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Uttarakhand

कालाबाजारी की शिकायत पर प्रशासन की टूटी नींद

कालाबाजारी की शिकायत पर प्रशासन की टूटी नींद

तीन दिन से जनपद में लगातार मिल रही कालाबाजारी की शिकायतों पर कार्यवाही को लेकर कुम्भकर्णी नींद में सोए हरिद्वार जिला प्रशासन की नींद बुधवार को टूटी है। गौरतलब है कि प्रदेश में लॉकडाउन घोषित होने के बाद आवश्यक वस्तुओं जैसे खाने-पीने की चीजों और सब्जियों के दामों में भारी उछाल आ गया है तो वहीं जमाखोरी भी जोर पकड़ रही है।

जमाखोरी के साथ हो रही कालाबाजारी के चलते ही दो दिन के भीतर ही आटे का भाव 40 रुपये प्रति किलो पहुंचने से आम आदमी का जीना दुर्भर हो गया है। क्योंकि एक तो लॉक डाउन के चलते रोजगार पर संकट फिर ऊपर से महंगाई की मार 22 मार्च के जनता कर्फ्यू के समाप्त होते ही प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा 31 मार्च तक पूरे प्रदेश को लॉकडाउन रखने की घोषणा की गई थी। परंतु देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

प्रधानमंत्री द्वारा 24 मार्च को पूरे देश में लॉक डाउन कर्फ्यू की घोषणा किए जाने के बाद खाद्य पदार्थ की वस्तुएं आम आदमी की पहुंच से दूर हैं तो वहीं दूसरी ओर जमाखोरी और कालाबाजारी के चलते सब्जियों और आटा-दाल के भाव आसमान छू रहे हैं। तीन दिन पूर्व 10 रुपये किलो बिकने वाला टमाटर आज 50 रुपये किलो 20 रुपये किलो बिकने वाली प्याज 50 रुपये के भाव बिक रहा है। दो दिन से कालाबाजारी की मिल रही सूचना के बाद बुधवार से जिला प्रशासन की नींद टूटी।

हरिद्वार के जिलाधिकारी रविशंकर ने बुधवार को आदेश जारी कर कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए व्यापारियों को अपनी-अपनी दुकानों पर रेट लिस्ट चस्पा किए जाने के निर्देश जारी किए गए। परंतु सवाल उठ रहा है कि क्या निर्देश जारी करने से ही कालाबाजारी पर अंकुश लग पाएगा। जब तक दुकानों के खुलने के समय सुबह 7:00 बजे से 10:00 के बीच प्रशासनिक टीम छापामारी जैसी कठोर कार्रवाई नहीं करती तो कालाबाजारी पर अंकुश लगना संभव नजर नहीं आ रहा है। मतलब साफ है कि कोरोना वायरस के चलते घोषित किए गए लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण आने वाले 21 दिन गरीब आदमी के लिए खासी दुश्वारियां लेकर आएंगा।

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