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डेमोक्रेट्स अमेरिका ने दिया भारत को बड़ा झटका, सांतवा बेडा बिना इजाजत भारतीय जल क्षेत्र घुसा

भारत के साथ मिलकर चीन के विस्तारवादी रवैये के खिलाफ मोर्चा की बात करने वाला अमेरिका खुद ही भारत के खिलाफ अतिक्रमण करते पकड़ा गया है। जिस पर भारत ने विरोध जताया है। भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नीति का उल्लंघन बताते हुए कहा है कि अमेरिकी नेवी को इस क्षेत्र में प्रवेश से पहले भारत से अनुमति लेनी चाहिए थी। अमेरिकी नेवी शिप ने फ्रीडम ऑफ नेविगेशन के नाम पर लक्षद्वीप के पास भारतीय के एक्सक्लूसिव इकॉनॉमिक जोन में अभ्यास किया था। अमेरिकी नौसेना के सातवें बेड़े ने इस अभ्यास में हिस्सा लिया था जिसकी जानकारी खुद अमेरिकी नौसेना ने दी थी। जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना ने समुद्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता के तहत लक्षद्वीप के पास बिना भारत से अनुमति के अभ्यास में हिस्सा लिया था।

भारत ने इस पर प्रतिरोध जताते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया है। भारत ने एक बयान जारी किया जिसमें कहा गया है “सामुद्रिक कानून को लेकर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन पर भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति यह है कि यह कन्वेंशन दूसरे देशों को बिना तटीय देश की सहमति के बिना विशेष आर्थिक क्षेत्र और महाद्वीपीय शेल्फ में सैन्य अभ्यास अथवा युद्धाभ्यास के लिए अधिकृत नहीं करता है जिसमें विशेष रूप से हथियारों या विस्फोटकों को प्रयोग किया जाता है।” हैरानी की बात ये है कि अमेरिका ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि उसके जहाज भारत के जलीय क्षेत्र में बिना इजाजत के घुसे हैं।

बयान में आगे कहा गया है कि “फारस की खाड़ी से मलक्का जलडमरू मध्य की तरफ जा रहे यूएसएस जॉन पॉल जोन्स पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी। हमने राजनयिक चैनलों के माध्यम से हमारे आर्थिक क्षेत्र से गुजरने को लेकर अमेरिकी सरकार को अपनी चिंताओं से अवगत कराया है।” अमेरिकी नौसेना की सातवीं फ्लीट के कमांडर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मिसाइल नाशक यूएसएस जॉन पॉल जोन्स के जरिये सात अप्रैल को यह अभियान शुरू किया गया। जब भारत ने वर्ष 1995 में यूएन कन्वेंशन ऑफ द लॉ ऑफ सी (यूएनसीएलओएस) को मंजूरी प्रदान की थी, तो उसने घोषणा की थी कि कन्वेंशन के प्रावधान अन्य देशों को विशेष आर्थिक क्षेत्र या उपमहाद्वीपीय इलाके में तटीय देश की मंजूरी के बिना सैन्य अभ्यास या अभियान के लिए मंजूरी प्रदान नहीं करते।

भारत के पूर्व नौसेना अध्यक्ष अरुण प्रकाश ने भी इस पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ भारत ने समुद्र से जुड़े संयुक्त राष्ट्र कानून को मंजूरी प्रदान की है, वहीं अमेरिका अभी तक ऐसा नहीं कर पाया है।

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