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विश्व युद्ध की ओर दुनिया

गाजा युद्ध के बीच हालिया 13 अप्रैल को ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए हमले के बाद से ही पूरे पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति और भी बढ़ गई है। देशों के बीच लगातार हो रहे युद्ध के बीच दुनिया सबसे बड़े भविष्वय कर्ता नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी को याद कर रही है। कहा जा रहा है कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर लगातार बढ़ रही है। इसका ताजा उदाहरण बीते हफ्ते ईरान द्वारा इजरायल पर हवाई हमला किया जाना है। इस हमले में मिसाइल अटैक के साथ करीब 300 से ज्यादा ड्रोन हमले किए गए जिनमें किलर ड्रोन से लेकर बैलिस्टिक मिसाइल और क्रूज मिसाइलें शामिल थी

रूस यूक्रेन, इजरायल-हमास, ईरान-इजरायल देशों के बीच जारी युद्धों से विश्व भर में तनाव की स्थिति बनी हुई है और इन युद्धों पर विराम लगने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। पिछले 6 महीने से जारी हमास-इजरायल युद्ध के बीच ईरान की ओर से भी इजरायल पर हमला हुआ है। इसी दौरान सीरिया, यमन और इराक की जमीन से भी इजरायल पर हमले हुए हैं। अमेरिका और ब्रिटेन इजरायल की मदद काफी समय से कर रहे हैं। ऐसे में अंदेशा लगाया जा रहा है कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है। इन देशों के जानकारों का मानना है कि यदि तीसरा विश्व युद्ध होता है तो दो पक्ष होंगे। एक पक्ष में नाटो होगा जिसमें अमेरिका, इजरायल और ब्रिटेन मुख्य रूप से होंगे। दूसरे पक्ष में रूस, चीन, ईरान, यमन और उत्तर कोरिया होंगे। सोशल मीडिया पर भी चिंता जाहिर करते हुए कई यूजर लिख रहे हैं कि ईरान और इजरायल की लड़ाई तीसरे विश्व युद्ध को भड़का सकती है। कई अन्य देशों के इस संघर्ष में कूद जाने का भी अंदेशा लगाया जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अवसर तलाश रहे हैं, कि जर्मनी, फ्रांस और पोलैंड जैसे देश इजरायल के साथ आ जाएंगे। गाजा युद्ध के बीच हालिया 13 अप्रैल को ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए हमले के बाद से ही पूरे पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति बढ़ गई है। देशों के बीच लगातार हो रहे युद्ध के बीच दुनिया सबसे बड़े भविष्वय कर्ता नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी को याद कर रही है। कहा जा रहा है कि दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की लगातार बढ़ रही है।

गौरतलब है कि 13 अप्रैल की आट्टाी रात को ईरान द्वारा इजरायल पर हवाई हमला किया गया। हवाई हमले में मिसाइल अटैक के साथ करीब 300 से ज्यादा ड्रोन हमले किए गए थे। जिनमें किलर ड्रोन से लेकर बैलिस्टिक मिसाइल और क्रूज मिसाइली शामिल थी। हालांकि इजरायल ने एरो एरियल डिफेंस सिस्टम के जरिए ईरान के 99 फीसदी हवाई हमलों को विफल कर दिया था। हमले के तुरंत बाद इजरायल सेना ने एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया था। इजरायली सेना आईडीएफ के प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हगारी ने कहा कि ईरान ने इजरायल पर सीट्टो हमला किया है। इस हमले बाद अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देश इजरायल की मदद को आगे आए थे।

इस हमले के बीच सवाल यह उठता है कि आखिर ईरान ने इजरायल पर हमला क्यों किया। दरअसल कुछ सप्ताह पहले एक अप्रैल को सीरिया में कथित तौर पर इजरायल द्वारा ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हमला किया गया था। उस हवाई हमले में एक वरिष्ठ ईरानी जनरल और उनके दो सहयोगी मारे गए थे। गौरतलब है कि हर मुश्किल घड़ी में साथ देने वाले अमेरिका से भी इजरायल ने उस दौरान इस हमले को लेकर कोई विचार विमर्श नहीं किया था। उस दौरान ईरान पर किए गए हमले के पीछे इजरायल ने अपना तर्क देते हुए कहा कि राजनयिक परिसर में सेना के अफसर मौजूद थे, ऐसे में वहां हमला करना गलत नहीं था। इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए उस हमले से ही साफ हो गया था कि ईरान इसका जवाब देगा। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने सीट्टो बयान जारी किया था। ईरान ने सीट्टो तौर पर इजरायल को हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया था। यही वजह है कि जवाबी हमले के तौर पर उसने 13 अप्रैल की आट्टाी रात को इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले किए और इस कार्रवाई को ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस का नाम दिया। ईरान के कहने अनुसार उसने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस’ यह नाम इसलिए दिया है ताकि वो अपने दोस्तों और दुश्मनों को बता सके कि वो जो भी कहता है उस पर अमल करता है। वो सच्चा वादा करना जानता है, जो वादा करता है उसे निभाता है। मीडिया रिपोर्ट्स अनुसार इजरायल जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार है और ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बना सकता है। ईरानी हमले का जवाब देने के लिए इजरायली प्रट्टाानमंत्री नेतन्याहू ने पिछले साल हमास हमले के बाद इजरायल में बने वॉर कैबिनेट की बैठक में ईरान पर हमले किए जाने की योजना पर चर्चा की है। ईरान के नतांज, इस्फहान, अराक, फोरहदो और बुस्हर जैसे कई प्रमुख परमाणु ठिकाने इजरायल के निशाने पर हैं।

क्या है इजरायल की कैबिनेट वॉर
पिछले साल हमास के हमले के बाद इजरायल में ‘यूनिटी गवर्नमेंट’ बनी थी। इसमें विपक्षी नेता भी शामिल थे। इस सरकार के गठन की अहम शर्तों में से एक ‘वॉर कैबिनेट’ बनाने की शर्त भी थी। इस कैबिनेट का उदेश्य गाजा में हमास के खिलाफ जंग की रणनीति तैयार करना थी। हालांकि इजरायली संविट्टाान में अभी ऐसा कोई कानून नहीं है, जो वॉर कैबिनेट के अट्टिाकारों को परिभाषित करता हो, लेकिन इसके बावजूद वॉर कैबिनेट काफी अहम है। यही तय करती है कि हमला कब और कैसे होगा। वॉर कैबिनेट में तीन सदस्य अहम हैं। इनमें प्रट्टाानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, रक्षा मंत्री योआव गैलांट, विपक्षी पार्टी के नेता बैनी गैंट्ज हैं। इनके अलावा गैडी आईसेनकोट और रॉन डर्मर को बतौर ऑब्जर्वर शामिल किया गया है। लेकिन बाकी मंत्री और सेना से जुड़े अहम लोग भी वॉर कैबिनेट की बैठक में हिस्सा लेते हैं।

ईरान के परमाणु ठिकानों पर इजरायल के संभावित हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने चिंता जाहिर की है। हालांकि ईरान ने एहतियात के तौर पर परमाणु इकाइयों को बंद कर दिया था। लेकिन 15 अप्रैल से इन्हें दोबारा शुरू कर दिया गया है। आईएईए ने कहा है कि वो लगातार ईरानी परमाणु केंद्रों पर नजर बनाए हुए हैं। इजरायली प्रट्टाानमंत्री नेतन्याहू ने अपने वॉर कैबिनेट की दूसरी बार बैठक में कहा कि ईरान के हवाई हमले का मुहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इसके अलावा इजरायली राजदूत गिलाद एर्दान ने भी कहा कि ‘ईरान ने सभी सीमाएं लांघ दी है और इजरायल के पास पूरा हक है कि वह इसका जवाब दे। हम सिर्फ शोर-शराबा मचाने वाले देश नहीं हैं, हम साहसी हैं। इजरायल पर इस तरह का सीट्टाा हमला होने के बाद हम चुप नहीं बैठेंगे, हम अपने भविष्य को बचाएंगे।’ इजरायल के विपक्षी दल के नेता और वॉर कैबिनेट के सदस्य बेनी गैंट्ज ने जोर देते हुए कहा है कि उनके पश्चिमी सहयोगी देश उनके साथ खड़े हैं, इजराइल ही नहीं, पूरी दुनिया ईरान के खिलाफ है। यह एक रणनीतिक उपलब्ट्टिा है और इसे हमें इस्तेमाल करना होगा।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि वो इजरायल की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिकी समाचार पोर्टल ‘एक्सिऑस’ ने व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अट्टिाकारी के हवाले से बताया कि बाइडेन ने ईरान के हमले को विफल करने के लिए इजरायल, अमेरिका तथा अन्य देशों के सम्मिलित प्रयासों की सराहना करते हुए नेतन्याहू से कहा, ‘आपकी जीत हुई है, जीत को स्वीकार कीजिये। हालांकि अमेरिका इजरायल के जवाबी हमले का विरोट्टा करता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बाइडन ने नेतन्याहू से कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रमक ऑपरेशन में शामिल नहीं होगा और न ही ऐसे किसी ऑपरेशन का समर्थन करेगा, इसपर नेतन्याहू ने कहा कि वह उनकी बात समझ गये हैं। सीएनएन की एक रिपोर्ट में भी अमेरिकी अट्टिाकारियों ने दावा किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इजरायली प्रट्टाानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से स्पष्ट कहा है कि वाशिंगटन ईरान के खिलाफ इजरायल के किसी भी जवाबी हमले का विरोट्टा करेगा।

इजरायल-हमास युद्ध
ईरान के अलावा इजरायल का युद्ध हमास के साथ गाजा पट्टी को लेकर भी है। पिछले 6 महीने से चल रहे इजरायल और हमास युद्ध ने गाजा में भारी तबाही मचाई हुई है। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के लड़ाकों ने इजरायल पर हवाई और जमीनी हमला किया था। इसके बाद इजरायल ने हमास के खिलाफ ऐसी जंग शुरू की, कि गाजा का एक हिस्सा जैसे कब्रिस्तान बन गया हो। युद्ध में लंबे समय तक बंट्टाक संकट के साथ घटनाओं में विनाशकारी मोड़ देखा गया है। युद्ध विराम पर बातचीत करने और बंट्टाकों की रिहाई सुनिश्चित करने की अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद हमास ने अभी तक सभी बंट्टाकों को रिहा नहीं किया है। हालांकि बीचे में कतर के मट्टयस्थता की वजह से इजरायल और हमास के बीच 21 नवंबर को चार दिनों के युद्धविराम पर करार हुआ था। यह युद्ध विराम एक हफ्ते तक लागू भी रहा और तब 105 बंट्टाक रिहा किए गए थे। इसके बदले इजरायल द्वारा 300 से ज्यादा फिलिस्तीनी नागरिकों को रिहा किया गया। 1 दिसंबर को युद्धविराम समाप्त होते ही इजरायली सेना ने बमबारी शुरू कर दी। अब हमास और इजरायल के बीच युद्ध विराम के कोई आसार नहीं दिख रहे हैं।

जारी रहेगा हमास और इजरायल का युद्ध

ईरान-इजरायल जंग के बीच हमास ने युद्धविराम के इजरायली प्रस्ताव को खारिज करने के बाद अब नई मांगे रखी हैं। हमास ने मट्टयस्थों के सामने युद्ध विराम और बंट्टाकों की रिहाई का समझौता प्रस्तुत करते हुए मांग की है कि इजरायल 7 अक्टूबर से उसके यानी हमास संगठन द्वारा रखे गए 129 बंट्टाकों में से किसी को भी प्राप्त करने से पहले छह सप्ताह के युद्ध विराम का पालन करे। हमास ने यह प्रस्ताव 13 अप्रैल को सामने रखा। द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट

मुताबिक प्रस्ताव में हमास ने इजरायल रक्षा बल
(आईडीएफ) पर एक शर्त रखी कि उसे गाजा में सभी लड़ाई बंद करनी होगी और छह सप्ताह के लिए शहरी क्षेत्रों से पीछे हटना होगा, जिससे विस्थापित फिलिस्तीनियों को उत्तर में लौटने की अनुमति मिल सके। इसमें कहा गया है कि छह सप्ताह की समाप्ति के बाद ही किसी भी बंट्टाक को रिहा किया जाएगा। हमास के मसौदे में कहा गया है कि प्रत्येक इजरायली नागरिक के लिए 30 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाएगा, जो कि नवंबर के सप्ताह भर के संघर्ष विराम के 3.1 अनुपात से भारी वृद्धि है। इसमें यह भी मांग की गई कि प्रत्येक बंदी सैनिक के बदले 50 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाए, जिनमें से 30 आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। गौरतलब है कि इजरायल ने पहले भी इसी तरह की मांगों को ‘भ्रमपूर्ण’ कहकर खारिज कर दिया था। इससे पहले भी हमास ने फिलिस्तीनी कैदियों की संख्या, साथ ही उनके अपराट्टाों की गंभीरता की मांग की थी, जो पिछले कई दौर की वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध

अमेरिका इजरायल के साथ ही नहीं, बल्कि रूस -यूक्रेन युद्ध में वह रूस के खिलाफ जाकर यूक्रेन की भी मदद कर रहा है। अमेरिका ने फरवरी 2022 के अंत से यूक्रेन को 23 बिलियन डॉलर की बजट सहायता दी थी। यूक्रेन के वित्त मंत्री सेरही मार्चेंको ने कहा कि 24 फरवरी, 2022 से संयुक्त राज्य अमेरिका से मिली बजट सहायता लगभग 23 बिलियन डॉलर है। रूस यूक्रेन युद्ध अपने तीसरे साल में पहुंच चुका है और इस युद्ध के थमने के आसार दूर -दूर तक नहीं दिख रहे हैं। इस जंग की शुरुआत साल 2022 में 24 फरवरी से, यूक्रेन पर रूस द्वारा किऐ गए हमले से हुई थी। इस युद्ध से दोनों ही मुल्कों के हजारों सैनिकों की जान चुकी है। बीबीसी की एक रिपोर्ट अनुसार युद्ध में यूक्रेन के करीब 31 हजार सैनिक मारे गए हैं, हालांकि वास्तविक ट्टारातल पर ये आकड़े इससे ज्यादा भी हो सकते हैं। एक महीने पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा था कि रूस के आक्रमण के कारण अब तक 31 हजार यूक्रेनी सैनिक मारे गए हैं। वहीं यूक्रेनी राष्ट्रपति के मुताबिक यूक्रेन के जिन स्थानों पर रूस ने कब्जा किया है , वहां हजारों नागरिकों की जान गई है।

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