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गुर्जरों के गढ़ में भाजपा का जाट को चेयरमैन बनाने का दांव कही उल्टा न पड़ जाए

देश का पहला ऐसा जिला जहां सबसे ज्यादा गुर्जर रहते हैं । इस जिले को गौतम बुध नगर कहते हैं। यह जिला उत्तर प्रदेश का सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला जिला माना जाता है। जिसमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरण जैसे औधोगिक क्षेत्र स्थापित है। इसी के साथ ही यह जिला दिग्गज गुर्जर नेताओं के प्रभाव वाला जिला कहा गया। यहां जिला पंचायत अध्यक्ष से लेकर सांसद, विधायक और मंत्री तक इस जिले के अधिकतर गुर्जर नेता ही बने। जब से गौतम बुद्ध नगर जिले की स्थापना हुई है तब से अब तक जिला पंचायत के चेयरमैन गुर्जर ही बनते आए हैं।

 

लेकिन यह पहली बार है कि जब भाजपा ने गुर्जर बाहुल्य जनपद गौतम बुद्ध नगर की कमान नॉन गुर्जर अमित चौधरी के हाथों में सौंप दी है। आज जाट समाज से ताल्लुक रखने वाले अमित चौधरी को निर्विरोध जिला पंचायत का चेयरमैन बना दिया गया। फिलहाल अमित चौधरी के जिला पंचायत चेयरमैन बनने पर गुर्जरों ने विरोध शुरू कर दिया है। हो सकता है कि भविष्य में भाजपा को गुर्जर बाहुल्य सीट पर नॉन गुर्जर पर लगाया गया यह दांव महंगा ना पड़ जाए।

 

यहां राजेश पायलट से लेकर महेन्द्र भाटी, नरेंद्र भाटी, तेज सिंह भाटी, रामचंद्र विकल, नवाब सिंह नागर, सुरेंद्र नागर का राजनीतिक वर्चस्व रहा। यहीं से गुर्जर नेताओं ने राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश पर अपनी राजनीति का डंका बजाया। शायद यही वजह है कि इस क्षेत्र को गुर्जरों की राजधानी कहा जाता है।

 

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लेकिन यह अब बीते दिनों की बात हो चली है। अब इस जिले में राजनीति में धीरे-धीरे गुर्जरों का वर्चस्व कम होता जा रहा है। अब यहां बाहरी नेताओं का जमावड़ा ज्यादा हो गया है। लोकसभा से लेकर विधानसभा तक बाहर से आयतित नेता ही अब यहा राजनीति के सिरमौर बन गए हैं । शायद यही वजह है कि जिला गौतम बुद्ध नगर में अब पहली बार नॉन गुर्जर जिला पंचायत चेयरमैन बना है।

 

हालांकि आरक्षण के तहत एक बार जिला पंचायत गौतम बुद्ध नगर का अध्यक्ष अनुसूचित जाति से बनाए गए थे। लेकिन आज तक का जो रिकॉर्ड रहा है उसके अनुसार इस जिले में गुर्जर ही जिला पंचायत चेयरमैन बनते रहे है। जिला गौतम बुध नगर की स्थापना होने के बाद सबसे पहले वेदपाल भाटी जिला पंचायत के अध्यक्ष बने। उसके बाद बोडाकी निवासी बिजेंद्र भाटी को इस पद पर नियुक्त किया गया। बिजेंद्र भाटी के बाद नरेश भाटी के सर पर यह ताज बंधा। नरेश भाटी की मौत के बाद देहांत मोर्चा नेता वीरेंद्र डाढा को चेयरमैन बनाया गया था। उसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जयबती नागर पत्नी गजराज नागर को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया गया। जब समाजवादी पार्टी की सरकार आई तो जयवती नागर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उन्हें हटाया गया। इसके बाद रविंद्र भाटी जिला पंचायत के चेयरमैन बने।

 

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इस बार भाजपा ने यहां से इस राजनीतिक रिकॉर्ड को परिवर्तित करने का पूरा मन बना लिया। इसके लिए भाजपा ने पूरी तैयारी शुरू की। हालांकि भाजपा को अभी यह डर सता रहा है कि कहीं उनकी पार्टी के नेता अंदर खाने नॉन गुर्जर पर गुर्जर मतदाता विरोध शुरु न कर दे। अमित चौधरी वैसे तो गाजियाबाद के से सटे हुए चिपयाना के निवासी हैं लेकिन उन्हें यहां से 100 किलोमीटर दूर ले जाकर जेवर क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ाया गया। हालांकि अमित चौधरी का जेवर क्षेत्र से जिला पंचायत का चुनाव लड़ने का विरोध भाजपा के एक विधायक ने किया था। लेकिन ऊपरी दबाव के चलते आखिर में वह सरेंडर कर गए।

 

अमित चौधरी को भाजपा के सीनियर लीडर उत्तर प्रदेश के संगठन महामंत्री सुनील बंसल का आशीर्वाद प्राप्त है। सुनील बंसल अमित चौधरी को जिला पंचायत का टिकट दिलाने में पैरवी करते रहे। यही नहीं बल्कि सुनील बंसल भाजपा नेता भूपेंद्र चौधरी और क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल के जरिए अमित चौधरी को जिला गौतम बुद्ध नगर का जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की रणनीति पहले ही बना चुके थे ।

 

भाजपा ने एक सोची समझी रणनीति के तहत ही वार्ड नंबर 5 के प्रत्याशी अमित चौधरी को जिताने का जिम्मा भी भाजपा के दिग्गज नेता तेजा गुर्जर को दिया। तेजा गुर्जर वार्ड पांच के प्रभारी बने। गुर्जर ने जिम्मेदारी पूर्वक चौधरी को चुनाव लड़ाया और उन्हें चुनाव जिताने में दिन रात एक कर दिए । हालांकि जेवर क्षेत्र में भी अमित चौधरी का बाहरी होने के कारण विरोध हुआ था । बताया जा रहा है कि तेजा गुर्जर के हस्तक्षेप के चलते यह विरोध शांत हो गया था।

 

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भाजपा नेताओं को पार्टी की एकता की दुहाई देकर चुप करा दिया जा सकता है। लेकिन स्थानीय जनता को कौन चुप कराएगा? स्थानीय लोग खासकर गुर्जर इसके विरोध में आ गए है । अभी तो भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अमित चौधरी ने शपथ भी नही ली हैं । लेकिन गौतम बुद्ध नगर जिले में अभी से ही विरोध के स्वर तेज होने शुरू हो गए हैं।

 

सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के नेता श्याम सिंह भाटी और सामाजिक कार्यकर्ता विनीत भाटी ने इसका पुरजोर विरोध किया है। अपने ट्विटर हैंडल से भाटी लिखते है कि भाजपा एक बार फिर गुर्जरों को राजनीति से बेदखल करने का षड्यंत्र कर रही है। भाटी का इशारा गौतम बुध नगर के सांसद डॉक्टर महेश शर्मा की ओर है।

 

डॉक्टर महेश शर्मा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह गुर्जर विरोधी है । गुर्जर विरोधी होने के चलते ही उन्होंने नवाब सिंह नागर का नोएडा में टिकट नहीं होने दिया। जिसके चलते नोएडा में भाजपा के राष्ट्रीय नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह को विधायक बना दिया गया। यह सीट कभी नवाब सिंह नागर के नाम से जानी जाती थी। नवाब सिंह नागर यहां से विधायक रहे और वह आगे भी टिकट चाहते थे । लेकिन डॉ महेश शर्मा ने उनकी राजनीतिक काट करते हुए अपनी गोटियां फिट कर ली।

 

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फिलहाल, यह चर्चा जोरों पर है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में दादरी से गुर्जर प्रत्याशी का नाम हटाकर नॉन गुर्जर को लाने की योजना बनाई जा रही है। अगर यह योजना कामयाब होती है तो हो सकता है कि गुर्जरों की राजधानी दादरी पर नॉन गुर्जर नेताओं का राज कायम हो जाएगा ।

 

जिला गौतम बुध नगर की पांच जिला पंचायत सदस्यों में सबसे ज्यादा 3 सदस्य गुर्जर जाति के जीते हैं। इनमें एक बसपा समर्थित जयवती नागर हैं। जयवती नागर पूर्व में यहां से जिला पंचायत की अध्यक्ष रह चुकी है। जयवती नागर खरखौदा से विधानसभा चुनाव लड़ चुके बसपा नेता गजराज नागर की पत्नी है। दूसरे निर्दलीय सुनील भाटी है। जबकि तीसरी भाजपा की आरक्षित सीट से जीती है। भाजपा समर्थित देवा भाटी भी चुनाव जीते हैं।

 

चर्चा है कि देवा भाटी को जिला पंचायत अध्यक्ष की दावेदारी से इसलिए बाहर कर दिया गया है कि वह आर्थिक रूप से इतने संपन्न नहीं थे , जितने की अमित चौधरी है। अमित चौधरी एक बिल्डर है। जिनके कई प्रोजेक्ट नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में चल रहे हैं। शायद यही वजह है कि भाजपा आर्थिक रूप से मजबूत अमित चौधरी को पहले ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर बिठाने की पूरी तैयारी कर चुकी थी।

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