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‘ डेल्टा प्लस वैरिएंट ‘ ने बढ़ाई चिंता ,बढ़ी तीसरी लहर की आशंका  

अपने नए – नए रूप धारण करने वाले कोरोना वायरस की दहशत से देशभर में हड़कंप मचा हुआ है। इस बीच अब ‘डेल्टा प्लस वैरिएंट’ से महाराष्ट्र में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका और बढ़ गई है। प्रदेश में कोरोना वायरस के रोजाना सामने आने वाले संक्रमितों की संख्या में  एक बार फिर बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले 24 घंटों के भीतर  राज्य में कोरोना  के 9 हजार 844 नए मामले सामने आए, इसके अलावा राज्य में ‘ डेल्टा प्लस वैरिएंट’ के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बयान जारी कर कहा है कि राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 60 लाख 7 हजार 431 हो गई है। साथ ही 197 और लोगों की मौत के साथ मृतकों की कुल संख्या 1 लाख 19 हजार 859 हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राज्य में कोरोना  से ठीक होने की दर अब 95.93 फीसदी है, जबकि मृत्यु दर बढ़कर दो फीसदी हो गई है। वहीं सक्रिय मामलों की संख्या 1 लाख 21 हजार 767 है।

ज्यादा संक्रमण वाले जिलों में जांच और टीकाकरण बढ़ाएं- सीएम 

 राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने स्वास्थ्य अधिकारियों से राज्य के उन सात जिलों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा जहां कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तुलनात्मक रूप से अधिक सामने आ रहे हैं। ठाकरे ने कहा कि ऐसे जिलों में जांच और टीकाकरण की संख्या बढ़ाई जाए।
ठाकरे ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधों में ढील देने में जल्दबाजी नहीं की जानी चाहिए और वायरस के प्रसार को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को लापरवाही नहीं करनी चाहिए। रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, सांगली, कोल्हापुर और हिंगोली जिले में संक्रमण के अधिक मामले सामने आ रहे हैं।
ठाकरे ने कहा कि वर्तमान में दूसरी लहर, डेल्टा प्लस प्रकार और तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य अवसंरचना को बेहतर बनाना आवश्यक है। स्वास्थ्य सचिव प्रदीप व्यास ने कहा कि राज्य में संक्रमण की दर घटकर 0.15 प्रतिशत रह गई है लेकिन उक्त सात जिलों में यह दर दोगुनी या तिगुनी है।

सबसे अधिक संक्रमित भारत में

विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार 14 से 20 जून के बीच भारत में कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक 4 लाख 41 हजार 976 मामले मिले हैं। राहत की बात ये है कि ये इससे पिछले सप्ताह की तुलना में 30 फीसदी कम है।

डेल्टा प्लस वैरिएंट ‘ को तीसरी लहर का कारण बताना जल्दबाजी : आइसीएमआर

भारतीय परिषद चिकित्सा अनुसंधान (आइसीएमआर) के मुताबिक कोरोना वायरस के ‘ डेल्टा प्लस वैरिएंट ‘ की संभावित तीसरी लहर के लिए कारण बताना फिलहाल जल्दबाजी होगी। इस बारे में आइसीएमआर के विज्ञानी ने कहा कि फिलहाल तीसरी लहर के लिए बहुत चिंतित होने की जरूरत नहीं है।

भारतीय परिषद चिकित्सा अनुसंधान (आइसीएमआर) के विज्ञानी और महामारी विज्ञान व संचारी रोग विभाग के कार्यक्रम अधिकारी डा.सुमित अग्रवाल ने कहा कि अभी से तीसरी लहर के लिए चिंता करना सही नहीं है।

उल्लेखनीय है डेल्टा प्लस विशेषज्ञों द्वारा पहचाना गया कोरोना का एक घातक वैरिएंट है। इसे लेकर विज्ञानी अध्ययन कर रहे हैं। भारत में इस वैरिएंट के अधिकांश मामले महाराष्ट्र, केरल और मध्य प्रदेश में पाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन राज्यों के प्रभावित जिलों में रोकथाम के उपाय तेज करने की सलाह दी है।

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यह वैरिएंट डेल्टा (बी.1.617.2) संस्करण में उत्परिवर्तन के कारण बना है। इसकी गंभीरता के बारे में विज्ञानी अभी भी अंधेरे में हैं। डा.अग्रवाल के अनुसार प्रत्येक एमआरएनए वायरस की यह एक सामान्य प्रवृत्ति है कि उसका उत्परिवर्तन होगा। ये उत्परिवर्तन अपरिहार्य है, हम उत्परिवर्तन को नियंत्रित नहीं कर सकते। जैसे-जैसे समय बीतेगा हम इसकी प्रवृत्ति के बारे में जानते जाएंगे। शुरुआत में अल्फा था, फिर डेल्टा और अब डेल्टा प्लस।

डा.सुमित ने यह भी कहा कि भविष्य में और म्यूटेशन देखे जा सकते हैं। उन्होंने कहा, कि इस वैरिएंट के तीन लक्षण हैं जिन्हें हमने अब तक पहचाना है। इसकी संचरण क्षमता उच्च स्तर की है। यह फेफड़ों की कोशिकाओं के प्रति उच्च आत्मीयता (हाई एफिनिटी) रखता है। इस पर मोनोक्लोनल एंटीबाडी थेरेपी बहुत कारगर नहीं है।

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