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पूरी दुनिया में बवाल की वजह बना इजरायल का Pegasus सॉफ्टवेयर, एक्सपोर्ट पर लग सकता है बैन !

Pegasus
Pegasus मामला सामने आने के बाद से इस सॉफ्टवेयर को बनाने वाले इजरायल में भी काफी उथल पुथल मची हुई है। इजरायल की कंपनी NSO द्वारा विकसित जासूसी Pegasus दुनिया भर में एक बार फिर चर्चा में है। इजरायल की खुफिया प्रौद्योगिकी एजेंसी के कई सरकारी ग्राहकों द्वारा सूचीबद्ध हजारों टेलीफोन नंबरों की लीक जानकारी में 300 से अधिक भारतीय मोबाइल नंबर शामिल हैं।
प्रोजेक्ट Pegasus रिसर्च प्रोजेक्ट के अनुसार Pegasus तकनीक का इस्तेमाल मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, वकीलों, व्यापारियों, सरकारी अधिकारियों, वैज्ञानिकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों की जासूसी के लिए किया गया है। ऐसे में इस मामले पर एक ताजा खुलासा सामने आया है कि एनएसओ ग्रुप के जासूसी साफ्टवेयर पेगसास को इजरायल की पूर्व प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू की सरकार बढ़ावा दे रही थी। भारत समेत जिन जिन देशों से जासूसी के खुलासे आ रहे हैं वहां वहां नेतन्‍याहू ने यात्रा की और इस जासूसी साफ्टवेयर के रैकेट का जाल फैलता गया।
इजरायली अखबार हारित्‍ज के अनुसार, विदेशी सरकारों पर नेतन्‍याहू सरकार पेगासस साफ्टवेयर को लेने पर जोर डाला करती थी। साथ ही बताया गया कि एनएसओ को जरा भी संकोच होता था। वहां खुद नेतन्‍याहू सरकार बात कर लिया करती थी। अखबार द्वारा कई सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इजरायली पीएम नेतन्‍याहू विदेश दौरों के दौरान अपने साइबर हथियारों खासकर एनएसओ समूह का जमकर समर्थन किया करते थे।
कहा जाता है कि सऊदी अरब ने एनएसओ के साफ्टवेयर को खरीदने के लिए हर साल 5 करोड़ डॉलर देने का समझौता किया था। यही नहीं नेतन्‍याहू साइबर सिक्‍यॉरिटी कंपनियों पर अपनी तकनीक के निर्यात का भी दबाव डालते थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्‍याहू की भारत यात्रा के बाद यहां पर भी पेगासस साफ्टवेयर का इस्‍तेमाल शुरू हुआ।
जिन देशों में नेतन्याहू गुपचुप तरीके से जाते थे, वहां एनएसओ ग्रुप के प्रतिनिधि भी उनके साथ गुपचुप तरीके से जाते थे। यह घातक ‘साइबर हथियार’ नेतन्याहू के कहने पर सऊदी अरब को दिया गया था। एक अधिकारी ने अखबार को बताया, “इजरायल ने 2017 में माना था कि जासूसी सॉफ्टवेयर के  मार्केटिंग के लिए सऊदी अरब उसका रणनीतिक लक्ष्य था।” इज़राइल कथित तौर पर सऊदी अरब को अरब दुनिया में एक उदारवादी ताकत मानता था और अपने क्षेत्रीय विरोधी ईरान के साथ तनाव पैदा करता था। इजराइल का ईरान के साथ भी तनाव है।

NSO ने कहा, शिकायतें मिलीं तो जांच होगी

फ़िलहाल  एनएसओ की ओर से कहा गया है कि इस बारे में उसे कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है कि उसके द्वारा सॉफ्टवेयर लेने के बाद किन लोगों की जासूसी की गई है। लेकिन ऐसी शिकायते मिली तो फिर उनके द्वारा उनके क्लाइंट्स जिन्होंने पेगासस का गलत इस्तेमाल किया है तो वह टारगेट लिस्ट को हासिल करेगी। यदि शिकायतें मिली तो क्लाइंट के पेगासस सॉफ्टवेयर को बंद कर दिया जाएगा।

मंत्री, विपक्ष के नेता, पत्रकारों को देख रहे हैं?

दुनिया भर के करीब 1,400 महत्वपूर्ण मोबाइल नंबरों को हैक करने के लिए जासूसों ने पेगासस तकनीक का इस्तेमाल किया। जासूसी तकनीक ‘पेगासस’ को इजरायली कंपनी एनएसओ द्वारा विकसित किया गया है, यह 2019 में बताया गया था।

पेगासस 2019 में तब सुर्खियों में आया जब कुछ व्हाट्सएप यूजर्स ने शिकायत की कि उन्हें पेगासस से एक संदेश मिला है कि मोबाइल फोन की सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। इसमें पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे। इनमें एल्गार परिषद मामले में आरोप, भीमा कोरेगांव मामले में एक वकील, एक दलित कार्यकर्ता, इसे कवर करने वाला एक पत्रकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर शामिल थे।

चूंकि पेगासस का इस्तेमाल दुनिया भर के कई देशों की सरकारों द्वारा किया जा रहा है, इसलिए हर बार इसका इस्तेमाल करके फोन कैसे हैक किया गया, इसकी चर्चा है। सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, भारत सहित देश भर में कुल 10 सरकारों ने निगरानी के लिए पेगासस सॉफ्टवेयर का विकल्प चुना है। भारत सरकार ने शुक्रवार को जारी एक बयान में आरोपों का खंडन किया है, जिसमें कहा गया है कि “पेगासस के संबंध में इसी तरह के निराधार आरोप एक से अधिक बार लगाए गए हैं।

Pegasus फोन कैसे हैक करता है?

Pegasus फोन को इस तरह से हैक करती है कि यूजर को भी इसका पता नहीं चलता। एक बार जब एक हैकर को एक फोन के बारे में पता चलता है जिसे वह हैक करना चाहता है, तो उसे एक वेबसाइट पर एक लिंक भेजा जाता है। अगर यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है तो मोबाइल में Pegasus इंस्टॉल हो जाता है। यह सॉफ्टवेयर ऑडियो कॉल के साथ-साथ व्हाट्सएप जैसे ऐप में सुरक्षा खामियों के कारण भी स्थापित है। पेगासस का तरीका इतना गुप्त है कि यूजर को मिस्ड कॉल देकर हैकिंग की जा सकती है। सॉफ़्टवेयर स्थापित होने के बाद वे आपके मोबाइल में फ़ोन नंबरों की सूची को भी हटा सकते हैं। यह उपयोगकर्ता को मिस्ड कॉल प्राप्त करने से भी रोकता है।

Pegasus क्या कर सकता है?

एक बार जब पेगासस आपके मोबाइल में घुसपैठ कर लेता है, तो यह लगातार नजर रख सकता है। वे व्हाट्सएप जैसे ऐप से चैट भी देख सकते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, Pegasus मैसेज पढ़ने के साथ-साथ कॉल ट्रैक भी कर सकता है। इसके अलावा, ऐप्स का उपयोग करना, उनमें होता है, स्थान डेटा, वीडियो कैमरा कैप्चर करना, माइक्रोफ़ोन की सहायता से वार्तालाप सुनना भी संभव है।

कंपनी आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल करने का दावा करती है। यह स्पाइवेयर केवल सरकारी एजेंसियों को बेचा जाता है। इजरायल की कंपनी का दावा है कि उसका मकसद सिर्फ आतंकवाद से लड़ना है।

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