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17 मार्च जयंती विशेष:कल्पना मात्र नहीं था कल्पना का सपना 

भारत की महान बेटी कल्पना चावला जिस पर पूरे देश को गर्व है,एस्ट्रनॉट कल्पना चावला की आज जयंती है। कल्पना हरियाणा के करनाल में 17 मार्च 1962 को पैदा हुईं। वह पंजाब इंजीनियरिंग कालेज में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाली पहली महिला थीं।
वर्ष 2003 में पहली फरवरी को अमेरिका का अंतरिक्ष शटल कोलंबिया अपना अंतरिक्ष मिशन समाप्त करने के बाद धरती के वातावरण में वापस लौटने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और इसमें सवार सभी सात अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हो गई। भारत पर भी इस घटना का गहरा असर पड़ा क्योंकि भारत की महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला भी इस हादसे में मारी गईं।

कल्पना अपने साथियों के साथ अंतरिक्ष से धरती पर लौट रही थीं। हर किसी की निगाह उस अंतरिक्ष यान पर टिकी हुई थी, जो कल्‍पना को लेकर धरती पर पहुंचने वाला था। अंतरिक्ष यान कोलंबिया शटल STS-107 धरती से करीब 2 लाख फीट की ऊंचाई पर था। उसे धरती पर पहुंचने में महज 16 मिनट का समय लगने वाला था,लेकिन अचानक अंतरिक्षयान से नासा का संपर्क टूट गया और अगले कुछ मिनटों में इसका मलबा अमेरिका के टैक्सस राज्य के डैलस इलाके में फैल गया। उनकी पहली अंतरिक्ष उड़ान STS 87 कोलंबिया शटल से पूरी हुई थी। उस वक्‍त कल्‍पना चावला की वो बात लोगों के दिलों में घर कर गई अक्सर जब कल्पना कहा करती थीं ”मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनीं हूं, हर पल अंतरिक्ष के लिए बिताया और इसी के लिए मरूंगी”। यह बात सच भी साबित हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अंतरिक्ष कार्यक्रम में जीवन समर्पित करने और लाखों लड़िकयों को अंतरिक्ष यात्री बनने का सपना दिखाने वाली कल्पना चावला की तारीफ करते हैं। उन्होंने कल्पना चावला को अमेरिकी हीरो बताया। ट्रंप ने यह तब कहा जब उन्होंने मई महीने को ‘एशियन/ अमेरिकन एंड पैसिफिक आइजलैंडर हैरिटेज मंथ’ घोषित करते हुए संबंधित घोषणा जारी की। अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय महिला कल्पना चावला देश की करोड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। कल्‍पना ने कहा था, ‘कुछ ऐसा करो जिसे आप सच में करना पसंद करते हो।

अगर आप बस इसे अपना लक्ष्‍य समझकर कर रहे हो और उसे करने की प्रक्रिया का आनंद नहीं ले रहे हो तब आप खुद के साथ विश्‍वासघात कर रहे हो’। कल्‍पना चावला हमेशा युवाओं से सपने को साकार करने की बात पर जोर देती रहीं, उन्‍होंने कहा, ‘अगर आपके पास कोई सपना है तो उसको साकार करने का प्रयास करो। इस बात से जारा सा भी फर्क नहीं पड़ता कि आप एक औरत हैं। भारत से हैं या फिर कहीं और से।  आप जब तारों और आकाशगंगाओं को देखते हैं तो ऐसा लगता है कि आपका अस्‍तित्‍व किसी विशेष भूमि के कारण नहीं,बल्कि सौर मंडल के कारण है’।

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