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अमेरिका का अलबामा राज्य, जहां पिछले 28 वर्षों से योग पर लगा हुआ है ‘बैन’

भारतीय हिन्दू संस्कृति में योग सदियों से एक अहम हिस्सा रहा है। इसके अलावा योग के कई चिकित्सकीय फायदे भी हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो आत्मा को परमात्मा से मिलाने की क्रिया ही योग है और वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो यह स्वस्थ जीवन का आधार है। इसी वजह से वर्ष 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित कर दिया था। जिसके बाद विश्व भर में योग लोकप्रिय तो हुआ ही साथ ही इसके कई और फायदे भी निकलकर लोगों के सामने आए।

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एक अध्ययन के मुताबिक, वर्ष 2014 के बाद से अमेरिका में योग करने वालों की संख्या तीन करोड़ 60 लाख से भी अधिक हो चुकी है। अमेरिका ही नहीं दुनियाभर के लोगों ने भाषायी और सांस्कृतिक सीमाओं को दरकिनार कर योग को व्यापक स्तर पर अपनाया है। लेकिन चिंता को दूर करने वाले और मन को शांत करने वाले इस योग से अमेरिका के एक राज्य में कट्टर पंथी बेहद चिंतित हैं। जिस योग को पूरी दुनिया अपना रही है उसे अमेरिका का ये राज्य क्यों नहीं ? यह इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि अमेरिका के दूसरे राज्यों में यह काफी लोकप्रिय है और यह उन देशों में शामिल है, जहां 21 जून को विश्व योगा दिवस उत्साह पूर्वक मनाया जाता है।

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दरअसल, अमेरिका के इस राज्य का नाम अलबामा है। अलबामा राज्य में बीते 28 साल से सरकारी स्कूलों में योग पर बैन लगा हुआ है, जो अब तक जारी है। ताजा मामला ये है कि अब तक भी योग पर बैन का समर्थन करने वाले लोग इसे हटाने के लिए सहमत नहीं हैं। पिछले साल मार्च में इस बैन को हटाने के लिए एक विधेयक पारित किया गया था। तब इस योग विधेयक को अलबामा प्रतिनिधि सभ ने 17 के मुकाबले 84 मतों से पारित कर दिया था। 28 साल से लगे इस प्रतिबंध को हटाने का रास्ता लगभग साफ़ हो चुका था। लेकिन मंजूरी के लिए जब इसे सीनेट में लाया गया तो वहां ईसाई कट्टर पंथियों के विरोध के चलते योग विधेयक को मंजूरी नहीं मिली।

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वर्ष 2019 से योग पर लगे बैन को हटाने के लिए अलबामा हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव जेरेमी ग्रे प्रयास कर रहे हैं। लेकिन वह सफल नहीं हो पाए। उन्होंने  कट्टरपंथियो को जवाब देते हुए कहा कि ये धारणा गलत है कि योग करने से हम हिन्दू बन जायेंगे। मैं खुद बीते 10 साल से योग कर रहा हूँ और ईसाई हूँ । उन्होंने कहा, “मैंने खुद 5 साल तक कक्षाओं में योग सिखाया है और हर रविवार बैप्टिस चर्च जाता हूँ।” उनका कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य मात्र अलबामा के सरकारी स्कूलों में योग को ऐच्छिक विषय के तौर पर चुनने का विकल्प देना था।

योग पर लगे बैन की कहानी इस राज्य में वर्ष 1993 से चली आ रही है। माना जाता है कि कट्टरपंथी ईसाइयों के कारण ही अलबामा के स्कूलों में तब से योग पर रोक लगी हुई है। कट्टरपंथी समूहों का आरोप था कि सरकारी स्कूलों में सम्मोहन विद्या के लिए योग का इस्तेमाल किया जाता है। इस कारण चरमपंथियों के दवाब में आकर अलबामा शिक्षा बोर्ड ने सम्मोहन और ध्यान को प्रतिबंधित करने के पक्ष में वोट किया था।

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तभी से यहाँ योग बैन है। इन ईसाइयों को इस बात का डर सता रहा है कि योग करने से लोग धर्मांतरण कर हिंदू बन सकते हैं। जबकि विधेयक में साफ कहा गया है कि केवल योग व्यायाम तकनीक तक सीमित रहेगा। इसमें मंत्रों के उच्चारण और नमस्ते पर रोक होगी। एक तरफ पूरे विश्व में योग का लाभ उठाया जा रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका का ये देश कुछ रूढ़िवादी लोगों के कारण इससे अब तक वंचित है।

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