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दुनिया में रही उथल-पुथल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2019 का साल उथल-पुथल का रहा। इस वर्ष जहां कुछ देशों में सत्ता बदली तो राष्ट्रों के आपसी टकराव खूब चर्चा में रहे। आतंकी घटनाओं ने दुनिया को दहलाए रखा तो बगदादी जैसे खूंखार आतंकी के खात्मे ने राहत भी पहुंचाई कि मजबूत इरादों के चलते आतंकवाद से लड़ा जा सकता है। आर्थिक मोर्चे पर बात करें तो मंदी के दौर से गुजरती दुनिया के तमाम छोटे मुल्कों को अमेरिका, चीन टैरिफ वार का नुकसान झेलना पड़ा है।

यूरोपीय यूनियन से अलग होने यानी ब्रेग्जिट का मामला ब्रिटेन की राजनीति में अहम साबित हुआ। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की पुनः सत्ता में वापसी हुई। साल 2008 से ब्रेग्जिट का मुद्दा ब्रिटेन की राजनीति में चल रहा है। राजनीति में एक अहम मोड़ इस साल पाकिस्तान में पूर्व क्रिकेटर इमरान का प्रधानमंत्री बनते ही उनके नेतृत्व पर सवाल भी उठने लगे। उन्हें सेना की कठपुतली तक कहा गया। वर्ष के अंतिम माह दिसंबर तक यह बात उस समय सही साबित भी हुई जब पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ को पाकिस्तान की विशेष अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के मामले में सैन्य दबाव के आगे इमरान सरकार झुकती दिखाई दी।

सेना ने फैसले के खिलाफ स्वर उठाये तो सरकार ने तत्काल बयान दिया कि वह इसकी समीक्षा करेगी। अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति डोनाल्ड टं्रप एक और पारी खेलने के प्रयासों में जुटे हुए रहे तो इसी बीच साल के अंतिम माह में 19 दिसंबर को अमेरिकी संसद के निचले सदन में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित हो गया। इससे उनकी चुनौती बढ़ी है। श्रीलंका में पहली बार कोई सगे भाई एक साथ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद पर आसीन हुए। महिंद्रा राजपक्षे देश की प्रधानमंत्री तो उनके छोटे भाई गोटबया राजपक्षे राष्ट्रपति हैं। भारत में नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक जीत के साथ दोबारा प्रधानमंत्री बने तो फिनलैंड में 34 वर्षीय सना मरीन दुनिया के इतिहास में सबसे युवा प्रधानमंत्री बनीं। दूसरी तरफ इजरायल में 2009 से प्रधानमंत्री पद पर सुशोभित बेंजामिन नेतन्याहू की इस साल विदाई हुई।

आर्थिक मोर्चे पर दुनिया के छोटे देश अमेरिका-चीन की लड़ाई में ऐसे पिसे कि 2020 में भी इससे उबरने में उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वर्ष 2018 में चीनी सामानों पर 50 अरब डॉलर से शुरू हुआ टैरिफ वॉर 2019 में 250 डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि इस लड़ाई में दोनों देशों को घाटा हुआ, लेकिन इससे दुनिया के स्टॉक मार्केट धड़ाम से गिरे।

दुनिया में अमन-शांति की दृष्टि से देखें तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड टं्रप और उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग की मुलाकात इस साल महत्वपूर्ण मानी गई। इस मुलाकात से पहले दोनों मुल्कों के बीच तनाव इस कदर था कि टं्रप उत्तर कोरिया को बम से उड़ाने की धमकी देते थे, तो उत्तर कोरिया भी अमेरिका को आगाह कराता रहता था कि वह उसके खिलाफ खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल कर देगा। अमेरिका और उत्तर कोरिया के साथ ही इस वर्ष ईरान और अमेरिका का तनाव चर्चाओं में रहा। इसके चलते कई बार खाड़ी में युद्ध के काले बादल भी मंडराते रहे। अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक के लिए उसके खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए और दूसरे राष्ट्रों को भी चेताया कि ईरान से व्यापारिक रिश्ते रखना उनके लिए नुकसानदायक सौदा होगा।

अमेरिका ने अपने एक विमानवाहक पोत हॉर्मूज की खाड़ी में तैनाती भी की जिसे ईरान की नाकाबंदी का एक कानूनी प्रयास कहा गया। राष्ट्रपति टं्रप निरंतर ईरान को भड़काने-उकसाने वाले बयान देते रहे कि यदि ईरान ने युद्ध छेड़ने का दुस्साहस किया तो सर्वशक्तिमान अमेरिका उसे नेस्तनाबूद कर देगा। इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री ने बड़े संयम से सिर्फ इतना कहा है कि जाने कितने आक्रमणकारी आए और गये, साम्राज्यों का उत्थान- पतन हुआ, पर ईरान की हस्ती बरकरार है।

रोहिंग्या मुस्लिमों के विरुद्ध म्यांमार की सैन्य कार्यवाही का मामला इस बार अंतरराष्ट्रीय अदालत ‘हेग’ में पहुंचा। म्यांमार की नेता आंग सान सू की अंतरराष्ट्रीय अदालत में अपने देश का पक्ष रखने के लिए पहुंची तो नोबेल विजेता सू की को कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी। म्यांमार में 2017 में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद से लाखों लोगों ने पड़ोसी देशों में शरण ली। म्यांमार की सरकार पर रोहिंग्या लोगों का पूरी तरह से सफाया करने के आरोप लग रहे हैं। सू की के साथ एक पूरा प्रतिनिधिमंडल द हेग की अदालत में पहुंचा।

अमेरिका में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन के बीच राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का दौर चला तो चीन के लिए वर्ष भर हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक चुनौती बने रहे। चीन के प्रत्यर्पण बिल के खिलाफ यहां की जनता ने सड़कों पर उतरकर ऐतिहासिक ‘अंब्रेला आंदोलन’ चलाया। स्थानीय पंचायत चुनावों में हांगकांग के प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत हुई। चीन की दमनकारी नीति के चलते लोकतंत्र समर्थकों ने आजादी की आवाज भी बुलंद की। एक तरफ चीन के लिए प्रत्यर्पण बिल चुनौती बना तो भारत सरकार के लिए नागरिकता संशोधन कानून। भारत में इस कानून के खिलाफ सड़कों पर हिंसक प्रदर्शन हुए।

जलवायु परिवर्तन पर सितंबर माह में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्वीडन की 16 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने अमेरिकी राष्ट्रपति टं्रप के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार करते हुए जताया कि दुनिया के सशक्त देशों की नीतियां पर्यावरण के पक्ष में नहीं हैं। इससे दुनिया की नई पीढी़ के जीवन के लिए चुनौती खड़ी हो जाएगी। एक तरफ ग्लोबल वार्मिंग की चिंता, तो दूसरी तरफ अमेजन के जंगलों में भयंकर आग लग गई। इन जंगलों से विश्व को 20 फीसदी ऑक्सीजन मिलती है। यही वजह है कि इन्हें ‘लंग्स ऑफ द प्लेनेट’ यानी ‘दुनिया का फेफड़ा भी कहा जाता है। ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में इन जंगलों का इतना महत्व है कि नासा ने अपने ट्विटर हैंडल से आग की भयावह तस्वीर शेयर की।

आतंकी हमलों ने इस वर्ष पूरी दुनिया को दहलाया। लेकिन दूसरी तरफ आतंक के खिलाफ कार्रवाई भी होती रही। जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले में 43 जवानों के हताहत होने पर भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में घुसकर सैन्य ठिकानों को सर्जिकल स्ट्राइक से ध्वस्त कर दिया। अमेरिका सेना ने आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के सरगना अबू बकर अल- बगदादी को मार गिराया। दुनिया में आतंक का पर्याय समझे जाने वाला खतरनाक संगठन तालिबान और अमेरिका इस वर्ष शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़े। साल के लगभग मध्य यानी अप्रैल महीने में श्रीलंका में हुए सीरियल बम धमाकों में 200 लोगों की जानें चली गई। इससे पहले 15 मार्च को न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में मस्जिदों में आतंकी हमले में 51 लोगों की मौत हो गई।

 

साल के बड़े घटनाक्रम

1. डोनाल्ड ट्रम्प पर महाभियोग

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड टं्रप पर महाभियोग का प्रस्ताव अमेरिकी संसद के निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) में 19 दिसंबर को बहुमत से पारित हुआ। टं्रप के खिलाफ यह प्रस्ताव 197 के मुकाबले 230 मतों से पास हुआ है।

2. अमेरिका ने ठप किया चीन का बाजार

अमेरिका ने अपने देश में व्यापार करने वाली 28 चीनी कंपनियों को भी ब्लॉक किया, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई।

3. छाई रहीं ग्रेटा थनवर्ग

23 सितंबर 2019 को जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनवर्ग ने दुनिया के नेताओं पर विश्वासघात का आरोप लगाया। टं्रप के खिलाफ उनके गुस्से की तस्वीर काफी वायरल हुई थी।

4 श्रीलंका चर्च और न्यूजीलैंड में आतंकी हमले

न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में 15 मार्च के दिन हुए आतंकवादी हमले में 51 से ज्यादा लोगों की जान गई। इसके बाद अप्रैल माह में श्रीलंका के चर्च में भी हुए एक के बाद एक बम धमकों से 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। आतंकी संगठन आईएसआईएस ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली थी।

5. प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की वापसी

ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन दोबारा प्रधानमंत्री बने।

6. हाउडी मोदी

अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इसमें मोदी ने 50 हजार भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया। इसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड टं्रप ने भी हिस्सा लिया था।

7. दुनिया की सबसे युवा ‘प्रधानमंत्री’

फिनलैंड में 34 वर्षीय सना मरीन दुनिया के इतिहास में सबसे युवा प्रधानमंत्री बनीं।

8. हांगकांग में विरोध

हांगकांग में चीन के संबंधित विधेयक के खिलाफ प्रचंड प्रदर्शन।

9. बगदादी का खात्मा

26 अक्टूबर 2019 को ‘क्रूर’ संगठन इस्लामिक स्टेट का सरगना बगदादी मारा गया।

10. नागरिकता कानून पर हिंसक प्रदर्शन

भारत में नए नागरिकता संशोधन कानून के बनने के बाद हिंसक विरोध-प्रदर्शन।

11. जनरल मुशर्रफ को देशद्रोह के मामले में मौत की सजा

पाकिस्तान के में 16 दिसंबर को पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को फांसी की सजा दी गई।

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