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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान कोरोना से हुई मौतों को लेकर चुनाव आयोग को लगाई फटकार

उत्तर प्रदेश के गांवों में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक सख्त टिप्पणी की है। हाई कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा है कि सरकार, चुनाव आयोग, देश के सभी उच्च न्यायलय कोरोना काल में  विधानसभा एवं पंचायत चुनाव के विनाशकारी परिणामों को समझने में नाकाम रहे। कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन आयोग देश में इलेक्शन कराने के परिणामों को नहीं समझ पाया और उन्होंने चुनाव कराने की अनुमति दे दी।

एक याचिका की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की सिंगल बेंच ने इस संबंध में टिप्पणी की। जस्टिस सिद्धार्थ की बेंच ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में कोरोना संक्रमण को रोकने में सरकार को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। गाजियाबाद के स्थानीय निवासी प्रतीक जैन की अग्रिम जमानत पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह सारी बाते कहीं। प्रतीक जैन पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक धमकी समेत कई केस दर्ज है।

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कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थियों को देखते हुए प्रतीक जैन को 3 जनवरी 2022 तक अग्रिम जमानत की मंजूरी दे दी है, साथ ही सख्त शर्ते लागू की है।

कोर्ट का साफ-साफ कहना है कि इन सब के ही चलते पहली लहर में जो कोरोना वायरस गांवों तक नहीं पहुंच पाया था, उसका प्रसार अब ग्रामीण हिस्सों में भी हो रहा है। अब सरकार के लिए गांव में संक्रमण रोकना, टेस्ट करने और लोगों का इलाज करना बेहद मुश्किल होने वाला है।

कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए पंचायत चुनावों के दौरान, गांवों में बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की गई थीं। यहां तक गांव में अपराध दर काफी अधिक है।”  इन सबको मद्देनजर रखते हुए कोर्ट ने पंचायत चुनाव के दौरान जो लोग कोरोना पीड़ित हुए और जो लोग कोरोना से मरे उनको लेकर भी गंभीर सवाल उठाए है।

बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इससे पहले भी प्रदेश में कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सरकार को लॉकडाउन लगाने समेत तमाम सुझाव दिए थे। कई बार सरकार के अधिकारियों को कोर्ट ने फटकार भी लगाई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के अलावा देश की कई अन्य अदालतों ने भी राज्यों में चुनाव कराने को लेकर निर्वाचन आयोग की आलोचना की थी। मद्रास हाई कोर्ट समेत कई अदालतों के जजों ने देश में चुनाव कराने को लेकर निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए थे।

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