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वैज्ञानिकों को मिला 48,500 साल पुराना संक्रमित वायरस

दुनिया भर में हो रहे डेवलपमेंट के कारण ग्लोबल वार्मिंग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जैसे-जैसे विश्व आधुनिकता की और बढ़ रहा है वैसे-वैसे पृथ्वी विनाश की तरफ बढ़ रही है। इस बढ़ते विनाश के कारण बढ़ रही गर्मी प्राचीन समय से जमे पर्माफ्रॉस्ट को पिघला रही है, जिसके कारण कई तरह के खतरे उत्पन्न हो चुके हैं। सदियों से जमे पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने के कारण न केवल समुंद्रतल का स्तर बढ़ रहा है अपितु इनके भीतर दबे खतरनाक वायरस भी निकल रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वायरस करीब 48,500 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। पर्माफ्रॉस्ट में दफन मिले इन वायरस की सबसे खतरनाक बात यह है कि यह आज भी संक्रमित अवस्था में पाए गए हैं। यूरोप के वैज्ञानिकों को रूस के साइबेरिया इलाके के पर्माफ्रॉस्ट से कुछ सैंपल मिले हैं, जिनका उन्होंने परीक्षण किया है। वैज्ञानिकों ने 13 नए पैथोजन को पुनर्जीवित किया और इन वायरस के बारे में जानकारी भी दी गई है। इनमे से एक वायरस जो अभी तक भी संक्रमित है उसे वैज्ञानिकों ने जोम्बी वायरस नाम दिया है। रिसर्चर्स के मुताबिक, जमी हुई बर्फ में कई हजार साल तक रहने के बावजूद वे संक्रामक बने रहे हैं। 

 

फ्रांस के वैज्ञानिकों ने रूस में एक शोध के दौरान 48 हजार साल पहले के एक वायरस की खोज की है। बताया गया है कि यह वायरस रूस की एक जमी हुई झील में मिला है। समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ के हवाले से दी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक इस वायरस को ‘ज़ोंबी वायरस’ कहा जाता है. इन वैज्ञानिकों ने यह आशंका भी जताई है कि यह वायरस एक बार फिर कोरोना से भी बड़ी और भयानक महामारी फैलाएगा।

 
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर से प्रकाशित इस अखबार ने जिस अध्ययन के आधार पर इस खबर को प्रकाशित किया है। उससे संबंधित विस्तृत शोध अभी तक प्रकाशित नहीं हुआ है। प्रकाशन से पहले का काम चल रहा है और शोध जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा। ‘वायरल’ जानकारी में कहा गया है, “इस पुरातन वायरस की खोज से भविष्य में पौधों, जानवरों और मनुष्यों के लिए स्थिति और खराब हो सकती है। जलवायु परिवर्तन ने मानव के लिए उत्तरी गोलार्ध में पहली बार अनुसंधान के लिए बर्फ के नीचे कई स्थानों तक पहुंचना संभव बना दिया है। यह पहली बार है जब इंसान इस जमी हुई अवस्था में वायरस के संपर्क में आया है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण यह अनुमान लगाया गया है कि ‘इन विषाणुओं के माध्यम से कुछ जैविक पदार्थों के निकलने की संभावना है जो हजारों वर्षों से जमे हुए हैं।’ इसमें घातक वायरस भी हो सकते है। 
 
 
शोधकर्ता अनुमान लगाते हैं “इन जैविक एजेंटों में सेल युक्त सूक्ष्मजीवों के साथ-साथ वायरस भी शामिल हो सकते हैं .” वैज्ञानिकों को यह जॉम्बी वायरस साइबेरियन पठार की बर्फ की चादर के नीचे जमे हुए तालाब में मिला है। ऐसा अनुमान है कि यह वायरस, जो महामारी का कारण बनता है और अब तक ज्ञात है, 48,500 साल पहले का है। कई लोगों को संक्रमित करने वाला वायरस संक्रमण की लहरों के दौरान इस बर्फ की चादर के नीचे हजारों साल तक दबा रहा। यह अब मनुष्य को ज्ञात सबसे पुराने विषाणुओं में से एक है। इससे पहले 2013 में साइबेरिया में 30 हजार साल पुराना एक वायरस खोजा गया था।
 
‘साइंस अलर्ट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिसर्च के दौरान 13 अलग-अलग वायरस खोजे गए हैं और हर एक की अलग संरचना है। मुख्य वायरस की खोज रूस के याकुटिया में उची अल्स नामक तालाब में की गई थी। वैज्ञानिकों को बर्फ के नीचे जमे साइबेरियन लोमड़ियों के बालों और आंतों में दूसरे वायरस के अवशेष मिले हैं।
 
हजारों दशक पुराने ये वायरस संक्रमण का कारण बन सकते हैं। इसलिए शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। उम्मीद है कि कोरोना जैसे वायरस के संक्रमण की लहरें बार-बार आएंगी। इन विषाणुओं द्वारा उत्सर्जित पदार्थों के कारण बर्फ तेजी से पिघलती है और कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन में परिवर्तित हो जाती है। वैज्ञानिकों ने भी कहा है कि इससे ग्रीन गैसों का अधिक उत्सर्जन होता है।

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