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‘राम’ से मदद मांग रहें ‘हनुमान’,  क्या बचेगा LJP का ईमान?

लोक जनशक्ति पार्टी यानी कि एलजेपी का ईमान खतरे में है। खतरा खुद घर से ही है। जिसमें अब इस खतरे से निपटने और पार्टी का ईमान बचाने के लिए हनुमान मैदान में है। हनुमान ने अपने राम से मदद मांगी है।

 जी हां, बात हो रही है बिहार की। बिहार की राजनीति में इन दिनों चाचा –  भतीजा यानि कि चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस में एलजेपी पर दावे को लेकर जंग छिड़ी हुई है। फिलहाल 6 में से 5 सांसद पारस के साथ हैं। जबकि चिराग अकेले पड़ गए हैं।

 इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जिस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिराग पासवान अपना राम और खुद को हनुमान कहते हैं वह राम अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में पशुपति कुमार पारस को मंत्री पद देने जा रहे हैं। जिससे फिलहाल चिराग पासवान परेशान हो गए हैं। उन्होंने ऐसे समय में अपने राम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी है। इस मदद में वह चाहते हैं कि उनके चाचा पशुपति कुमार पारस को भाजपा केंद्रीय मंत्रिमंडल में स्थान ना दे।

 

इसके लिए अगर लोक जनशक्ति पार्टी के बैनर तले पारस केंद्रीय मंत्री बनाए जाते हैं तो इससे चिराग को अपने पिता के पार्टी का अस्तित्व चाचा की तरफ समाहित होते हुए दिखाई दे रहा है। इससे चिराग की राजनीतिक रोशनी कम हो सकती है।
 चिराग पासवान पहले ही राजनीतिक रूप से चाचा से गच्चा खा गए हैं। वह फिलहाल एक कमजोर नेता के रूप में सामने आ रहे हैं। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में उनके चाचा पारस का शामिल होने की खबरों से ही उनकी नींद उड़ी हुई है। फिलहाल, चिराग भाजपा से मोहभंग होता हुआ दिख रहा है।
उधर, दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा केंद्र सरकार में अपने सहयोगी एलजेपी में मची खलबली पर चुप्पी साधे हुए हैं। भाजपा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चिराग पासवान से नाराजगी को देखते हुए चिराग का समर्थन कर बिहार की अपनी सरकार को खतरे में डालने से डरी हुई है। क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने जहां भाजपा की मदद की थी वही जेडीयू की खिलाफत करते हुए उस को नुकसान पहुंचाया था। ऐसे में अगर भाजपा अब राज पासवान की तरफ ‘सॉफ्ट’ होती है तो जेडीयू की भाजपा के प्रति नाराजगी सामने आ सकती है।

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