समय -समय की बात है, महाराष्ट्र में बीजेपी का कद बढता गया वहीं शिवसेना का कद घटता गया
2019 के आगामी महराष्ट्र विधानसभा चुनाव में अब बीजेपी 164 और शिवसेना 124 सीटों पर लड़ रही है
यहाँ पर 21 अक्टूबर को मतदान होगा और 24 अक्टूबर को नतीजे आयेंगे
महाराष्ट्र की सियासत में बीजेपी-शिवसेना करीब पिछले तीन दशक से मिलकर चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं I पिछले तीन दशक के सफर में बीजेपी गठबंधन में बढ़ती रही और शिवसेना पिछड़ती गई I इसी का नतीजा है कि इस बार के महाराष्ट्र के चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन में शिवसेना जूनियर पार्टनर की हैसियत से चुनावी मैदान में उतरी है I महाराष्ट्र में कुल 288 विधानसभा सीटों में से बीजेपी 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है तो शिवसेना 124 सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है I वही 29 साल पहले दोनों के बीच गठबंधन हुआ था तो शिवसेना ने 183 और बीजेपी ने 104 सीटों पर चुनाव लडे थे I

महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा अस्मिता और उग्र हिंदुत्व को लेकर स्व.बाला साहब ठाकरे ने शिवसेना का गठन 1966 में किया वहीँ बीजेपी का गठन 1980 में हुआ था I इस तरह से महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन का इतिहास पर ध्यान दे तो इन्होने 1984 के लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ने की शुरूआत की लेकिन शिवसेना ने यह चुनाव बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर लड़ा था, क्योंकि उस समय उसके पास अपना चुनाव चिन्ह नहीं थाI बीजेपी-शिवसेना ने पहली बार 1990 के विधानसभा चुनाव में अपने एक साथ मिलकर उम्मीदवार उतारा था I उस समय शिवसेना ने 183 सीटों और बीजेपी ने 104 सीटों पर चुनाव लड़ा था I इसमें बीजेपी को 42 और शिवसेना को 52 सीटें मिली थीं I इस तरह से शिवसेना बड़े भाई की भूमिका में नजर आ रही थी I’’1995 के विधानसभा चुनाव में फिर दोनों दल मिलकर चुनावी मैदान में उतरे I इस बार शिवसेना ने बीजेपी को एक सीट ज्यादा दी, जिसमें बीजेपी 105 और शिवसेना खुद 183 सीट पर चुनाव लड़ी I इसमें शिवसेना को 73 और बीजेपी को 65 सीटें मिलीं I इस तरह से दोनों ने मिलकर पहली बार महाराष्ट्र में सरकार बनाई और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर शिवसेना विराजमान हुई थीI’’ 1999 के विधानसभा चुनाव में एनडीऐ के सीट बटवारे के फार्मूला में बीजेपी ने 117 सीट और शिवसेना ने 161 सीटो पर चुनाव लड़ा I इस बार बीजेपी ने 56 और शिवसेना ने 69 सीटो पर जीत दर्ज की थी I इस बार बीजेपी-शिवसेना गठबंधन के हाथों से सत्ता खिसक गई थी, लेकिन एक बात साफ हो गई कि अब बीजेपी का कद बढ़ रहा था और शिवसेना का कद घट रहा था I इसके बाद 2004 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना 163 और बीजेपी 111 सीटों पर चुनाव लड़ी. इसमें शिवसेना को 62 और बीजेपी को 54 सीटें मिलीं I इस बार के चुनाव में बीजेपी को पिछली बार के मुकाबले 6 सीटें कम मिला था I
बीजेपी ने बदलते समय के साथ बदली थी रणनीति
2009 के विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग फॉर्मूल के तहत शिवसेना 169 और बीजेपी 119 सीटों पर चुनाव लड़ा था I बीजेपी 46 सीटें औैर शिवसेना 44 सीटें जीतने में कामयाब रही थी I कम सीटों पर लड़कर ज्यादा सीटें जीतने से भाजपा का आत्मविश्वास बढ़ गया था. इसी का नतीजा था कि 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शिवसेना की शर्तों पर समझौता नहीं किया दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था I बीजेपी ने 260 सीटों पर चुनाव लड़ा और 122 सीटें जीती वहीँ शिवसेना 282 सीटों पर चुनाव लड़ा और महज 63 सीटें ही जीत पाई. बीजेपी अपने दम पर सरकार नहीं बना पा रही थी तो शिवसेना का उसे साथ मिला और फिर दोनों ने मिलकर सरकार बनाई और मुख्यमंत्री पद पर बीजेपी काबिज हुई I अब एक बार फिर दोनों मिलकर चुनावी दंगल में उतरे हैं, लेकिन बीजेपी अब बड़े भाई की भूमिका में है और शिवसेना जूनियर पार्टनर के तौर पर उतर रही है I देखना यह है कि इस बार के चुनावी रणभूमि में बाजी कौन मारता है I
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