कांग्रेस के तारणहार बने रहेंगे सिद्धारमैया

 

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धरमैया के 75वें जन्मदिन के मौके पर जिस तरह के कार्यक्रम हुए हैं और लोगों का जैसा जुड़ाव दिखा है उसके आधार पर राज्य में सियासी अटकलें शुरू हो गई हैं। अगले चुनाव में सिद्धरमैया मुख्यमंत्री पद के दावेदार हो गए। उनके जन्मदिन पर हुए ‘सिद्धारमोत्सव’ में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए और उनके सामने मंच पर सिद्धरमैया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने हाथ मिलाया और गले भी मिले। इस घटनाक्रम से चर्चा जोरों पर है कि राहुल ने दोनों के गिले-शिकवे दूर करा दिए और दोनों एकजुट होकर अगले चुनाव की तैयारी करेंगे। राज्य की राजनीति के विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रदेश कांग्रेस के दोनों नेताओं के झगड़े का अंत नहीं है। कांग्रेस ने एक रणनीति के तहत दोनों नेताओं को एकजुटता दिखाने के लिए तैयार किया है। दोनों नेता अलग-अलग समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं। सिद्धरमैया पिछड़ी कुरुबा जाति से आते हैं और शिवकुमार वोक्कालिगा हैं। उन्होंने वोक्कालिगा मुख्यमंत्री का राग छेड़ा है ताकि देवगौड़ा परिवार के वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके। अगर पिछड़े, वोक्कालिगा और मुस्लिम साथ आते हैं तो कांग्रेस जीत सकती है। तभी कांग्रेस ने रणनीतिक एकता बनवाई है। यह भी कहा जा रहा है कि अगर कांग्रेस जीतती है तो सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जिन्होंने अगले चुनाव को अपना आखिरी चुनाव बताया है। बाद में जिस तरह से भाजपा ने दो साल के बाद बीएस येदियुरप्पा को हटा दिया उसी तरह सिद्धरमैया को हटा कर शिवकुमार को बना दिया जाए।