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नेता नहीं तो ‘गुरू’ बन गए बिहार के पूर्व DGP गुप्तेश्वर

बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में सुर्खियों में आए थे। तब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह तक कह दिया था कि उन्हें पुलिस सेवा छोड़कर राजनीति ज्वाइन कर लेनी चाहिए। गुप्तेश्वर पांडेय ने कुछ दिनों बाद किया भी ऐसा ही। उन्होंने बिहार के डीजीपी पद से वीआरएस लिया और नेता बनने की राह पर निकल गए।

तब बड़े जोर शोर से चर्चा चली थी कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुप्तेश्वर पांडेय को बिहार विधानसभा में टिकट देकर राजनीति में लाएंगे । लेकिन गुप्तेश्वर पांडेय की यह मनोकामना पूरी नहीं हो पाई। वह ना ही पुलिस ऑफिसर रहे और ना ही वह नेता बन पाए।

फिलहाल, एक बार फिर गुप्तेश्वर पांडेय चर्चाओं के केंद्र में है। चर्चाओं के केंद्र में वह तब से आए हैं जब से उनकी एक वीडियो वायरल हो रही है। वीडियो में वह गेरूआ कलर का कपड़ा पहने हुए हैं। बकायदा माला पहने हुए हैं और आसन पर बैठकर लोगों को ज्ञान देते दिखाइए दे रहे हैं। यह वीडियो अयोध्या का बताया जा रहा है। जिसमें वह प्रवचन कर्ता की भूमिका में है।

 

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16 जून को बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने बकायदा अयोध्या में प्रवचन दिया। प्रवचन में वह भगवान के अस्तित्व की चर्चा करते हुए नजर आ रहे हैं। वह कह रहे हैं कि भगवान को कैसे देखा जा सकता है और उन्हें देखने का साधन क्या हो सकता है। इसी के साथ ही उन्होंने कई उदाहरण दिए। यहां तक की पूर्व डीजीपी ने भगवान को देखने के लिए यंत्र तंत्र के साधन की भी उपयोगिता पर बल दिया।

एक सुपर कॉप के रूप में चर्चित रहे गुप्तेश्वर पांडेय का यह रूप देखकर हर कोई अचंभे में है। आखिर एक खाकी धारी को एक गेरुआ धारी बनने पर क्यों मजबूर होना पड़ा ? इसके पीछे की कहानी क्या है ? हालांकि अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गुप्तेश्वर पांडेय नेता न बन सके तो आखिर गुरु कैसे बन गए ?

चर्चा है कि उनकी यह एक राजनीतिक रणनीति हो सकती है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में एक गेरुआ धारी अब प्रदेश का सीएम बन चुके है। ऐसे में गुप्तेश्वर पांडेय भी कहीं गेरुआ वस्त्र धारण करके भाजपा की तरफ मुखातिब तो नहीं हो रहे हैं?

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