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अदिति सिंह की सैटिंग-गैटिंग ! बुधवार को सत्र गुरुवार को सुरक्षा 

 

राजनीति का खेल निराला है। तभी इसे चाणक्य निति से जोड़कर देखा जाता है। आजकल उत्तर प्रदेश में चाणक्य निति चरम पर है। फ़िलहाल देश के सबसे बड़े राज्य यूपी की सियासत में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी सबसे बड़े चाणक्य बनकर उभरे है। दो दिन पूर्व तक जिस यादव परिवार में तमाम कोशिशों के चलते एकता की कश्मे खाई जा रही थी। शिवपाल यादव और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तमाम गिले शिकवे खत्म करके हाथ मिलाने जा रहे थे वह विधानसभा सत्र के दौरान अचानक योगी खेमे में दिखाई दिए। इसके साथ ही कांग्रेस की युवा नेत्री और रायबरेली की विधायक अदिति सिंह पर भी योगी का जादू सर चढ़कर बोला।

कांग्रेस के बायकॉट के बावजूद अदिति सिंह उत्तर प्रदेश के विधानसभा सत्र में शामिल हुई। इससे कांग्रेस खासकर गांधी परिवार की राजनीति में उथल – पुथल मच गई। चौकाने वाली बात यह रही की बुधवार को जहा अदिति सिंह सत्र में शामिल हुई तो उसके अगले दिन ही गुरुवार को उन्हें वाई सुरक्षा मिल गई। हालांकि योगी सरकार ने कहा है कि यह सुरक्षा अदिति को उसपर हुए हमले के मद्देनजर दी गई है।

 

याद रहे कि अदिति सिंह पर गत 13 मई को हमला हुआ था। पांच माह पूर्व हुए हमले से घबराई अदिति सिंह ने अपनी जान की सलामती के मद्देनजर योगी सरकार से उसी दौरान सुरक्षा मांगी थी।लेकिन तब योगी सरकार अदिति की सुरक्षा की फ़ाइल को भूल गई थी। अब अचानक उस समय योगी सरकार को अदिति सिंह की सुरक्षा की याद आ गई और पांच माह पूर्व हुए हमले वाले मामले को देखते हुए वाई सिक्योरिटी की सुरक्षा प्रदान कर दी। 

 

गौरतलब है कि 30 साल की अदिति ने अमेरिका के ड्यूक यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट की पढ़ाई की है। अदिति ने दिल्ली और मसूरी के प्राइवेट शिक्षण संस्थानों से भी पढ़ाई की है।  2017 के विधानसभा चुनावों में अदिति सिंह ने रायबरेली सीट से करीब 90000 वोटों से जीत हासिल की थी।  अदिति सिंह को राहुल गांधी की बहन प्रियंका का करीबी भी माना जाता है। हालांकि चुनाव जीतने के बाद पिछले साल अदिति सिंह सीएम योगी के कुछ कामों की प्रशंसा की वजह से भी चर्चा में थीं।

उस वक्त अदिति ने सीएम योगी आदित्यनाथ के औचक निरीक्षण के कदम की सराहना करते हुए इसे लगातार जारी रखने और रायबरेली में भी औचक निरीक्षण करने का अनुरोध किया था। अदिति सिंह ने तब कहा था कि मैं राजनीति में प्रदेश और देश के लिए कार्य करने के लिए आई हूं ना कि सिर्फ विरोध करने के लिए।  जहां सरकार गलत काम करेगी वहां विरोध भी करूंगी।

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अदिति रायबरेली से पांच बार के विधायक अखिलेश सिंह की बेटी हैं।  पढ़ाई अमेरिका से हुई है और देश वापस लौटने के बाद उन्होंने पिता के साथ राजनीति में दखल देना शुरू किया। 2017 में उन्होंने सदर सीट से चुनाव जीता था। अदिति का शुरू से रायबरेली से कोई जुड़ाव नहीं रहा है। वह बोर्डिंग स्कूल में पढ़ी हैं। उसने बारहवीं की पढ़ाई दिल्ली से की है।  इसके बाद अमेरिका निकल गईं।  चुनाव प्रचार के लिए अदिति सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रही थीं।  अदिति को प्रियंका गांधी का करीबी माना जाता है।

 

यह 14 मई 2019 की बात है। जब रायबरेली जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हो रही थी। अदिति अपने समर्थकों के साथ गई थीं।  रायबरेली जिला पंचायत अध्यक्ष  अवधेश सिंह है। वह सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे बीजेपी प्रत्याशी दिनेश सिंह के भाई हैं। अवधेश सिंह पर हमला करवाने के आरोप लगे थे। तब अदिति सिंह के काफिले पर फायरिंग भी की गई थी। काफिले पर पथराव और फायरिंग के बाद कई गाड़ियां हाइवे पर पलट गईं थी।  कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ था।

 

याद रहे कि रायबरेली सदर से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह एक साल पहले दिनों काफी चर्चा में बनी हुई थी। चर्चा की मुख्य वजह यह है कि सोशल मीडिया पर यह कहा जा रहा था कि राहुल गांधी की शादी उनसे होने जा रही है।  हालांकि तब अदिति सिंह ने खुद ट्वीट करके इस बात का खंडन किया था।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अदिति साल 2017 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में रायबरेली सदर सीट से 90 हजार से अधिक वोटों से जीतकर विधायक बनी।  अदिति के पिता अखिलेश सिंह भी यहां से पूर्व में कांग्रेस पार्टी समेत अलग-अलग दलों से 5 बार विधायक रह चुके हैं। अखिलेश सिंह को बाहुबली नेता माना जाता रहा है और वह रायबरेली में वे काफी लोकप्रिय भीरहे  हैं। रायबरेली कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती है।  लेकिन अखिलेश सिंह कांग्रेस का दामन छोड़कर भी हमेशा यहां से अपने दम पर चुनाव जीतते रहे हैं।  अखिलेश सिंह इस इलाके में ‘विधायक जी’ के नाम से भी मशहूर रहे हैं।

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