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किसान आंदोलन से डरी BJP, वेस्ट UP में अब सियासी नब्ज टटोलने आए राधा मोहन

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक माह में भाजपा के दो बडे नेता दौरा कर रहे हैं। पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के साथ भाजपा के संगठन मंत्री सुनील बंसल और अब भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन आज पश्चिम उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं । इस दौरान कहा जा रहा है कि वह वेस्ट यूपी में बढते किसान आंदोलन के चलते यहा वह सियासी जमीन की नब्ज टटोलेगे।

राजनीतिक सूत्र बता रहे हैं कि भाजपा समीक्षा करने के बहाने वेस्ट यूपी में अपनी कमजोर होती जड़ों को मजबूत करने की कोशिशों में जुटी है। जिसके तहत प्रदेश प्रभारी का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वेस्ट यूपी में प्रदेश प्रभारी का आने का बहाना समीक्षा का होगा। लेकिन उनका निशाना मिशन 2022 का होगा। यानी कि भाजपा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मिशन 2022 की तैयारियों में जुट चुकी है।

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पिछले दिनों हुए उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में भाजपा को मनमाफिक सीट नहीं मिली थी। खासकर वेस्ट यूपी में यहां के महत्वपूर्ण जिले मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, अलीगढ़, आगरा, बागपत, और शामली के साथ ही गाजियाबाद में भाजपा की बजाय समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल को अधिक सीटें मिली। कहा जा सकता है कि पंचायत चुनाव में वेस्ट यूपी के इन जिलों में भाजपा का सूपड़ा ही साफ हो गया है। अधिकतर जिला पंचायत चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है। इसके बाद वेस्ट यूपी में भाजपा को मिशन 2022 की चिंता सताई जा रही है।

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान किसान आंदोलन के चलते हुआ है। किसान आंदोलन को लीड कर रहे राकेश टिकैत पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी है। राकेश टिकैत ने इस आंदोलन को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूती से खड़ा कर दिया है । जिसके चलते भाजपा यहां बैकफुट पर आ गई है। फिलहाल, भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन अपने इस दौरे के जरिए डैमेज कंट्रोल की पॉलिसी पर काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा कभी भी मुख्य पार्टी बनकर नहीं उभरी थी। यहां अधिकतर बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल का ही वर्चस्व रहा। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में भी यहां कई चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन 2016 में यहां कैराना कांड में राजनीति की पूरी दशा ही बदल दी।

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कैराना कांड होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकतर क्षेत्रों में भाजपा ने बढ़त बना ली। जिसका असर 2019 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिला। जबकि इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़त मिली थी। फिलहाल एक बार फिर भाजपा 2022 के मिशन को लेकर सक्रिय हो चुकी है। एक माह पहले प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के साथ भाजपा के संगठन मंत्री सुनील बंसल भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर  रहें।

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