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भाजपा का शस्त्र अब उस पर ही प्रहार करता कई राज्यों में नजर आने लगा है। मोदी-शाह पर पार्टी को विस्तार देने के लिए विपक्षी दलों में सेंधमारी करने और केंद्रीय एजेसिंयों को विपक्षी नेताओं के पीछे लगाने का आरोप लगता रहा है। बीते सात बरसों में उत्तराखण्ड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, गोवा समेत अनेक प्रदेशों में बड़े पैमाने पर दलबदल हुआ। उत्तराखण्ड में सबसे पहले तत्कालीन हरीश रावत सरकार को गिराने का प्रयास भाजपा ने किया। कांग्रेस के दस विधायकों से दल बदल करा रावत सरकार को अल्पमत में लाने का प्रयास हुआ। यह अलग बात है कि कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के चलते अपनी सरकार बचा पाने में सफल रही। मध्य प्रदेश में लेकिन कमलनाथ सरकार बच न सकी। राजस्थान में भी तमाम हथकंड़ों के बाद भी भाजपा गहलोत सरकार को न गिरा सकी। पश्चिम बंगाल में अपनी जड़े भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस में बड़े स्तर की सेंधमारी कर जमाने का भरकस प्रयास किया लेकिन ममता ने उसके मंसूबों पर पानी फेर डाला। सत्ता में वापसी के साथ ही ममता आक्रमक तरीके से पलटवार करने में जुट गईं हैं। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्क्ष मुकुल राॅय ने तृणमूल में वापसी कर डाली है। खबर है कि कई भाजपा विधायक जल्द ही ममता की शरण में जाने वाले हैं। इतना ही नहीं त्रिपुरा भाजपा में भी मुकुल राॅय के जरिए प्रदेश भाजपा में दो फोड़ करने का प्रयास ममता करती नजर आ रही हैं। खबर जोरों पर है कि असम में भी एक बड़े भाजपा नेता को तृणमूल साधने में जुटी है। इस बीच केरल में भी भाजपा संगठन पर संकट के बादल मंडराने लगे है। अफवाहों का बाजार गर्म है कि कई बड़े भाजपा नेता पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं। दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के . सुरेन्द्रन पर केरल सरकार ने कानूनी फंदा कसना शुरू कर दिया है। उन पर चुनाव के दौरान कालेधन के इस्तेमाल का आरोप अब एफआईआर में तब्दील हो चुका है। हाइवे कैश लूट मामले में भी प्रदेश भाजपा नेताओं पर गिरफ्तारी का संकट मंडराने लगा है। राजनीतिक गलियारों में इसे ‘शठे शाठयं समाचारेत्’ कहा जा रहा है।

 

अंतर्कलह की शिकार होती अन्नाद्रमुक

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