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कोरोना का कहर जारी, प्रतिदिन साढ़े 3 लाख मामले

भारत इस समय कोरोना की दूसरी लहर से पूरी तरह थर्राया हुआ है। हर तरफ कोरोना महामारी को लेकर हाहाकरा मची हुई है। हाल इतना ज्यादा बुरा हो गया है कि अस्पतालों में न तो मरीजों को जगह नहीं मिल रही, न दवाई। ऑक्सीजन की कमी के कारण हर दिन हजारों की संख्या में लोग दम तोड़ रहे है। तमाम देश भारत को वैक्सीन से लेकर एन-95 मास्क और आक्सीमीटर से लेकर आक्सीजन तक पहुंचा रहे है।

कोरोना महामारी के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘आत्मनिर्भर भारत’ भी लटकती हुई दिखाई दे रही है। जब विदेशी सहायता के जहाज भारतीय धरती पर पहुंचेंगे तब हमारे केंद्रीय मंत्री ट्वीट कर रहे होंगे। हालांकि यहीं मंत्री पहले ट्वीट कर रहे थे, कि न्यू इंडिया को विदेशी मदद की कोई जरुरत नहीं।

यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने कहा है कि वे भारत के अनुरोध पर कार्रवाई कर रहे हैं। ब्रिटेन से सहायता इसके फॉरेन कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एफसीडीओ) के जरिए और अमेरिका से एसएआईडी के जरिए आ रही है। जहां पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोरोना वैक्सीन को लेकर दावा कर रहे थे कि कोरोना महामारी को लेकर पूरा विश्व भारत की तरफ देख रहा है।

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लेकिन अब मामला यह हो गया है कि हम विदेशी मदद को देख रहे है। मुसीबत के समय किसी देश की मदद करना मानवता का सबसे बड़ा परोपकार माना जाता है। लेकिन मदद आप तब कर सकते है जब आप मदद करने योग्य होते है।

वैक्सीन मैत्री के तहत भारत ने 84 देशों को् कोरोना की 6 करोड़ डोज भेजी थी। जो आज भारत के काम आ सकती थी। अगर हम आज उन 6 करोड़ डोज को अपने लोगों को लगाते है तो वह बस कुछ दिन ही चल सकती है।

लेकिन तथ्य यह है कि हम वैक्सीन बाहर तो भेजते रहे मगर अपनी दो शानदार घरेलू कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए हमने ऑर्डर नहीं दिए ताकि घरेलू जरूरत के लिए उनका भंडार जमा किया जा सके। यह हद दर्जे के आत्मविश्वास का ही प्रदर्शन था।

सोशल मीडिया पर लोग मदद की गुहार लगा रहे है। तमाम अस्पतालों की हालात खराब हो चुकी है, नए मरीजों को रखने के लिए अस्पतालों में जगह तक नहीं बची हुई है। श्मशान घाटों और अस्पतालों के बाहर लाइने लगी हुई है।

लोग इलाज के लिए तरस रहे है लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल रहा। बीते हफ़्ते भारत ने एक दिन में नए कोविड केस का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। कोरोना संक्रमण से अब तक जान गंवाने वालों की आधिकारिक संख्या दो लाख के पार जा चुकी है।

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर को रोकने के लिए मोदी सरकार पूरी तरह फैल हो चुकी है। स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई है। कोरोना से होने वाली मौतों को लेकर विदेशी मीडिया भी मोदी सरकार को जमकर लताड़ लगा चुका है।

इतना ही नहीं कोरोना को लेकर अदालतों ने भी सरकार को लताड़ लगाई है। महामारी फैलने का सबसे बड़ा कारण पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कोरोना प्रोटोकॉल का उल्लघंन माना जा रहा है। और दूसरा जब देश में कोरोना मरीज नियंत्रित हो गए थे, तब सरकार अस्पतालों की दशा, दिशा सुधारने की बजॉय विधानसभा चुनाव में व्यस्त हो गई। जिसका नतीजा आज पूरा भारत भूगत रहा है।

अदालतों के सख्त रवैये के बाद सरकार कुछ हलचल में आई है। सबसे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को लताड़ लगाई। 27 अप्रैल को मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भारत का चुनाव आयोग देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के लिए ज़िम्मेदार है।

उसके अधिकारियों पर कोविड-19 के मानकों का पालन किये बिना रैलियों की अनुमति देने के लिए संभवतः हत्या का मुक़दमा चलाया जाना चाहिए।”

4 मई को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोरोना मृतकों को नरसंहार करार दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा था कि कोविड-19 के मरीज़ों की मौतें एक ‘आपराधिक कृत्य’ है और ‘नरसंहार’ से कम नहीं।” दिल्ली में इस समय सबसे बड़ी समस्या ऑक्सीजन को लेकर है, दिल्ली के अस्पातालों में लोग ऑक्सीजन की कमी को लेकर मर रहे है। 4 मई को ही दिल्लीहाई हाईकोर्ट ने सरकार को ऑक्सीजन की कमी पर फटकार लगाते हुए बोला कि आप शुतुरमुर्ग की तरह रेत में अपना सिर डाल सकते हैं, हम नहीं।

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दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली को 700 मिट्रिक टन ऑक्सीजन देने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने बयान में कहा था कि हम चाहते हैं कि दिल्ली को 700 मीट्रिक टन की आपूर्ति प्रतिदिन की जाये. हम यह गंभीरता से कह रहे हैं। कृपया हमें उस स्थिति में जाने के लिए मजबूर ना करें जहाँ हमें सख्ती बरतनी पड़े।”

नए मरीजों का आंकड़ा 5 दिन में पहली बार 4 लाख से नीचे आ गया। बीते 24 घंटे में यहां 3 लाख 66 हजार 317 लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई। 3 लाख 53 हजार 580 लोग ठीक भी हुए, जबकि 3,747 लोगों ने जान गंवाई। इस तरह एक्टिव केस यानी इलाज करा रहे मरीजों की संख्या में सिर्फ 8,907 की बढ़ोतरी हुई। यह आंकड़ा पिछले 55 दिन में सबसे कम है।

इससे पहले 16 मार्च को 10,934 एक्टिव केस बढ़े थे। हालांकि, ऐसा टेस्टिंग में कमी की वजह से भी हुआ है, क्योंकि बीते दिन देश में सिर्फ 14.74 लाख टेस्ट किए गए। इससे पहले यह आंकड़ा 18 लाख के पार था।

देश के 18 राज्यों में पूर्ण लॉकडाउन जैसी पाबंदियां हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, मिजोरम, गोवा और पुडुचेरी शामिल हैं। यहां पिछले लॉकडाउन जैसे ही कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।

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