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हिंसक होता अमेरिकी समाज, मासूम बच्चों में भी बढ़ रही हिंसक प्रवृत्ति

अमेरिका दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश माना जाता है। यहां के नागरिकों को सुखद जीवन जीने की तमाम सुविधाएं हासिल हैं। इसके बावजूद विरोधाभास यह है कि अमेरिकी समाज में दिन-प्रतिदिन हिंसा बढ़ती जा रही है। हिंसा की यह प्रवृति इतनी गहरी हो चुकी है कि इसने स्कूली बच्चों तक को अपनी गिरफ्त  में ले लिया है मासूम स्कूली बच्चे तक खुलेआम हथियारों का इस्तेमाल कर हिंसा को अंजाम दे रहे हैं।

हाल ही में अमेरिका के कोलोराडो राज्य के एक सुपरमार्केट में एक चौंकाने वाली घटना हुई है। कोलोराडो के बोल्डर इलाके में एक अज्ञात व्यक्ति ने एक सुपरमार्केट में गोलीबारी की। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि एक पुलिस अधिकारी सहित 10 लोगों की इसमें मौत हुई। हालांकि पुलिस ने संदिग्ध हमलावर को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़ा गया संदिग्ध भी घायल दिखाई दिया। बोल्डर पुलिस कमांडर केरी यामागुची ने कहा कि संदिग्ध का इलाज चल रहा है।

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बोल्डर काउंटी के जिला अटॉर्नी माइकल डोगार्टी ने कहा कि जांचकर्ताओं को पता है कि घटना में कितने लोग मारे गए। मृतक के परिजनों को सूचना दे दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बहुत ही चौंकाने वाली घटना थी।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि वह बंदूक की आवाज सुनकर उस वक्त घटनास्थल से भाग गया। इस बीच, तीन लोग एक सुपरमार्केट में, दो पार्किंग में और एक दरवाजे में खून से लथपथ पड़े थे। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि यह कहना संभव नहीं है कि वह जीवित थे या मृत। इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। शूटिंग की घटना के बाद सुपरमार्केट के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात की गई है।

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कहा जाता है हिंसा या अहिंसा दोनों ही बचपन से हम सीखना शुरू कर देते हैं। अमेरिकी बचपन ही हिंसक हो गया है और हिंसा की ओर बढ़ चुका है। हिंसा का यह कोई पहला वाक्या नहीं है अमेरिका में कई बार इस तरह गोलीबारी की घटनाएं होती आई हैं। वर्ष 2018 में अमेरिका के ही राज्य टेक्सास में एक स्कूल में गोलीबारी से दस लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। कई लोग उस घटना के वक्त घायल भी हुए थे। सबसे चिंता में डालने वाली बात यह थी कि घटना को अंजाम देने वाला कोई आतंकवादी नहीं बल्कि एक 17 वर्षीय छात्र था जिसने इस भयानक कांड को अंजाम दिया। अनेक बार अमेरिकी स्कूलों और सार्वजानिक जगहों पर होती हिंसा की घटनाओं ने अमेरिकी अख़बारों में एक विशेष जगह बना ली है।

वर्ष 2018, फरवरी महीने में ही फ्लोरिडा हाई स्कूल में 17 लोगों की गोली मारकर हत्या कर देने के बाद जनता आक्रोशित हो उठी थी। जिसके बाद अमेरिका में वर्ष 2018 , 25 मार्च को 800 से ज्यादा जगहों पर 10 लाख से अधिक लोगों ने बंदूक नियंत्रण के कड़े कानूनों की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन किये। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के स्कूलों और सार्वजानिक जगहों पर होते हिंसक रक्तपात की खबरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसे कि अमेरिका में आखिर बंदूक कानून इतने लचीले क्यों हैं कि वे मानवता पर संकट प्रतीत होने लगे हैं?

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दरअसल, अमेरिका में एक ऐसी विकृत संस्कृति जन्म ले चुकी है, जहां बच्चे अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। इतना ही नहीं माता-पिता को बच्चों से बात तक करने का समय नहीं है। ऐसे में लाड़-प्यार से वंचित बच्चे जब-तब कुंठा में आकर हिंसा की ओर बढ़ रहे हैं। पिछले एक दशक में छात्र हिंसा से जुड़ी कई वारदातें हुई जिन्होंने अमेरिकी समाज को हिलाकर रख दिया। हाल में हो रही घटनाएं इशारा करती हैं कि इन घटनाओं ने शिक्षा में मूल्यों के चरम बहिष्कार को दर्शाया है।

वास्तव में अगर देखा जाये तो आधुनिक अमेरिका हिंसा की संस्कृति पर फला-फूला है, इसलिए अमेरिकी समाज का हिंसा से उबर पाना बेहद कठिन है। सामाजिक विचारकों और मनोचिकित्सकों का मानना है कि अमेरिकी स्कूल हिंसा विशेष रूप से अपराध दर में वृद्धि के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों के क्षरण और स्कूलों के साथ-साथ समाज के लिए एक खराब प्रतिष्ठा का कारण बन रही है। उनका मानना है कि हिंसक टेलीविजन कार्यक्रमों, फिल्मों और वीडियो गेम का प्रभाव आज के बच्चों के भीतर हिंसा पैदा कर रहा है।

किशोर बच्चे अक्सर एक्शन फिल्मों में अपने पसंदीदा टेलीविजन चरित्रों का अनुकरण करते हैं। निर्दोष और बौने जैसे कार्टून चरित्र भी स्क्रीन पर बंदूक पकड़े दिखाई देते हैं, जो बच्चों में आक्रोश पैदा करते हैं। जब भी बच्चों को लगता है कि चीजें उनकी इच्छा के अनुसार नहीं हैं तो वह हिंसक प्रतिक्रिया करते हैं। कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो स्वाभाविक रूप से दूसरों की तुलना में अधिक आक्रामक होते हैं। ऐसा लगता है कि इस तरह के बच्चे बाकी की तुलना में हिंसक कृत्यों के लिए अधिक आसानी से आकर्षित होते हैं, जो तीसरी दुनिया की तरह सुपर पावर के आंगन में बच्चों की स्थिति बनाता है।

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