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दिल्ली के सत्ता गलियारों में इन दिनों चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों को बदले जाने का बना हुआ है। मोदी-शाह के नेतृत्व वाली भाजपा में प्रदेशों के सीएम न बदलने की रवायत अब टूटने लगी है जिसका बड़ा असर वर्तमान में सीएम पद पर काबिज नेताओं पर पड़ा है। 2016-21 तक भाजपा आलाकमान ने केवल गुजरात में सीएम बदला था। अगस्त 2016 में वहां की तत्कालीन सीएम आनंदीबेन पटेल को हटा पार्टी ने विजय रूपाणी को मुख्यमंत्री बनाया था। अब लेकिन पार्टी नेतृत्व तेजी से अपने मुख्यमंत्रियों को बदलने में जुट गया है। इसकी शुरुआत गत् मार्च में उत्तराखण्ड से हुई, जहां यकायक ही त्रिवेंद्र सिंह रावत के स्थान पर सांसद तीरथ सिंह रावत की ताजपोशी करा दी गई। जब तीरथ सिंह रावत के विधायक बनने में संवैधानिक अड़चन आती दिखी तो भाजपा ने एक बार फिर बदलाव कर राज्य को पुष्कर सिंह धामी के रूप में नया सीएम दे डाला। इसके बाद कर्नाटक का नंबर आ गया जहां येदियुरप्पा को हटा बलवराज बोम्मई नए सीएम बना दिए गए। खबर गर्म है कि अगला नंबर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का लगने जा रहा है। खट्टर से न केवल राज्य के किसान नाराज बताए जाते हैं, बल्कि पार्टी भीतर भी उनकी कार्यशैली के चलते बड़ी तादात में पार्टी विधायक और नेता उनसे नाखुश हैं। सूत्रों का यह भी दावा है कि त्रिपुरा में भी पार्टी नेतृत्व बदलाव करने का मन बना रहा है जहां सीएम बिप्लव कुमार देब के खिलाफ विधायक-सांसद होने लगे हैं। कुल मिलाकर इन दिनों भाजपा शासित राज्यों के सीएम सहमे-सहमे बताए जा रहे हैं।

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