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जिंदगी की रेस हारे ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्‍खा सिंह,4 बार रहे एशियन गोल्‍ड मेडलिस्‍ट 

भारत के महान धावक ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह का देर रात कोरोना से निधन हो गया। वे 91 साल की उम्र में सदा के लिए अलविदा हो गए। बताया जाता है कि मिल्खा सिंह का कोविड-19 दो दिन पहले निगेटिव आया था।  जिसके बाद मिल्खा सिंह को कोविड आईसीयू से सामान्य आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया था। लेकिन फिर गुरुवार को उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। मिल्खा सिंह की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक जताया है। उन्होंने ट्वीट पर लिखा कि हमने एक महान खिलाड़ी को खो दिया है। भारतीयों के दिलों में मिल्खा सिंह के लिए खास जगह थी। उन्होंने लोगों को अपने व्यक्तिव से प्रेरित किया। मैं उनके निधन से मैं बहुत दुखी हूं।

मिल्खा सिंह और उनकी पत्नी  निर्मल कौर दोनों ही 20 मई को कोरोना संक्रमित पाए गए थे। 24 मई को उन दोनों को एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 30 मई को परिवार के लोगों के कहने पर मिल्खा सिंह की वहां से छुट्टी करवा ली गई थी और कुछ दिनों पहले ही वे घर लौटे थे। उनका घर पर ही इलाज चल रहा था। 13 जून को मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल कौर का निधन हो गया था। कौर 85 साल की थीं। वह भारतीय महिला वॉलीबॉल टीम की कप्तान भी रह चुकी थीं। साथ ही निर्मल कौर पंजाब सरकार में स्पोर्ट्स डायरेक्टर के पद पर भी रह चुकी थीं।

मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवंबर 1929 को गोविंदपुरा (जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है) के एक सिख परिवार में हुआ था। मिल्खा सिंह को खेल और देश से बहुत लगाव था। इस वजह से देश बटने के बाद भारत भाग आए और भारतीय सेना में शामिल हो गए। यहां वह कुछ समय सेना में रहे लेकिन खेल की तरफ झुकाव होने की वजह से उन्होंने क्रॉस कंट्री दौड़ में हिस्सा लिया। इस दौड़ में 400 से ज्यादा सैनिकों ने दौड़ लगाई। जिसमे मिल्खा सिंह 6वें नंबर पर आए।

 

 4 बार के एशियन गोल्‍ड मेडलिस्‍ट रहे मिल्‍खा सिंह ने अपने करियर में कई खिताब जीते थे। लेकिन उनकी एक हार की चर्चा पूरी दुनिया भर में होती है। वो हार जिसका दर्द आज भी देश नहीं भुला पाया। मिल्‍खा सिंह ने 1956, 1960 और 1964 ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया था। 1960 रोम ओलिंपिक का नाम आते ही मिल्‍खा सिंह की 400 मीटर की फाइनल रेस की यादें ताजा हो जाती है। 1960 को रोम में आयोजित समर ओलिंपिक में मिल्खा सिंह से काफी उम्मीदें थीं। 400 मीटर की रेस में वह 200 मीटर तक सबसे आगे थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने अपनी गति धीमी कर दी। इससे वह रेस में पिछड़ गए और चौथे नंबर पर रहे।

 

याद रहे कि मिल्खा सिंह के जीवन पर आठ साल पहले बॉलीवुड हिंदी फिल्म भाग मिल्खा भाग बनी थी। इसका निर्देशन राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने किया, जबकि लेखन प्रसून जोशी का था। मिल्खा सिंह की भूमिका में फरहान अख्तर नजर आए थे। अप्रैल 2014 में 61वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में इस फ़िल्म को सर्वश्रेष्ठ मनोरंजक फिल्म का पुरस्कार मिला। इसके अतिरिक्त इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ कोरियोग्राफी के लिए भी पुरस्कृत किया गया था।

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