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भाजपा की वरिष्ठ नेताओं में शुमार उमा भारती इन दिनों राजनीतिक वनवास की शिकार हैं। कभी राममंदिर आंदोलन के मुख्य चेहरों में शुमार रहीं उमा भारती ने अपने उग्र तेवरों चलते भाजपा और संघ के कई दिग्गजों संग बैर मोल लेने का काम किया। वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी संग तो वे सार्वजनिक तौर पर उलझती, सबने देखी-सुनी। दरअसल, उमा भारती इस बात को दशक बाद भी भूल नहीं पा रही हैं कि पार्टी नेतृत्व ने 2004 में उन्हें बड़ी बेदर्दी से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से बेदखल कर उनके साथ नाइंसाफी की थी। हालांकि उन्हें नरेंद्र मोदी ने 2014 में मुख्यधारा की राजनीति से जोड़ते हुए अपनी कैबिनेट में जल संरक्षण जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा लेकिन उमा जो एक बार राजनीतिक जमीन से उखड़ी तो फिर जम नहीं पाईं। अब यकायक ही उन्होंने मध्य प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी की मांग उठा शिवराज सिंह चौहान सरकार की मुसीबतें बढ़ा डाली हैं। उन्होंने राज्य सरकार को धमकाते हुए ऐलान कर डाला है कि यदि सरकार ने जल्द कोई निर्णय नहीं लिया तो वे जनवरी 2022 से पूर्ण शराबबंदी की मांग को लेकर जन आंदोलन शुरू कर देंगी। चूंकि शराब की आय प्रदेश सरकार के राजस्व का मुख्य आधार है इसलिए बेचारे शिवराज निर्णय लें भी तो कैसे? विपक्षी दल कांग्रेस जरूर उमा भारती को उकसाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है। कांग्रेसी उन्हें याद दिला रहे हैं कि उन्होंने इस आंदोलन को पहले 8 मार्च 2021 यानी महिला दिवस से शुरू करने की घोषणा की थी। आंदोलन शुरू करने के बजाय आप मध्य प्रदेश से ही गायब हो गईं। सूत्रों की मानें तो उमा भारती ने तय कर लिया है कि इस बार वे अपने आंदोलन को जरूर शुरू करेंगी। आखिरकार उन्हें शिवराज से बदला भी तो लेना है। गौरतलब है कि उमा को सीएम पद से बेदलख करने वालों में शिवराज प्रमुख जो रहे हैं।

रावत का कद बढ़ा, देवेंद्र की होगी विदाई

https://thesundaypost.in/sargosian-chuckles/rawats-stature-increased-devendras-farewell/

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