sport

इस बार खास प्रदर्शन रहा

वर्ष 2018 समाप्त होने जा रहा है और साल 2019 का आगाज होने वाला है। जिस तरह आजादी के बाद भारत ने बहुत तरक्की की, वैसे ही 2018 का साल खेलों के लिए अच्छा रहा। भारतीय खेल में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां भारत की गिनती टॉप देशों में होती है, तो कई क्षेत्रों में अभी भी भारत बहुत पीछे है। भारतीय स्पोर्ट्स के लिए वर्ष 2018 कई मामलों में शानदार रहा। जहां कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में हमारे ऐथलीटों ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया तो महिला बॉक्सर एमएसी मेरी कॉम ने 35 वर्ष की उम्र में विश्व चैंपियन बनकर दिखाया कि अब भी वह किसी से कम नहीं। साल खत्म होता इससे पहले ही ओलिंपिक सिल्वर मेडलिस्ट पीवी सिंधु ने वर्ल्ड टूर फाइल्स का खिताब अपने नाम करते हुए इतिहास रच दिया। एशियन चैंपियंस ट्राफी हॉकी में भारतीय टीम पाकिस्तान के साथ संयुक्त विजेता रही।
आए और छा गए युवा खिलाड़ी जेवलिन थ्रो एथलेटिक्स नीरज चोपड़ा : 18वें एशियाई खेलों के उद्धाटन समारोह में भारतीय दल के झंडाबरदार रहे नीरज चोपड़ा ने खेलों में अपनी छाप छोड़ी। 20 वर्षीय इस खिलाड़ी ने पुरुषों की भालाफेंक स्पर्धा में 88 ़06 मीटर दूरी तय कर स्वर्ण पदक जीता। वह एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। एशियन गेम्स में भारत के ऐसे खिलाड़ी थे जिनसे इंडोनेशिया में सबको गोल्ड मेडल की उम्मीद थी। नीरज ने भी निराश नहीं किया और 88 मीटर से अधिक जेवलिन थ्रो कर गोल्ड जीता और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। कह रहे हो कि गोल्ड तो सिर्फ उनका ही है। इससे पहले अप्रैल में खेले गए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को गोल्ड मेडल दिलाया था। 20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी रिकॉर्ड तोड़ते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। नीरज में शानदार प्रतिभा है और वह 90 मीटर क्लब में शामिल होने की काबिलियत रखते हैं। वह ओलंपिक में भी भारत को एथलेटिक्स में मेडल दिला सकते हैं।
धाविका हिमा दास :  हिमा को इस साल की शुरुआत में हुए फेडरेशन कप से पहले कोई नहीं जानता था, मूलतः 100 और 200 मीटर की धाविका हिमा ने मार्च में हुए फेडरेशन कप में पहली बार 400 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया और अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए फिनलैंड के टैम्पेयर में आईएएएफ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा। यह पहली बार है जब भारत को आईएएएफ की ट्रैक स्पर्धा में गोल्ड मेडल हासिल हुआ है। उनसे पहले भारत की कोई महिला खिलाड़ी जूनियर या सीनियर किसी भी स्तर पर विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड नहीं जीत सकी थी।
निशानेबाज मनु भाकर : शूटिंग में अब युवाओं का समय आ गया है। महज 16 साल की मनु भाकर ने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल में हीना सिद्धू सहित बड़े-बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल जीतकर सबको चौंकाया। मनु इन खेलों से पहले ही सुर्खियों में आ गई थीं। गोल्ड कोस्ट में अपने अभियान का आगाज करने से पहले मनु ने मैक्सिको में हुए सीनियर आईएसएसएफ विश्व कप में दो स्वर्ण जीते थे। इसलिए उनसे उम्मीद थी, जिसे उन्होंने पूरा किया।
निशानेबाज विहान : सबसे काम उम्र के 15 वर्षीय विहान ने पुरुषों की डबल ट्रैप स्पर्धा में सिल्वर मेडल हासिल किया। इसके साथ ही वह एशियाई खेलों में सबसे कम उम्र में पदक जीतने वाले भारतीय बने। वह निशानेबाजी की डबल ट्रैप में दूसरे स्थान पर रहे।
निशानेबाज सौरभ चौधरी : महज 16 वर्षीय सौरभ चौधरी ने 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। वह एशियाई खेलों में सबसे कम उम्र में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी बने।
रेसलर बजरंग पूनिया : भारत के 24 वर्षीय रेसलर बजरंग पूनिया ने 18वें एशियन गेम्स में भारत की झोली में पहली गोल्डन मेडल डाला। बजरंग ने 65 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में जापान के ताकातानी दाईची को 11-8 से मात देकर स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। इसी के साथ वो एशियाई खेलों के इतिहास में कुश्ती में भारत को स्वर्ण पदक जिताने वाले पहले रेसलर बने।
पहलवान विनेश फोगाट : भारत की महिला पहलवान विनेश फोगाट ने महिलाओं की 50 किग्रा फ्री स्टाइल कुश्ती में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इसके साथ ही एशियाड में इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं।
शूटर राही सर्नोबत : एशियन गेम्स भारत के लिए 25 मीटर पिस्टल इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। इसके साथ ही वो एशियन गेम्स के इतिहास में निशानेबाजी में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला शूटर बनीं।
एशियाई खेलों के इतिहास में टेबल टेनिस पदक
भारत ने एशियाई खेलों के इतिहास में टेबल टेनिस में पहली बार कोई पदक हासिल किया। भारत को पुरुषों की टीम स्पर्धा में और मिक्स्ड डबल्स स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल हुआ। एकल में भारतीय खिलाड़ी अंतिम 16 से आगे नहीं जा पाए लेकिन दो कांस्य पदक जीतकर भारतीय दल ने शानदार प्रदर्शन किया। मिक्सड डबल्स में शरथ कमल और मनिका बत्रा की जोड़ी ने भी कांस्य पदक जीता। सेपक टेकरा को एशियाई खेलों में 1990 में शामिल किया गया था लेकिन इसमें पहला पदक जीतने में भारत को 28 साल लग गए। भारत ने 18वें एशियाई खेलों में पुरुषों की टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता।

पदक जीतने वाले उम्रदराज खिलाड़ी 

प्रणव वर्धन और शिवनाथ : ब्रिज
अठारहवें एशियाई खेलों में भारत सबसे उम्रदराज  60 वर्षीय प्रणव वर्धन और 56 वर्षीय शिवनाथ ने ब्रिज में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। दोनों ने फाइनल में 384 अंक हासिल किए और भारतीय दल के लिए 18वें एशियाई खेलों में 15वां स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही मौजूदा एशियाई खेलों में प्रणव वर्धन पदक जीतने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए हैं।
एशियन गेम्स 2018 में भारतीय दल ने बहुत जबरदस्त प्रदर्शन किया। एशियन गेम्स के इतिहास में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए भारत ने 15 गोल्ड, 24 सिल्वर और 30 ब्रॉन्ज मिलाकर कुल 69 मेडल जीते। इससे पहले भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 में किया था, तब भारतीय दल ने चीन के ग्वांगजू में आयोजित 16वें एशियाई खेलों में 65 पदक हासिल किए थे। इसमें 14 स्वर्ण, 17 रजत और 34 कांस्य पदक शामिल थे।
सर्वोच्च खेल रत्न से सम्मानित
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और भारतीय महिला वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों खेल का सर्वोच्च सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न सम्मान हासिल किया। विराट कोहली देश के तीसरे क्रिकेटर हैं जिन्हें राजीव गांधी खेर रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। वहीं मीराबाई चानू की बात करें तो वो देश की तीसरी वेटलिफ्टर हैं जिन्हें ये सम्मान दिया गया है।
खेल में मिली उत्तराखण्ड को कामयाबी
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के प्रबंधन के गठित समिति ने प्रदेश के खिलाड़ियों को वर्ष 2018-19 के घरेलू सीजन में खेलने लिए मान्यता प्रदान की। 18 साल के लंबे इंतजार के बाद उत्तराखण्ड के खिलाड़ियों को अब क्रिकेट खेलने के लिए अन्य राज्यों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के प्रबंधन को गठित समिति ने प्रदेश के खिलाड़ियों को वर्ष 2018-19 के घरेलू सीजन में खेलने के लिए मान्यता दी है।
आगामी वर्षों में नेशनल गेम्स की मेजबानी 
वर्ष 2018 के जाते-जाते उत्तराखण्ड को नेशनल गेम्स 2020 की मेजबानी पर ओलंपिक संघ ने मुहर लगाई है। इससे पहले ये गेम्स 2019 में गोवा में होने थे। लेकिन ऐन मौके पर उत्तराखण्ड को यह जिम्मेदारी दे दी गई। उत्तराखण्ड के खेल प्रेमियों के लिए यह अच्छी खबर है। राष्ट्रीय खेलों के लिए उत्तराखण्ड के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और मिजोरम भी इस रेस में शामिल थे। लेकिन सफलता उत्तराखण्ड के हाथ लगी।
बरकरार रखा एशिया कप खिताब 
सितंबर में यूएई में हुए एशिया के इस महासंग्राम में एक बार फिर रोहित शर्मा को टीम इंडिया की कमान मिली। इस सीरीज में भी विराट कोहली को आराम दिया गया था। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले यह कहा जा रहा था कि कोहली के बिना यह टीम शायद ही एशिया कप जीत पाएगी और पाकिस्तान के खिलाफ कमजोर साबित होगी। लेकिन, रोहित ब्रिगेड ने टूर्नामेंट में पाकिस्तान को दो बार मात देकर सभी को गलत साबित कर दिया और टूर्नामेंट में बिना कोई मैच गंवाए रिकॉर्ड सातवीं बार एशिया कप का खिताब अपने नाम किया।
हॉकी के लिए निराशाजनक
वर्ष 2018 में तीन बड़े टूर्नामेंट हुए। राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और अपनी मेजबानी में हॉकी विश्वकप। लेकिन भारतीय हॉकी टीम इस वर्ष को यादगार बनाने में नाकाम रही। भारतीय हॉकी टीम को नवंबर-दिसंबर में ओडिशा के भुवनेश्वर में अपनी मेजबानी में हुए विश्वकप के 43 साल के लंबे अंतराल के बाद खिताब जीतने की उम्मीद थी। लेकिन उसका सपना क्वाटर फाइनल में हॉलैंड के हाथों हार के साथ ही टूट गया। भारतीय टीम ने क्वाटर फाइनल में तमाम समर्थन के बाबजूद उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया और उसे टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।
एशियाई खेलों में भारतीय हॉकी टीम ने अगस्त में  सेमीफाइनल में मलेशिया से सदन डैथ में हारकर अपना खिताब गंवा बैठी, और उसके हाथों से 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने का मौका भी निकल गया। इससे पहले अप्रैल में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय पुरुष हॉकी टीम को सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से 2-3 से हारने के बाद कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। महिला हॉकी टीम राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक मुकाबलों में 0-6 से बुरी तरह हारी। हालांकि एशियाई खेलों में महिला टीम ने फाइनल में पहुंचकर रजत पदक हासिल किया।
इन तीन बड़े टूर्नामेंटों को छोड़ दिया जाए तो भारत ने पाकिस्तान के साथ एशियन कप ट्रॉफी को साझा किया। मस्कट में फाइनल मुकाबले में बारिश के कारण फाइनल नहीं खेला जा सका और दोनों टीमों को संयुक्त रूप से विजेता घोषित किया।
मैरीकॉम बनी नंबर वन
बीते वर्ष 2018 के नवंबर महीने  में भारत की दिग्गज खिलाड़ी एमसी मैरीकॉम ने विश्व महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में छठी बार स्वर्ण पदक जीता। उन्होंनें 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में यूक्रेन की हना ओखोता को 5-0 से हराया। मैरीकॉम विश्व चैंपियनशिप में छह गोल्ड मेडल जीतने वाली दुनिया की पहली महिला बॉक्सर बन गई हैं। इससे पहले मैरीकॉम और आयरलैंड की केटी टेलर के नाम पांच-पांच गोल्ड थे। केटी अब प्रोफेशनल बॉक्सर बन गई हैं। इस कारण इस बार केटी इस
टूर्नामेंट में नहीं उतरी।
सिंधु की स्वर्णिम सफलता 
साल 2018 के अंत में भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने विश्व टूर फाइनल्स में ऐतिहासिक खिताबी जीत के बाद उम्मीद जताई कि अब कोई बड़ा खिताब जीतने की उनकी क्षमताओं पर सवाल नहीं उठाएगा। लगातार सात फाइनल में हार के बाद ओलंपिक रजत पदक विजेता सिंधु ने जापान की नोजोमी ओकुहारा को 21-19, 21-17 से हराकर प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का खिताब जीत दर्ज की।

Leave a Comment

Your email address will not be published.

You may also like