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चीन के ‘राष्ट्रीय दिवस’ को किसने बताया ‘मातम दिवस’?

चीन के 70वीं वर्षगांठ से पहले हांगकांग में तनाव एक बार फिर अपनी चरमसीमा पर बढ़ने लगा है। अशांत चल रहे हांगकांग में एक बार फिर आक्रोश देखने को मिला। जब हांगकांग में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच 29 सितंबर को भयंकर झड़पें हुई। हजारों गुस्साए लोगो ने सड़को पर उतरकर पैदल मार्च निकाला। इसके चलते कम्युनिस्ट चीन के 70वें स्थापना दिवस समारोह पर असर पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है। 

कम्युनिस्ट चीन के स्थापना दिवस पर 1 अक्टूबर से भव्य समारोह की तैयारियाँ की जाएँगी,जिसमें भव्य सैन्य परेड भी शामिल है जो चीन को उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में दर्शाएगा। हालांकि, हांगकांग में जारी अशांति से इस उत्सव के रंग में भंग पड़ने की आशंका है क्योंकि इस सेमी-ऑटोनोमस शहर में उनकी विशेष आजादी को कमजोर करने के मुद्दे पर लोगों का गुस्सा दिन -दिन बढ़ता ही जा रहा है। इस दौरान हांगकांग के नाराज़ प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय दिवस समारोह को ‘मातम दिवस’ करार दिया है और इसके साथ ही इस वित्तीय केंद्र में लोकतांत्रिक कार्यकर्ताओं ने अपने चार महीने पुराने अभियान में तेजी लाने का संकल्प भी लिया है।

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इस क्रम में 29 सितंबर को काफी तेज टकराव देखा गया और पुलिस ने कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस, रबड़ बुलेट और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने ऑनलाइन फोरम और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके दुनिया भर में ‘अधिनायकवाद विरोधी’ रैलियों का भी आह्वान किया। इस आह्वान पर ऑस्ट्रेलिया और ताइवान में रैलियां निकाली गईं। खबरों के मुताबिक यूरोप और उत्तरी अमेरिका में ऐसी करीब 40 रैलियां निकालने की योजना है। 

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