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रूस-अमेरिका के दरकते रिश्ते, कई राजनयिक अमेरिका से निष्कासित

अमेरिका और रूस के रिश्ते अब दरकते नजर आ रहे हैं। अमेरिका अब रूस के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर चुका है। इसी बीच 15 अप्रैल को राष्ट्रपति जो बिडेन ने रूस के 10 राजनयिकों को देश से बाहर कर दिया है।  अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की इस कार्रवाई से भड़के रूस ने कहा कि रूस इस कार्रवाई का जवाब अमेरिका को जरूर देगा। इस पर रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह आर्थिक प्रतिबंधों और अमेरिका से राजनयिकों के निष्कासन पर वाशिंगटन द्वारा किया गया था। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि मंत्रालय ने सुलिनन को राष्ट्रपति जो बिडेन के 10 राजनयिकों को देश में वापस भेजने और आर्थिक प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद समन भेजा।

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विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने बताया कि मंत्रालय ने राष्ट्रपति जो बाइडेन द्वारा 10 राजनयिकों को देश वापस भेजने और आर्थिक प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद सुलिवन को यह समन भेजा है। साथ ही उनसे इस मामले में सफाई भी मांगी जाएगी। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए जखारोवा ने कहा कि अमेरिकी राजदूत को रूसी विदेश मंत्रालय में तलब किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ये बातचीत अमेरिकी पक्ष के लिए काफी कठोर होने वाली है। दोनों देशों के रिश्तों में ये तनाव ऐसे वक़्त पर आया है, जब बाइडेन की ओर से यूक्रेन के मुद्दे पर अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन से बातचीत करने की इच्छा जताई गई थी।

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इसके साथ ही जखारोवा ने बताया कि क्रेमलिन और उसके सैन्य गतिविधियां खतरनाक नहीं हैं और रिश्तों को बिगाड़ने की जिम्मेदारी भी अमेरिका की ही होगी। साथ ही उन्होंने कहा कि वाशिंगटन को भी यह समझना चाहिए कि द्विपक्षीय संबंधों को कम करने के लिए उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। यह जो भी हो रहा है उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से अमेरिका की ही है। इस तरह के आक्रामक व्यवहार का जवाब जरूर दिया जाएगा और प्रतिबंधों को लेकर प्रतिशोध की कार्रवाई भी की जाएगी। रूसी मीडिया की माने तो क्रेमलिन ने प्रतिबंधों की सुगबुगाहट की सूचना मिलते ही मंगलवार को ही सुलिवन को चेतावनी दे दी थी।

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ये कार्रवाई जो बाइडेन की तरफ से इसलिए की गई है क्योंकि उनके प्रशासन को यह शक है कि रूस की ओर से राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप किया गया था। इसके अतिरिक्त अमेरिका का यह मानना है कि रूस ने देश के सुरक्षा प्रतिष्ठानों में हैकिंग करने का भी प्रयास किया है। यह भी माना जा रहा है कि रूसी सेंधमारों की ओर से व्यापक रूप से प्रयोग होने वाले सॉफ्टवेयर में भी सेंधमारी की गई थी। उनका इरादा कम से कम नौ एजेंसियों के नेटवर्कों को हैक करना था। अमेरिकी अधिकारियों का यह  मानना है कि उन्होंने अमेरिकी सरकार की गुप्त जानकारी जुटाने का भी प्रयास किया। इसी कारण ये प्रतिबंध लगाए गए हैं।

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