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बैकफुट पर किसान आंदोलन

देश की राजधानी दिल्ली से सटे सोनीपत में सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन स्थल के करीब दलित हत्या मामले ने किसान आंदोलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान नेताओं ने हालांकि अपने संयुक्त किसान मोर्चा को इस हत्याकांड से दूर करते हुए दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग उठा जनाक्रोश को कम करने का प्रयास किया है लेकिन हाल फिलहाल वह बैकफुट पर जाता नजर आ रहा है।

दरअसल, हाल ही में किसानों के मंच के पास एक दलित युवक का हाथ काटकर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। फिर शव को पुलिस बैरिकेड से लटका दिया गया। मारा गया शख्स का नाम लखबीर सिंह पंजाब के तरनतारन का रहने वाला है। दिल्ली से सटे सिंघु बॉर्डर पर हुई इस हत्या की तस्वीरें दिल-दहलाने वाली हैं। लखबीर सिंह का मौत से पहले का बयान भी सामने आया है। वीडियो में वह अपनी जान बक्श देने के लिए गिड़गिड़ाता नजर आ रहा है। इस हत्याकांड के चश्मदीद यह कहते सुने जा रहे हैं कि लखबीर ने बेअदबी की इसलिए निहंग ने उसे काटकर लटका दिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। बीजेपी ने कहा है कि ये हत्या तालिबानी तरीके से हुई है। देश भर के दलित इस घटना से आक्रोशित हैं। उनकी मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो।

हत्य़ारों ने इतने बर्बर तरीके से लखबीर की हत्या को अंजाम दिया कि वहां मौजूद लोगों की रूह तक कांप गई। हत्यारों ने लखबीर के हाथ काटकर उसके शव को बैरिकेड से लटका दिया। उसके शरीर पर धारदार हथियार से कई हमले के निशान मिले हैं। शव का हाथ शरीर से अलग कटा हुआ है। यही नहीं हत्यारों ने उसकी पांचों उंगलियों के साथ हथेली भी काटकर अलग कर दी है। इस मामले में कुछ लोग कथित तौर पर निहंग सिखों पर आरोप लगा रहे हैं वहीं निहंग सिखों का कहना है कि लखबीर ने पवित्र गुरुग्रंथ साहब का अपमान किया था। पुलिस जब घटनास्थल पर पहुंची तो उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा। किसान नेताओं के समझाने पर भीड़ शांत हुई तब जाकर पुलिस ने लखबीर के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा बाद में गांव में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परिजनों की मौजूदगी में मृतक लखबीर सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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लखबीर के अंतिम संस्कार के दौरान कोई ग्रंथी वहां अरदास के लिए मौजूद नहीं था और न ही उसके गांव चीमा कलां से कोई अंतिम संस्कार में शामिल हुआ। इस बर्बर हत्याकांड को अंजाम देने के आरोप में 15 अक्टूबर को सरबजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया था। उसे सोनीपत जिले की एक कोर्ट में पेश किया गया जहां से उसे 7 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया। इसके साथ ही अन्य आरोपी नारायण सिंह को पुलिस ने अमृतसर जिले के अमरकोट गांव से गिरफ्तार कर लिया। इस जघन्य हत्या के मामले में 16 अक्टूबर की देर शाम 2 अन्य लोगों ने सोनीपत पुलिस के सामने कुंडली में सरेंडर किया। पुलिस के अनुसार, 2 आरोपी पंजाब के फतेहगढ़ साहिब के रहने वाले हैं। इसके बाद मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या 4 हो गई है। इससे पहले अमृतसर में नारायण सिंह ने कहा था कि वह सरेंडर कर रहा है। गिरफ्तारी से पहले नारायण ने कहा कि लखबीर सिंह को बेअदबी करने की सजा दी गई है।

हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा ने लखबीर सिंह की हत्या की निंदा करते हुए कहा है कि हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि इस घटना के दोनों पक्षों, निहंग समूह और मृतक का एसकेएम से कोई संबंध नहीं है। लेकिन लंबे अर्से से चल रहे आंदोलन की साख पर अब सवालिया निशान लगने लगे है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुए कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से भी आंदोलन को लेकर कुछ सवाल किए जा चुके हैं सुप्रीम कोर्ट में कृषि कानूनों पर रोक के बावजूद आंदोलन को जारी रखने और दिल्ली-एनसीआर के बॉर्डर पर जाम की समस्या के मद्देनजर आंदोलन पर टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कृषि कानूनों को अदालत में चुनौती दी गयी है तो फिर विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?

दरअसल कुछ अर्से से आंदोलन की छवि प्रभावित होने लगी है। कुछ अर्सा पहले कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-हरियाणा और यूपी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में शामिल होने बंगाल से आई युवती के साथ टीकरी बॉर्डर पर सामूहिक दुष्कर्म का सामने आया था। भले ही संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने इस पर सफाई दी। लेकिन इससे आंदोलन की छवि खराब हुई। दिल्ली से सटे हरियाणा के बहादुरगढ़ में जून माह में एक व्यक्ति को जिंदा जला दिया गया। आग लगने के बाद मुकेश को बहादुरगढ़ के एक अस्पताल लाया गया। जहां 90 फीसदी तक झुलस चुके मुकेश ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इससे भी किसान आंदोलन पर सवालिया निशान लगे।

हालांकि इन घटनाओं ने इस आंदोलन की छवि को नुकसान पहुंचाने का काम किया है लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा का नेतृत्व इससे विचलित हुए बगैर आंदोलन को धार देने में जुटा नजर आ रहा है। गत् सोमवार, 18 अक्टूबर को देश भर में किसानों द्वारा ‘रेल रोको’ कार्यक्रम के जरिए केंद्र सरकार को अपनी शक्ति का एहसास कराने का काम किया। लखीमपुर हिंसा मामले में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर पंजाब, राजस्थान, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक समेत कई राज्यों में किसान पटरी पर जा बैठे। इससे बड़े स्तर पर रेल सेवाएं बाधित हो गईं। मोर्चा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा हुआ है।

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