[gtranslate]
वर्ष 2018 में देवभूमि जघन्य अपराधों से कांप उठी। सुदूर पर्वतीय अंचलों तक ऐसी हैवानियत देखने को मिली कि देशभर के लोग आवश्चर्यचकित हो गए। अगस्त माह में उत्तरकाशी में मासूम बची से हुई दरिंदगी के बाद मुख्यमंत्री ने कहा था कि राक्षसों के लिए देवभूमि में कोई जगह नहीं। लेकिन राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कुछ ऐसी है कि दिसंबर माह में पौड़ी जिले में एक शैतान ने छेड़छाड़ का विरोध करने पर छात्रा को जिंदा जला डाला
देवभूमि के लिए बीता साल बहुत ही दर्द देने वाला रहा। खासकर महिलाओं पर जुल्म की जो इंतिहा हुई उसने वर्ष 2018 को ‘वुमेन ब्लैक ईयर’ बना दिया। यह साल उत्तराखण्ड की महिलाओं के साथ ज्यादतियों के लिए जाना जाएगा। महिलाओं की सुरक्षा के मामले में आंकड़े चौंकाने वाले हैं। उत्तराखण्ड में इस साल जिस तरह की घटनाएं हुई वह रोंगटे खड़े करने वाली हैं। खुद सरकार के आंकड़े बताते हैं कि सूबे में हर 16 घंटे में एक बेटी बलात्कार का शिकार हो रही है।
महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले में राज्य की राजधानी भी बेहद असुरक्षित साबित हुई। इसी साल जनवरी से अक्टूबर के बीच अकेले राजधानी देहरादून में 110 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं सामने आई। हैरतंगेज यह है कि 2017 में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में 14 फीसदी की जो बढ़ोतरी देखी गई थी वह आंकड़ा 2018 के अक्टूबर माह में ही पार हो गया। इस तरह से प्रदेश में दो साल में ही ढाई हजार महिलाएं जुल्म का शिकार हुई। बावजूद इसके सबसे बड़ी बात यह है कि सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा की बाबत कोई विशेष कदम नहीं उठाया। महिलाओं पर जुल्मो सितम होते रहे और सरकार बेफ्रिक सोती रही। अपराधों ने महिला सशक्तिकरण के बड़े दावे करने वाली केंद्र सरकार और त्रिवेंद्र सरकार के डबल इंजन की पोल खोल दी। पूरे साल महिलाओं की सुरक्षा के मामले में सरकार बैकफुट पर ही नजर आती रही।
पहाड़ की वादियां अपने शांत मिजाज के लिए जानी जाती हैं। लेकिन इंसान के मस्तिष्क में पलने वाली आपराधिक सोच इन हसीन वादियों में जब बेजा खलल पैदा करती हैं तो नैसर्गिकता के आकर्षण में कमी आने लगती है। पौड़ी जिले में एक छात्रा पर पेट्रोल डालकर जलाने की घटना ने इन बदलती परिस्थितियों की एक झलक पेश की है। महानगरीय चकाचौंध में होने वाली ये घटनाएं यदि देवभूमि में घटित हो रही हैं तो यह कोई साधारण किस्सा नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी की असल तस्वीर दिखाती है। यदि इस तरह के अमानवीय और जघन्य अपराध वाली घटनाएं सामने आती रही तो देवभूमि उत्तराखण्ड के हालात बद से बदतर होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। पुलिस क्राईम रिकॉर्ड ब्यूरो की एक रिपोर्ट के अनुसार पहाड़ की शांत वादियों में खासतौर पर महिलाओं से जुड़े मामलों में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि हो रही है। पिछले तीन सालों में महिला अपराध से संबंधित 3867 घटनाएं हुई हैं। इनमें हत्या की 83 और बलात्कार की 676 घटनाएं, दहेज हत्या की 97 घटनाएं घटीं। एसिड अटैक जैसी घटनाओं ने तो फिजा में जहर घोलने का काम किया।
उत्तरकाशी जैसे सीमांत जिले में छेड़खानी, हत्या बलात्कार, अपहरण के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। पहाड़ की शांत वादियों में महिलाओं से जुड़े अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। गढ़वाल मंडल के ही आकड़ों पर अगर नजर डालें तो विगत तीन वर्षों में महिला अपराधों से जुड़ी 3867 घटनाएं सामने आई हैं। इनमें हत्या बलात्कार, दहेज, हत्या, छेड़छाड़ और एसिड अटैक जैसी घटनाएं मुख्य हैं। हालांकि इनमें तीन हजार से ज्यादा घटनाएं देहरादून और हरिद्वार जिले की हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक गढ़वाल मंडल में वर्ष 2016 से नवंबर 2018 तक महिलाओं के प्रति अपराध की कुल 3867 मामले सामने आए हैं। इनमें वर्ष 2016 में 1057, 2017 और इस वर्ष नवंबर तक 1603 घटनाएं घटित हुई हैं। आंकड़े स्पष्ट हैं कि महिला अपराधों से जुड़ी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इनमें हत्या की 83, बलात्कार की 675, दहेज हत्या की 97 घटनाएं शामिल हैं। जबकि दूसरी तरफ गढ़वाल मंडल के पांच पर्वतीय जनपदों में महिला उत्पीड़न से जुड़ी 607 घटनाएं हुई। जिनमें चमोली, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी एवं पौड़ी जनपद शिमल हैं। अकेले पौड़ी जनपद में ही 251 घटनाएं घटित हुई।
दरअसल, पिछले पांच सालों में उत्तराखण्ड की सियासत में ही नहीं बल्कि सामाजिक जीवन में भी खतरनाक बदलाव देखने को मिला है। कुछ साल पहले नैनीताल जिले के कालाढूंगी में एक घटना हुई थी। जिसमें ब्लॉक प्रमुख कन्याल की हत्या के विरोध में भीड़ ने थाना जला दिया था और एक पुलिसकर्मी को भी मौत के घाट उतार दिया था। अगली सरकार आई तो अभियुक्तों के खिलाफ दर्ज मुकदमे ही वापस ले लिए गए थे। इससे अपराधियों को अपराध करने के प्रति बल मिला। अपराधी बखूबी समझ गए कि सियासत का हाथ जिसके सर पर हो उसका कोई बाल बांका भी नहीं कर सकता है। शायद यही वजह रही कि आज तक यह पता नहीं चल सका है कि कन्याल की हत्या के लिए दोषी कौन था। तीन साल पहले नारायण बगड़ में आठ साल की बच्ची के साथ दुराचार और फिर हत्या जैसे अपराध तो पहाड़ की संस्कृति से मेल नहीं खाते हैं। इससे पहले भी पहाड़ में बढ़ती गंभीर अपराधों की सूची ने लोगों को आगाह किया कि पर्वतीय श्रृंखलाओं की नैसर्गिकता को अब अपराध की दीमक चाटने लगी है।
तराई के ऊधमसिंहनगर की अगर बात करें तो जनपद में पिछले 11 महीने में 710 मामले दर्ज किए गए। जिले में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं इसकी तस्दीक ये आकड़े बया कर रहे हैं। बीते एक जनवरी 2018 से 15 दिसंबर 2018 तक के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले की 17 कोतवाली और थानों में महिलाओं से संबंधित 710 मामले दर्ज हुए हैं जिसमें सबसे अधिक मामले दुष्कर्म के दर्ज हुए हैं। पुलिस के आंकड़े बता रहे हैं कि जिले के थानों में 102 दुष्कर्म के मामले दर्ज हुए हैं। दूसरे नंबर पर छेड़छाड़ के 98 मामले दर्ज हुए। 96 मामले अपहरण के दर्ज हुए हैं। साथ ही हत्या के 10, दहेज के 11, दहेज हत्या का एक, चेन स्नेचिंग के 3, छेड़छाड़ के 8, सेक्स रैकेट के 6 मामले दर्ज हुए हैं। इसके अलावा अन्य आपराधिक घटनाओं के 275 मामले दर्ज हुए हैं। कुमाऊं में किशोर बच्चों के साथ पॉक्सो के तहत दर्ज मुकदमों की संख्या भी पहले से अधिक हो गई है। 2016 में जहां 152 मुकदमे दर्ज हुए वहीं 2017 में 208 तथा 2018 में यह आंकड़ा बढ़कर 263 हो गया।
17 अगस्त 2018 को उत्तरकाशी में घटित हुई घटना पर प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्विटर पर लिखा था कि इस गैंगरेप और हत्या के मामले ने मुझे अंदर तक हिलाकर रख दिया है। ऐसे राक्षसी अपराध के लिए देवभूमि में कोई जगह नहीं है। मैं सुनिश्चित करूंगा कि अपराधियों को कानून के अंतर्गत कठोर से कठोर सजा दी जाए। याद रहे कि 17 अगस्त को उत्तरकाशी के डुंडा ब्लॉक स्थित एक गांव की 12 वर्षीय दलित बालिका हैवानियात की शिकार बनी थी। वारदात के वक्त वह अपने घर में सो रही थी। इस बीच उसे घर की बिजली काटकर अंधेरे में उठा लिया गया। घटना के वक्त पीड़ित की बड़ी बहन रिश्तेदारी में गई थी। घर में केवल माता-पिता थे। मां मानसिक रूप से कमजोर है जबकि पिता को सुनाई नहीं देता। सुबह पांच बजे जब लोग देवीघाट रनाड़ी मोटर मार्ग से गुजर रहे थे तो उन्हें बालिका की लाश दिखाई पड़ी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बालिका के पूरे शरीर पर जख्मों के गहरे निशान थे। उसके साथ गैंगरेप करके बेहरहमी से हत्या कर शव को सड़क पर फेंक दिया गया था। बच्ची के गैंगरेप और हत्या मामले में कुछ बिहारी मजदूरों पर शक किया गया। पांच मजदूर गिरफ्तार भी कर लिए गए थे। लेकिन बाद में पता चला कि हत्या और बलात्कार करने वाला एक पड़ोसी गांव का खच्चर चलाने वाला मुकेश लाल पुत्र पवन निवासी दिनशाद टिहरी गढ़वाल था। बाद में उसे पुलिस ने पकड़ तो लिया लेकिन अभी भी सवाल यह है कि एक अकेला व्यक्ति इतनी बड़ी वारदात को कैसे अंजाम दे सकता है।
 अगस्त 2018 को हल्द्वानी में हुई पूनम पांडे की हत्या वर्ष 2018 की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बनकर रह गई है। जिस खौफनाक हत्याकांड ने पूरी देवभूमि को हिलाकर रख दिया था उसका पुलिस चार माह बाद भी खुलासा नहीं कर पाई। एसआईटी भी इस मामले में हथियार डाल चुकी है। खुद सूबे के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अशोक कुमार घटना स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। गौरतलब है कि 27 अगस्त 2018 की रात हल्द्वानी स्थित गोरापड़ाव के एक घर में घुसकर अज्ञात बदमाशों ने 42 वर्षीय पूनम पांडे की निर्मम हत्या कर दी थी। इस घटना में हमलावारों ने मृतक की बेटी अर्शी को भी गंभीर रूप से घायल कर दिया था। पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए 18 टीमें बनाई।
हाईकोर्ट नैनीताल के निर्देश पर एसआईटी भी गठित की गई। लेकिन पुलिस के हाथ अभी तक खाली हैं। इसके अलावा अक्टूबर माह में चंपावत जिले के लोहाघाट में एक शिवालय मंदिर में दो दरिंदों ने सात साल की मासूम के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। हालांकि बाद में पास के गांव के ही दो आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। गत महीने चंपावत में बदमाशें ने लूट के बाद महिला संरपंच की हत्या कर सनसनी फैला दी थी।
पिछले कुछ दिनों  में महिलाओं के साथ हुई रोंगटे खड़े करने वाली वारदातों पर निशा नेगी कहती हैं कि देवभूमि उत्तराखण्ड से अब शायद देवता नाराज हो चले हैं। तभी तो देवभूमि में अब हैवानियत हावी हो चली है। उत्तराखण्ड अब पहले जैसा नहीं रहा। यहां आए दिन कोई न कोई ऐसी आपराधिक वारदात देखने और सुनने को मिल जाती है जिससे मन पूरी तरह आहत हो जाता है। पिछले कुछ समय से यहां कई ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं जो कि देवभूमि की छवि को बर्बाद कर रही हैं। अभी हाल ही में पौड़ी डिग्री कॉलेज की छात्रा को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की घटना ने देवभूमि को शर्मसार कर दिया है। छात्रा सात दिन तक दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझती रही और आखिर में उसने दम तोड़ दिया। इस शर्मनाक वारदात को लोग भूले भी नहीं थे कि कर्णप्रयाग में दरिंदों ने एक मासूम के साथ गैंगरेप कर डाला। ऐसी ही दरिंदगी। उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी गांव में 12 साल की बच्ची के साथ हुई थी। उस घटना ने उत्तरकाशी सहित पूरे उत्तराखण्ड को हिलाकर रख दिया था। उत्तरकाशी के ही भटवाड़ी विकासखंड के अंतर्गत एक राजकीय इंटर कॉलेज की दो छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामले में दो अध्यापकों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
वर्ष 2018 में हुए अपराध
क्र. अपराध संख्या
1   डकैती                                7
2   लूट                                122
3   वाहन लूट                      24
4  चेन लूट/स्नेचिंग             36
5  ग्रहभेदन                        358
6  वाहन चोरी                      897
7  चोरी                               1040
8  हत्या                               181
9  बलवा                             512
10  फिरौती हेतु अपहरण        2
11   हत्या हेतु अपहरण           1
12  व्यवहरण                   255
13  दहेज हत्या                 60
14  बलात्कार                 488

You may also like

MERA DDDD DDD DD