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यूरोप में बढ़ा खसरे का प्रकोप

यूरोप में खसरा पिछले साल से दोगुनी तेजी से फैलता चला जा रहा है विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 23 जनवरी को खसरे को लेकर दुनिया भर के आकड़े जारी किए हैं। जिसके अनुसार साल 2023 के दौरान यूरोप में खसरे के मामले में 45 गुना वृद्धि हुई है। डब्लूएचओ ने इसे लेकर चिंता जाहिर की है। साथ ही खसरे के वृद्धि को रोकने के लिए आपातकालीन टीकाकरण की अपील भी की है। विश्वस्वास्थ्य संगठन का कहना है कि साल 2022 के दौरान यूरोप में खसरे के 941 मामले दर्ज किए गए थे। लेकिन खसरा अब दोगुनी तेजी से यह अपने पैर पसार रहा है। दरअसल कोविड 19 महामारी के दौरान टीकाकरण की दर नीचे चली गई थी,इसलिए अब आपातकालीन टीकाकरण की अभियान की जरूरत महसूस की जा रही है।

 

यूरोप में खसरे के मामले को लेकर रूस ,कजाखस्तान सबसे ऊपर हैं। पिछले वर्ष इन दोनों देशों में दस हजार से ज्यादा लोग बीमार हुए थे। पिछले साल ही पश्चिमी यूरोप में सबसे ज्यादा ब्रिटेन में खसरे के मामले पाए गए थे। ब्रिटेन में 183 लोगों को खसरा हुआ था। गत वर्ष ही जनवरी से अक्टूबर के बीच 21 हजार खसरा मरीजों को अस्पताल भर्ती होना पड़ा जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। संगठन ने यह भी दावा किया है कि साल 2020 से 2022 के बीच यूरोपीय क्षेत्र में करीब 18 लाख छोटे बच्चों को खसरे का टीका नहीं लग पाया था।

 

गौरतलब है कि साल 2021 में विश्वभर में खसरे की वजह से एक लाख 28 हजार मौतें हुई थीं। जिनमें से अधिकतर बच्चे पांच साल से कम उम्र के थे और इन बच्चों को टीके नहीं लगे हुए थे। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि साल 2000 से 2021 के बीच टीकाकरण के कारण ही साढ़े पांच करोड़ लोगों की जान बच पाई है।

 

दूसरे नंबर पर भारत

 

यूरोप
खसरे के शिकार होते बच्चे

 

दुनियाभर में खसरे के कारण सबसे ज्यादा मौत यमन में हुई उसके बाद दूसरे नंबर पर भारत है। 2023 में सबसे ज्यादा 23,066 मौतें यमन में और भारत में 13,997 मौतें हुईं। इसके अतिरिक्त कजाखस्तान में 12,801 जानें खसरे के कारण गईं। इथियोपिया (11,042), रूस (7,137), पाकिस्तान (6,199), किरगिस्तान (4,701), डीआर कांगो (3,917), इराक (3,541) और अजरबैजान (3,291) जानें गई। भारत में साल 2017 से मार्च 2023 के बीच 34 करोड़ से ज्यादा बच्चों को खसरे के टीके लगाए गए थे। 2017 से 2021 के बीच भारत में इस बीमारी के मामले 62 फीसदी घटे थे।

 

कैसे करे खसरे की पहचान

 

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि सभी देशों के लिए जरूरी हो गया है कि समय रहते ही वो खसरे के प्रकोप की पहचान करें और रोकथाम के लिए तैयार रहें। सांस, खांसी या छींक के जरिये खसरा एक व्यक्ति से अन्य व्यक्ति में आसानी से फैल सकता है। यह बीमारी रूबेला वायरस के कारण होती है। बच्चों में ये बीमारी सबसे ज्यादा होती है।

वायरस के संपर्क में आने के बाद, बीमारी के लक्षण दिखने में आठ से बारह दिन का समय लगता है। खसरा के शुरुआती लक्षण तेज बुखार, बहती नाक, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश से होती है। शुरुआती लक्षणों के दो से तीन दिन बाद मुंह चेहरे पर सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं और लाल दाने हो जाते हैं जो सिर से नीचे की तरफ़ फैलते हैं। गंभीर स्थिति में पेट दर्द, दस्त और उल्टी हो सकती है।

खसरे की बीमारी को रोकने के लिए टीकरण जरूरी है। इस टीकाकरण में दो खुराक दी जाती हैं। पहला टीका 9 महीने पर लगता है और दूसरा 15 से 18 महीने पर। इस बीमारी के आउटब्रेक को रोकने के लिए कम से कम 95 फीसदी बच्चों को दोनों खुराक लगनी जरूरी हैं। हालांकि दुनियाभर में टीकाकरण की दर कम हो रही है। साल 2022 में 83 फीसदी बच्चों को ही खसरे की दोनों खुराक मिल पाई थीं। हालांकि 2021 के 81 फीसदी से यह कुछ ऊपर था लेकिन कोविड महामारी से पहले यह दर 86 फीसदी थी जो 2008 के बाद सबसे कम थी। 2022 में यूरोप में सिर्फ 92 फीसदी बच्चों को खसरे का दूसरा टीका लगा था।

 

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