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भाजपा और  शिवसेना भाई – भाई : उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासत चरम पर है। महाराष्ट्र विधानसभा में  इस बार ठाकरे परिवार से आदित्य ठाकरे के चुनावी मैदान में आने से यह चुनाव और भी ज्यादा खास हो गया है। शिवसेना यानी ठाकरे परिवार की राजनीति के इतिहास में पहली बार परिवार का सदस्य चुनाव लड़ रहा है। राज्य में कल चार सितंबर  को नामांकन का आखिरी दिन था। सभी पार्टियों के अपने-अपने दावेदारों की सूचि जारी कर दी है। इस बीस कल महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ने अपनी सहयोगी पार्टी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ साझा प्रेस कॉंफ्रेंस की।  इस प्रेस कॉंफ्रेंस में भाजपा और शिवसेना के बीच चल रहे मतभेदों और सीट बटवारे को लेकर औपचारिक एलान किया गया। प्रदेश में भाजपा 150 और शिवसेना 124 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

भाजपा -शिवसेना के संयुक्त कार्यक्रम में  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा “कि हम बागी प्रत्याशियों से अपना नामांकन वापस लेने को कहेंगे। उन्होंने कहा कि यह महागठबंधन की सभी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा जाएगा।हालांकि, मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए भी कहा कि अगर वे नहीं माने तो हमारे गठबंधन में उन्हें कोई भी पद या स्थान नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के विशाल अंतर से जीत की भी उम्मीद जताई। उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि वह बड़े अंतर से जीतेंगे और उन्हें विधानसभा में देखेंगे। “देवेंद्र फडणवीस ने जोर देते हुए कहा कि कुछ लोग सोच रहे थे कि विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन होगा या नहीं। लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए ने पूर्ण बहुमत से जीतकर सरकार बनाई थी। कुछ जगह पार्टी में मतभेद है, जिसको दो-तीन दिन में सुलझा लिया जाएगा। जिन्होंने पार्टी के खिलाफ बगावत की है, उनको जनता जवाब देगी।

महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन,249 सीटो पर सहमति

राज्य की राजनीति के इतिहास में पहली बार ठाकरे परिवार से चुनाव लड़ रहे आदित्य ठाकरे को सीएम बनाए जाने की मांग पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने साफ तौर पर कहा “कि राजनीति में पहला कदम रखने का मतलब ये नहीं होता कि आप पदेश के मुख्यमंत्री बन जाएंगे। अभी वो राजनीति में आए हैं, ये सिर्फ एक शुरुआत है। “उद्धव ठाकरे ने आगे कहा कि भाजपा और शिवसेना भाई-भाई हैं। इस गठबंधन में बड़े भाई और छोटे भाई जैसा कुछ भी नहीं हैं। महाराष्ट्र के बेहतरी और फायदे के लिए काम करना है। लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र में माहौल बदल गया है।

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