[gtranslate]
Country

योगी राज में स्वास्थ्य सेवाओं को राम भरोसे करार दिया हाईकोर्ट ने

यूपी में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए एक बार फिर इलाहबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाई है। प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर के कारण संसाधनों की कमी और गांवों में बदहाली को देखते हुए हाईकोर्ट ने सरकार पर तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने यूपी सरकार पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि राज्य के गांवो में और कस्बों में स्वास्थ्य सेवाएं राम भरोसे है।

अगर हम समय रहते इन पर समस्याओं पर ध्यान नहीं देंगे तो इसका मतलब होगा कि हम कोरोना की तीसरी लहर को न्यौता दे रहे है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा ने यह टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के स्वास्थ्य सचिव से कोरोना की रोकथाम और बेहतर इलाज की डिटेल प्लानिंग मांगी। कोर्ट ने कहा है कि नौकरशाही छोड़कर एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर अच्छे से प्लान तैयार करें।

कोर्ट ने गांवों और कस्बों में टेस्टिंग बढ़ाने का भी आदेश दिया। इस मामले में अगली सुनवाई 22 मई को होगी। एक तरफ हाईकोर्ट प्रदेश के कस्बों और गांवों में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चिंतित है तो दूसरी तरफ यूपी की योगी सरकार इन सब को नंकार रही है।

16 मई जब योगी आदित्यनाथ नोएडा दौरे पर आए थे, तब उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कोरोना की तीसरी लहर और ब्लैक फंगस पर नियंत्रण की सरकार की योजना के बारे में बताया। सीएम योगी ने कहा कि ब्लैक फंगस को लेकर हमने ट्रेनिंग शुरू कर दी है। हम पूरी सावधानी के साथ इसपर काम कर रहे हैं।

साथ ही कोरोना संक्रमण के थर्ड वेव से निपटने के लिए भी सरकार पूरी तरह से तैयार है। यूपी के कई जिलों में गंगा में लाशें मिलने की खबरों पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि उन्नाव में गंगा में मिली डेड बॉडी नार्मल डेथ के लोगों की है, जो श्मशान घाट पर डर के कारण नहीं गए और नदी में ही शवों की प्रवाहित कर दिया। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए सरकार ने हर पंचायतों में 5000 हजार की राशि दी है, ताकि सभी का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हो सके।

लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है। प्रदेश में हर दिन कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, अस्पतालों में लोगों को ऑक्सीजन की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह हो चुका है कि कोरोना बड़े शहरों से गांव की तरफ पैर पसार चुका है। कई गांव ऐसे है जहां कोरोना महामारी इतनी बुरी तरह फैल चुकी है कि उन गांव को सरकार ने कंटेंनमेंट जोन घोषित करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग आखिर में अब चौकन्ना हो गया है। गांव को हॉट स्पॉट घोषित कर बाहरियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई है।

तीन हजार आबादी वाले सुलतानपुर खेड़ा गांव में एक मई को जिलाधिकारी द्वारा गठित स्वास्थ्य टीम ने 193 ग्रामीणों का आरटीपीसीआर और 29 का एंटीजन टेस्ट किया। इसमें प्रारम्भ में एंटीजन टेस्ट में एक व्यक्ति पॉजिटिव आया, जिसे होम आइसोलेट किया गया। बाद में 193 लोगों की आरटीपीसीआर रिपोर्ट में 13 अन्य लोग पॉजिटिव आए और उन्हें भी होम आइसोलेट कर दिया गया। पिछले एक महीने में इस गांव में कोरोना से 20 लोगों की मौत हो चुकी है।

बागपत के लूंब गांव में अब तक 37 लोगों की मौत की खबर है। जिसमें कुछ लोगों की मौत के कोरोना के चलते हुई तो कुछ की हार्ट अटैक और बुखार के कारण हुई। गांववालों का कहना कि पिछले एक महीने से स्वास्थ्य विभाग जाग नहीं रहा। उन्होंने बताया कि गांव के प्रधान ने मौत के आकड़ों और कोरोना आकड़ों में हेरफेर को देखते हुए 18 अप्रैल से 15 मई तक का डाटा निकालकर एक लिस्ट तैयार की है।

गांव के प्रधान ने 37 मृतकों की लिस्ट बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। जब मीडिया ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की तो पाया जहां उपकेंद्र में दवाएं, डाक्टर होने चाहिए वहां पशुओं को बांधे जा रहा है।

गोंडा के हलधरमऊ ब्लॉक की ग्राम पंचायत हलधरमऊ में करीब 70 प्रतिशत लोग सर्दी, जुकाम व बुखार से पीड़ित हैं। लोग यहां झोलाछाप डाक्टरों से दवा करा रहे हैं। ग्राम प्रधान मसूद खां ने बताया है कि संक्रमण से करीब 16 लोगों की मौत अप्रैल से अब तक हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग इस गांव में चार मौतें बता रहा है।

स्वास्थ्य कर्मियों ने कुछ लोगों की सैंपलिंग की है। दवाओं का वितरण नहीं कराया गया है। सीतापुर जिले के खैराबाद इलाके में कोरोना संक्रमण से कई लोगों की मौत हो चुकी है। बुखार और सांस लेने की दिक्कत से एक माह के भीतर 40 लोगों के दम तोड़ने की बातें बताी जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कस्बे में घर-घर टेस्टिंग की प्रक्रिया आरम्भ नहीं हुई है।

अयोध्या जिले के मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र में तेंधा, धनैचा, उधुई गांव में कोरोना से सर्वाधिक मौतें हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम तथा तहसील प्रशासन की टीम सेनेटाइजेशन करा रही है। बीमार लोगों को दवाएं बांटी जा रही हैं।

यहां एक तरफ योगी सरकार दावा कर रही है कि राज्य में कोरोना के मामलों की संख्या में कम हुई, लेकिन दूसरी तरफ सच्चाई यह है कि गांव में लोग कह रहे है कि न ही उनके गांव में कोरोना टेस्ट किए जा रहे और न ही समय पर लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दवाएं उपलब्ध हो रही है।

यह भी पढ़े: गांव-गांव पहुंची महामारी : चौतरफा हाहाकार और चीत्कार

गोरखपुर योगी आदित्यनाथ का विधानसभा क्षेत्र है। गोरखपुर में कोरोना संक्रमण का कहर बढ़ता ही जा रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में शनिवार को आठ लोगों की मौत हुई। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि जिले में संक्रमितों की संख्या 53932 हो गई है। 564 की मौत हो चुकी है। 46220 लोग स्वस्थ हो चुके हैं। एक्टिव केस 7453 से घटकर 7148 पहुंच गया है।

17 मई को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां पीपीगंज के तिघरा गांव के रहने वाले रमेश साहनी का 4 वर्षीय पुत्र पिछले 5 दिनों से बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोरोना वार्ड में भर्ती था। रविवार रात मासूम की मौत हो जाने के बाद स्टाफ कर्मचारियों ने जब बच्चे का शव ले जाने के लिए कहा तो रमेश ने कोरोना का हवाला देते हुए शव को लेने से इनकार कर दिया। रमेश की मां का देहांत भी कोरोना के कारण एक दिन पहले हुआ था।

यह भी पढ़े: यह ब्रेसलेट देगा कोरोना वैक्सीन पासपोर्ट का सबूत

जिसका अंतिम संस्कार उसके द्वारा ही किया गया था। रमेश का कहना है कि घर में सभी लोग कोरोना से संक्रमित है। ऐसे में बच्चे के शव को ले जाकर उन्हें और गांव वालों को परेशान करना नहीं चाहता। उसने कहा कि अब मेरी हिम्मत जवाब दे चुकी है।

कोर्ट ने बी और सी ग्रेड के कस्बों में 20 एंबुलेंस और हर गांव में आईसीयू सुविधा वाली दो एंबुलेंस तैनात करने का आदेश दिया है। इसके लिए कोर्ट ने बिजनौर, बहराइच, बाराबंकी, श्रावस्ती, जौनपुर, मैनपुरी, मऊ, अलीगढ़, एटा, इटावा, फिरोजाबाद और देवरिया के जिला जजों को नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। ये नोडल अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन करवाकर रिपोर्ट तैयार करेंगे।

हालांकि राज्य में कोरोना के संक्रमितों की संख्या कम होनी शुरु हो चुकी है। सोमवार 17 मई को प्रदेश में कोरोना के 9 हजार 391 नए कोरोना मरीज सामने आए हैं। वहीं राजधानी लखनऊ में भी कोरोना संक्रमितों की संख्या में गिरावट दर्ज होने लगी है। यहां सोमवार को कोरोना के 517 नए मामले सामने आए। रविवार को लखनऊ में कोविड के 533 नए मरीज मिले थे।

यहां रिकवरी रेट 90 फीसदी हो गई है। सोमवार की बात करें तो प्रदेश में 24 घंटों के भीतर 9391 नए मामले सामने आए। वहीं 24 घंटों के भीतर कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या 23 हजार 445 है। महामारी से सोमवार को 285 लोगों की जान गई। फिलहाल पूरे प्रदेश में 1 लाख 49 हजार 32 कोरोना के मरीज ऐक्टिव हैं।

सुनवाई के दौरान केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से रिपोर्ट दाखिल की गई। सरकार ने बताया कि महामारी से जुड़ी शिकायतों के लिए 3 सदस्यीय कमेटी बना दी गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि कमेटी संबंधित जिले के नोडल अधिकारियों से चर्चा कर हर शिकायत का निस्तारण 24 से 48 घंटे के अंदर करे।

You may also like

MERA DDDD DDD DD