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दुनिया में हर जगह निशाना बनाए जा रहे हैं पत्रकार, जिम्बाब्वे में चिनोनो को जेल  

दुनिया भर में लोक हित के लिए आवाज़ बुलन्द करने वाले पत्रकारों को सभी स्थानों पर बहुत जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। पत्रकारों की असुरक्षा के मामले में सबसे ज़्यादा ख़तरनाक़ लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र रहे जहां साल 2019 में 22 पत्रकारों की हत्याएँ हुईं। इस तरह प्रेस के लिए सबसे ज़्यादा ख़तनाक़ स्थान रहे। इनके बाद एशिया-प्रशांत में 15 और अरब देशों में 10 पत्रकारों की हत्याएं हुईं।

इन दिनों से अफ़ग़ानिस्तान में कई पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हस्तियों को निशाना बनाया जा रहा है। पत्रकारों की हत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 1 जनवरी को पश्चिमी अफगानिस्तान में  कुछ अज्ञात बन्दूक धारियों द्वारा एक प्रतिष्ठित पत्रकार को गोली मार दी गई थी। पिछले दो महीनों में यह पांचवें पत्रकार की हत्या थी। जो वहां के पत्रकारों के लिए डर का माहौल पैदा कर रही है। अब दुनिया के कई देशों में भी पत्रकारों का यही हाल है।

जिम्बावे में भी पत्रकारों पर सरकार ने शिकंजा कसना  शुरू कर दिया है। जिम्बाब्वे पुलिस ने 8 जनवरी को छह महीने में तीसरी बार प्रमुख पत्रकार होपवेल चिनोनो को गिरफ्तार किया। चिनोनो ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया कि पुलिस ने उन्हें उनके घर से उठाया था और कहा कि वे “झूठ का प्रचार” कर रहे हैं। चिनोनो के एक ट्वीट के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। उन्होंने ट्वीट किया था कि पुलिस ने इस सप्ताह COVID-19 लॉकडाउन नियमों को लागू करते हुए एक शिशु को पीट-पीटकर मार डाला। बाद में पुलिस ने कहा कि सूचना झूठी थी और पत्रकार को इस आरोप में हिरासत में ले लिया गया।

दुनियाभर में पत्रकारों पर कहर जारी, कहीं हत्याएं हो रही तो कहीं मिल रही जेल

इस गिरफ्तारी से पहले, चिनोनो जुलाई में सरकार विरोधी प्रदर्शन को समर्थन देने और सरकार पर भ्रष्टाचार का दावा, अदालती आरोपों की अवमानना, दंगे भड़काने जैसे आरोपों के चलते जमानत पर जेल से बाहर थे। चिनोनो ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति इमर्सन म्नांगग्वा के प्रशासन के सबसे प्रमुख आलोचकों में से एक हैं। उन्होंने सरकार पर भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों के हनन का आरोप लगाया है। हालांकि सरकार इन सभी आरोपों से इनकार करती है।

जुलाई में गिरफ्तार होने से पहले, चिनोनो ने ट्विटर पर एक पर्दाफाश किया था जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए $ 60 मिलियन के सुरक्षात्मक उपकरण खरीदने में बड़ा घोटाला किया गया है। दरअसल, पत्रकार ने पिछले साल स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कोविड -19 आपूर्ति की खरीद से संबंधित भ्रष्टाचार को लेकर आरोप लगाए।

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