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इजरायल और फिलीस्तीन के बीच जारी खूनी संघंर्ष, नेतन्याहू ने कहा बमबारी पूरी ताकत के साथ जारी रहेगी

गाजा पट्टी में Israeli Air Strike से 21 की मौत

इजरायल और फिलीस्तीन के बीच पिछले कई दिनों से खूनी संघंर्ष जारी है। सोमवार सुबह इजरायल की सेना ने गाजा के कई ईलाको में 80 हवाई हमले किए। इससे कुछ देर पहले चरमपंथी संगठन हमास ने इजरायल पर रॉकेट दागे। हमलों के बाद इजरायल ने बयान जारी कर कहा कि उसने चरमपंथी संगठन हमास के कई कमांडरों के घरों को निशाना बनाया है। इससे पहले फिलीस्तीनी अधिकारियों ने रविवार को हुई हिंसा को सबसे खूनी दिन बताया। अधिकारियों ने बताया कि इजरायल के हवाई हमलों से 42 लोगों की मौत हो गई जिनमें 16 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल है।

वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि गजा में फिलीस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास के खिलाफ इजरायली बमबारी पूरी ताकत के साथ जारी रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि जब तक जरूरी होगा, हम सैन्य कार्रवाई जारी रखेंगे। बेंजामिन ने कहा कि शांति कायम होने में अभी वक्त लगेगा। नेतन्याहू ने रविवार को इजरायल का समर्थन कर रहे 25 देशों को शुक्रिया कहा। फिलीस्तीन और इजरायल के बीच जारी खूनी संघर्ष के बीच अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी इस खूनी संघर्ष को बंद करने की अपील कर रहे है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेश ने कहा है कि अगर यह संघंर्ष नहीं थमा तो पूरा क्षेत्र बेकाबू संकट में घिर जाएगा। इसके साथ ही गुटेरेश ने गजा में ईधन की कमी को लेकर भी चिंता जाहिर की है। और कहा कि इससे स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य जरुरी चीजों पर असर पड़ेगा। गजा में हो रहे खूनी संघंर्ष को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र परिषद ने गजा में युद्ध विराम लागू करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थों के साथ एक बैठक की।

गौतरलब है कि शनिवार को इसराइल ने ग़ज़ा में स्थित एक अल-जाला नाम की बारह मंज़िला इमारत को मिसाइल हमले से गिरा दिया था। इसराइल का दावा है कि उस बिल्डिंग के किसी एक माले पर चरमपंथी गुट हमास का भी कार्यालय था। हालांकि, बिल्डिंग के मालिक ने इससे इनकार किया था और उस इमारत में अल-जज़ीरा, एपी और अन्य मीडिया संगठनों के दफ़्तर थे।

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भारत ने क्या कहा

भारत ने भी गजा में जारी संघंर्ष को लेकर चिंता जाहिर की है। भारत में इजरायल को लेकर दो गुट बने हुए है कुछ लोग इजरायल के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्टें शेयर कर रहे है तो दूसरी तरफ फिलीस्तीन के समर्थन में पोस्टें शेयर की जा रही है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूत टीएम तिरुमूर्ति ने सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद कहा कि भारत हर तरह की हिंसा की निंदा करता है और तत्काल तनाव को खत्म करने की अपील करता है। उन्होंने कहा, “इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है जो अश्कलोन में एक परिचारिका थीं, हमें उनके निधन से गहरा दुख पहुँचा है। इजरायल में करीब 10 हजार भारतीय रहते हैं। इनमें ढाई-तीन हजार गुजराती हैं, जो राजकोट के अलावा पोरबंदर-जूनागढ़ और वडोदरा सहित इलाकों से हैं।

1200 भारतीय स्टूडेंट्स हॉस्टल के सेफ्टी रूम में हैं। इजरायल की 9 यूनिवर्सिटी में करीब 1200 भारतीय स्टूडेंट हैं। स्टूडेंट्स हॉस्टल से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। वे हॉस्टल के सेफ्टी रूम में सुरक्षित हैं। सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे से संपर्क में हैं और मदद के हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

अरब मुल्कों का स्टैंड

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब के स्थायी प्रतिनिधि अबदल्लाह अल-मौलामी ने संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधिमंडल से मुलाक़ात की। मई महीने में चीन सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र में सऊदी अरब फ़लस्तीन मसले पर अरब देशों की कार्रवाई का नेतृत्व कर रहा है। सऊदी का इन छोटे ग्रुपों से मिलने का उदेश्य सुरक्षा परिषद में फिलीस्तियों के खिलाफ इजरायल हमलो के बारे में जानकारी देना है। खासकर हाल के दिनों में जो हिंसक हमले हुए है। अल-मौलामी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोज़किर से भी मुलाक़ात की क्योंकि सऊदी अरब फ़लस्तीन के लिए इस्लामिक आंदोलन का नेतृत्व करता है। सऊदी के अलावा तुर्की, ईरान, पाकिस्तान, कुवैत और खाड़ी के कई देशों ने इजराइल की खुलकर निंदा की। मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने भी अल अक़्सा मस्जिद में ‘हमले’ की निंदा की है. सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने इस टकराव और इसराइली सुरक्षा बलों की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। एसपीए के अनुसार मुस्लिम लीग ने कहा है कि इसराइली कार्रवाई फ़लस्तीनियों के अधिकार और उनकी मर्यादा पर हमला है।

सऊदी अरब ने संघर्ष को देखते हुए ओआईसी की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है, जो रविवार को होगी। बता दें कि इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन में 57 देश हैं, जो इस्लामिक देशों के मुद्दे पर एकजुट रहते हैं। इजरायल और हमास के बीच रॉकेटों-मिसाइलों की लड़ाई के बीच सऊदी अरब के अनुरोध पर ओआईसी ने यह बैठक बुलाई है। इस बैठक में ओआईसी देशों के विदेश मंत्री शामिल होंगे। ओआईसी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि फिलीस्तीनी इलाकों में इजरायल के हमले पर बैठक में बात होगी। हालांकि बीच में इजरायल के साथ सऊदी अऱब के संबंध सुधरने लगे थे्। सऊदी पहला ऐसा मुस्लिम देश था कि जिसकी अम्बेसी इजरायल में है।

तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगान ने इजरायल को धमकी देते हुए कहा,”‘सीरियाई सरहद के पास जिस तरह दहशतगर्दों का रास्ता रोका। उसी तरह मस्जिद-ए-अक़्सा की जानिब बढ़ते हुए हाथों को भी तोड़ देंगे।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट करते हुए कहा कि मैं पाकिस्तान की पीएम हूं और हम गाजा के साथ खड़े हैं। हम फलीस्तीन के साथ खड़े हैं। इसके साथ-साथ इमरान खान ने पोस्टर भी शेयर किया है जिसमें अमेरिकी साम्राज्यवादी का कोट लिखा हुआ है। इससे पहले इमरान खान ने इजराइल की ओर से गाजा पट्टी में स्थिति एक मस्जिद पर हवाई हमले होने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फलीस्तीन को सुरक्षा देने के लिए तत्काल एक्शन लेने की मांग की थी। अमेरिका ने इसराइल में अपना दूत भेजने की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि अमेरिका सऊदी अरब और मिस्र से संपर्क में है ताकि तनाव को कम करने का कोई रास्ता निकाला जा सके।

क्या है विवाद

1967 में मध्य पूर्व युद्ध के बाद इजरायल ने पूर्वी येरुशलम को अपने नियंत्रण में ले लिया था, इसके बाद इजरायल पूरे शहर को अपनी राजधानी मानता है। वहीं दूसरी तरफ फलीस्तीन पूर्वी येरूशलम को एक आजाद मुल्क की राजधानी के रुप में देखता है। बीबीसी के अनुसार, अक्तूबर 2016 में संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक शाखा यूनेस्को की कार्यकारी बोर्ड ने एक विवादित प्रस्ताव को पारित करते हुए कहा था कि येरुशलम में मौजूद ऐतिहासिक अल-अक्सा मस्जिद पर यहूदियों का कोई दावा नहीं है। यूनेस्को की कार्यकारी समिति ने यह प्रस्ताव पास किया था।

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