्रोडक्ट निर्यात करना चाहता है। जापान-भारत, चीन को मिल्क प्रोडक्ट और भैंस का मीट एक्सपोर्ट करना चाहता है। भारत ने चीनी सेब के आयात पर पिछले साल रोक लगा दी थी। भारत का कहना था कि इसमें कीटनाशक ज्यादा है। बदले में चीन ने भी भारत के भैंस के मीट के आयात को प्रतिबंधित कर दिया। एक तरह से चीन का भारत के प्रति संबंध अमेरिका और रूस पर ज्यादा निर्भर करता है। यह कई बार कहा जा चुका है कि चीन भारत का दुश्मन नंबर एक है। यह बात बतौर रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज ने कही थी जो एक अटल सत्य है।

भारत का सबसे तनावपूर्ण संबंध पाकिस्तान के साथ रहा है। उसके साथ तीन युद्ध इसके प्रमाण हैं। पाकिस्तान में इस बीच निजाम बदला है। पूर्व क्रिकेटर इमरान खान ने हाल ही में सत्ता की बागडोर संभाली है। इमरान की सियासी छवि एक कट्टर राजनेता की रही है। अभी तब के अति संक्षिप्त शासनकाल में इमरान खान ने जो भारत को लेकर बयान दिए हैं, वह बहुत उम्मीद जमाने वाले नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को वहां की भ्रष्टाचार विरोधी अदालत सात साल की सजा सुना चुकी है।

साल के अंतिम दिनों में इंडोनेशिया में आए सुनामी ने सैकड़ों लोगों की जान ली। ऐसी आशंका है कि यह सुनामी फिर से कहर बरपा सकती है। साल भर पूरी दुनिया में विस्थापन एक बड़ा मुद्दा रहा है। दुनिया में लगातार बढ़ रही शरणार्थियों की भीड़ एक बड़ी चिंता का कारण है।

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