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वायु प्रदूषण के दुष्परिणाम: दुनिया में हर साल 60 लाख बच्चे लेते हैं समय से पहले जन्म !

वायु प्रदूषण वर्तमान में एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार,  वायु प्रदूषण के कारण दुनिया भर में हर साल 70 लाख से अधिक लोग मारे जाते हैं। हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने छह प्रमुख खतरनाक प्रदूषकों पर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं और सभी देशों से इनका पालन करने का आह्वान किया है। संगठन के अनुसार, इससे दुनिया भर के लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।
इसी बीच एक अध्ययन के अनुसार, वायु प्रदूषण के कारण वर्ष 2019 में दुनिया में 60 लाख बच्चों का समय से पहले जन्म हुआ। एक अध्ययन के अनुसार, 30 लाख बच्चे कम वजन के पैदा हुए।

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सैन फ्रांसिस्को में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और वाशिंगटन विश्वविद्यालय ने बच्चों पर इनडोर और बाहरी प्रदूषण के प्रभावों का अध्ययन किया है। 204 देशों के बच्चों का अध्ययन किया गया। प्लस मेडिसिन पत्रिका के अनुसार, पीएम 2.5 कण गर्भावस्था, गर्भकालीन आयु, वजन घटाने, जन्म के समय कम वजन, जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म का कारण बनते हैं। यह पहली बार है कि किसी बच्चे के जन्म पर प्रदूषण के प्रभाव का इतनी गहराई से अध्ययन किया गया है।

इनडोर वायु प्रदूषण सबसे बड़ा अपराधी है और इनडोर स्टोव मुख्य कारण हैं। इन चूल्हों के धुएं से कुल दो-तिहाई बच्चे प्रभावित पाए गए। अध्ययन में कहा गया है कि 28 लाख कम वजन के बच्चे पैदा हुए और 59 लाख समय से पहले जन्मे बच्चे समय से पहले पैदा हुए। अगर PM 2.5 की मात्रा कम होती तो शायद ये साइड इफेक्ट नजर नहीं आते। दक्षिण एशिया और अफ्रीका में जन्म के समय कम वजन और समय से पहले जन्म को कम से कम 78 प्रतिशत तक कम किया जा सकता था। समय से पहले जन्म नवजात शिशुओं में मृत्यु का एक प्रमुख कारण है। इससे 1.5 करोड़ बच्चे प्रभावित हो रहे हैं।

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