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सीएम ममता की गूगली से पस्त हुए कैलाश विजयवर्गीय

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद भी राजनीति जारी है। इस बार राजनीति भाजपा के अंदर हो रही है। जब से मुकुल राय भाजपा से निकलकर टीएमसी में वापस गए हैं तब से भाजपा की प्रदेश इकाई आपस में ही लड़ती नजर आ रही है। फिलहाल निशाना बने हैं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय।
 कैलाश विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल में भाजपा के लिए विधानसभा चुनाव में पूरी शिद्दत से काम करते हुए देखा गया। जिसके चलते भाजपा वहां 3 से बढ़कर 74 विधानसभा सीटों वाली हो गई । लेकिन अंतिम समय पर भाजपा सत्ता में आने से चूक गई। बंगाल की सत्ता की चाबी एक बार फिर दीदी यानी ममता बनर्जी के हाथ आ गई । यहीं से भाजपा की राजनीति में यू – टर्न आ गया। जिसमें फिलहाल ममता बनर्जी की गुगली में कैलाश विजयवर्गीय आ गए हैं।
 बताया जा रहा है कि कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ उनकी ही पार्टी के लोग हो गए हैं। जिसके चलते भाजपा के कार्यालय पर विजयवर्गीय के पोस्टर लगाकर “गो बैक” लिख दिया गया । इसके साथ ही पोस्टरो पर विजयवर्गीय को “सेटिंग मास्टर” बताया गया। हालांकि इसको भाजपा ने टीएमसी की चाल बताया है। जबकि तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें ‘आधारहीन’ करार दिया है।  उन्होंने कहा कि  पश्चिम बंगाल भाजपा आंतरिक संघर्ष के दौर से गुजर रही है और पुराने नेताओं तथा पार्टी में नए आए लोगों के बीच द्वंद्व चल रहा है। यह घटना उसी का नतीजा है।
पिछले दिनों ही भाजपा नेता तथागत रॉय ने चुनाव में हार के लिए कैलाश विजयवर्गीय पर निशाना साधा था। रॉय ने एक ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने कहा कि  एक निष्ठावान बीजेपी समर्थक के ट्वीट का एक अंग्रेजी अनुवाद। मैंने कुछ जोड़ा या घटाया नहीं है। “आंटी (बुआजी) ममता, कृपया इन्हें भी तृणमूल में ले जाइए। हो सकता है कि उसे अपने दोस्त की याद आ रही हो। दोनों पूरे दिन एक साथ रहते थे।”
 विजयवर्गीय अपनी इस बेइज्जती से नाराज है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2 दिन पहले जब पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की बैठक हुई तो उसमें विजयवर्गीय नदारद रहे। कहा तो यह जा रहा है कि जब से भाजपा बंगाल में चुनाव हारी है तबसे विजयवर्गीय वहां एक बार भी नहीं गए हैं। शायद यही वजह है कि भाजपा के हाथ से वह नेता निकलते जा रहे हैं जो पहले टीएमसी में हुआ करते थे और बाद में भाजपा में शामिल हुए थे।
 इनमें से एक मुकुल रहे थे। मुकुल राय को टीएमसी से भाजपा में लाने का श्रेय विजयवर्गीय को जाता है। मुकुल राय और विजयवर्गीय की गहरी दोस्ती जगजाहिर रही। 3 साल तक राय भाजपा में रहे। लेकिन पिछले दिनों वह अचानक अपने बेटे के साथ भाजपा छोड़ वापस टीएमसी में चले गए । इसमें भाजपा नेताओं ने विजयवर्गीय को निशाना बना लिया।
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में अभी और भी भाजपा के विधायक टीएमसी में वापस जाने को तैयार है। इसका एक नजारा उस समय देखने को मिला जब कुछ दिन पहले ही शुभेंदु अधिकारी प्रदेश के राज्यपाल के समक्ष भाजपा विधायकों को ले गए। वहां भाजपा के 74 विधायकों में से महज 50 ही विधायक उपस्थित हो पाए थे। 24 विधायकों की गैर मौजूदगी से चर्चाओं को बल मिल रहा है ।
कहा जा रहा है कि जो विधायक शुभेंदु अधिकारी के साथ राज्यपाल के समक्ष हाजिर नहीं हुए वह टीएमसी में वापस जाने की तैयारी में है। इस तरह भाजपा एक बार फिर पश्चिम बंगाल में विधायकों के टीएमसी में वापिस जाने से सहमी हुई है ।इस दौरान बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिनोंदिन मजबूती से सामने आ रही है

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