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पुण्यतिथि विशेष: ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं

आज देश के जाने-माने कवि, गीतकार और कार्यकर्ता कैफी आजमी की 101वीं जयंती है। कैफ़ी आज़मी की जयंती के मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। गूगल का ये डूडल बेहद खास है। गूगल ने आज अपना डूडल कैफी आजमी के नाम किया है और डूडल के जरिए याद किया है।  दरअसल, गूगल अक्सर समाज में अपना योगदान देने वाले लोगों को अपने डडूल के जरिए याद करता है और उनकी जयंती और पुण्यतिथि पर डूडल बनाता है।

कैफी आजमी को 20वीं सदी के सबसे मशहूर कवि के रुप में जाना जाता है। गूगल ने आज के डूडल में कैफी आजमी को माइक पर कुछ बोलते हुए दिखाया है। साहित्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए कैफी आजमी को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था।इतना ही नहीं उन्हें ‘साहित्य अकादमी फैलोशिप’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रीय पुरस्कार के अलावा उन्हें कई बार ‘फिल्मफेयर अवॉर्ड’ भी मिला।

कैफी आजमी ने कविताओं के अलावा कुछ हिंदी फिल्मों के गानों और स्क्रीनप्ले को भी लिखा है। उन्होंने हिन्दी फिल्मों के लिए कई प्रसिद्ध गीत व ग़ज़लें भी लिखीं, जिनमें देशभक्ति का अमर गीत -“कर चले हम फिदा, जान-ओ-तन साथियों” भी शामिल है।  उन्होंने ‘ये दुनिया ये महफिल मेरे काम की नहीं’ और ‘झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं’ जैसे खूबसूरत गाने दिए।  कैफी आजमी ने अपनी पहली कविता 11 साल की उम्र में लिखी थी।

कैफी आजमी उस वक्त 1942 में महात्मा गांधी के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ से प्रेरित थे। बाद में कैफी आजमी एक उर्दू अखबार में लिखने के लिए मुंबई चले गए थे। कैफी आजमी की पहली कविता ‘झंकार’ साल 1943 में प्रकाशित हुई थी। कैफी आजमी का जन्म उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले के छोटे से गाँव मिजवां में 14 जनवरी 1919 में हुआ। कैफ़ी आजमी भारत की जानी-मानी अभिनेत्री शबाना आजमी के पिता थे |