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पुरुषों के मुकाबले ज्यादा आक्रामक होती महिलाएं

पिछले कुछ समय से पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को आक्रामक व्यवहार के लिए ज्यादा जिम्मेदार बताया जा रहा है।  विश्व स्तर पर काम करने वाली संस्था ‘गैपल’ के द्वारा दस साल के आंकड़ों की रिपोर्ट के अनुसार  बीते दस सालों में महिलाओं में अत्यधिक क्रोध देखा गया है। महिलाओं के बढ़ते आक्रोश में सकारात्मक पहलुओं को अधिक देखा गया है। दरअसल, ‘गैपल वर्ल्ड पोल’ संस्था के द्वारा दुनियाभर में हर साल एक सर्वे करती है जिसमें  हर साल महिलाओं में बढ़ताते आक्रोश के आंकड़े दिए जाते हैं और आक्रोशित महिलाओं से संपर्क कर उनके बढ़ते आक्रोश के बारे में पूरी काउंसलिंग की जाती है। इन आंकड़ों में देखा गया है कि  साल-दर-साल महिलाओं में लगातार गुस्सा बढ़ता जा रहा है। और यह आक्रोश असहिष्णुता के मामलों को अंजाम भी दे रही हैं। 

 

इस सर्वे में हर साल 150 देशों में एक लाख 20 हज़ार लोगों का सर्वे किया जाता है और उनके जीवन के अलग-अलग इमोशन्स और एक्सपेरिएन्सेस रिकॉर्ड किया जाता है। जिसके ज़रिये वह दुनिया भर के लोगों में अलग-अलग उम्र, वर्ग के लोगों से उनके सभी इमोशंस को लेकर सवाल किये जाते हैं।  इसी के आधार पर यह रिपोर्ट्स तैयार की जाती हैं। इस सर्वे के दौरान ये पता चला कि गुस्सा, उदासी, अवसाद और घबराहट जैसे नकारात्मक एहसासों को पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं ने ज़्यादा महसूस किया है। जिसके रिएक्शन भी अलग-अलग तरह से निकलते है।

सर्वे के विश्लेषण में पाया  गया है कि 2012 के बाद  उदासी और घबराहट जैसे भाव पुरुष ने भी ज़्यादा महसूस किये हैं, लेकिन महिलाओं में इस तरह की भावनाएं ज्यादा देखी गई हैं। जहां तक गुस्से और अवसाद का सवाल है, इस मामले में महिलाओं और पुरुषों के एहसास के बीच का अंतर ज़्यादा बढ़ा है। 2012 में जारी की गई रिपोर्ट में पुरुष और महिलाओं के गुस्से और अवसाद का शिकार होने के मामले एक समान थे, लेकिन 2012, के बाद हर साल महिलाओं में अवसाद, और गुस्सा अधिक देखा जा रहा है। ऐसे में माना  जा रहा है कि आने वाले समय में  महिलाओं में आक्रोश चरम पर देखा जा सकता है । सर्वे के अनुसार  कोरोना के बाद महिलाओं में आक्रोश अधिक देखा गया है जिसके अलग-अलग कारण बताएं गए हैं।

सर्वे के दौरान तहाशा नाम की महिला अपने किचन में खड़ी थीं। तभी अचानक वो किसी बात पर ज़ोर से चीख पड़ीं। ये सुनकर तहाशा खुद भी हैरान रह गईं। तहाशा बताती हैं “गुस्सा एक सहज भाव है जो मुझे भी अक्सर आता है। लेकिन उस दिन जो गुस्सा मैंने महसूस किया, वैसा पहले कभी नहीं किया था। वह कोरोना महामारी के भयावह दिन थे, इसकी वजह से बुरी तरह परेशान थीं। वह अपने अंदर बदलाव महसूस कर रही थी। उस दिन पिछले 20 मिनट से वो अपने घर के बाहर चहल कदमी कर रही थीं, ये सोचते हुए कि आख़िर उनका गुस्सा किन-किन चीज़ों की वजह से बढ़ रहा है। लेकिन उस दिन गुस्से से चीख कर वह खुद को काफी राहत महसूस कर रही थीं, उन्हें ऐसा लगा जैसे उनके अंदर भरा भारी दर्द निकल गया हो।


तहाशा एक हिप्नोथेरेपिस्ट (सम्मोहन चिकित्सक) और ‘लाइफ कोच’ हैं। वो लोगों को बेहतर जीवन जीने के सलीक़े सिखाती हैं। उस घटना के बाद वो दुनिया भर की महिलाओं से उनके आक्रोश की कहानियां सुनने और उन्हें मोटिवेट करने के लिए उनसे मिलते हैं, बात-चीत करती हैं, और उन्हें अपने इमोशंस को किस तरह निकालना है उसके बारे में भी बताती हैं। 
 

इसी तरह अमेरिका की रहने वाली सारा हरमन चिकित्सक हैं। 2021 की शुरुआत में इन्होंने अपनी महिला मरीजों का एक ग्रुप बनाया जिनके साथ फ़ील्ड में खड़ी होकर वो ज़ोर से चीख़ती हैं। सारा कहती हैं, “मैं दो छोटे बच्चों की मां हूं, वर्क फ्रॉम होम’ करते हुए मैंने महसूस किया कि मेरे अंदर गहरी निराशा और रोष लगातार बढ़ रहा है।” इसके एक साल बाद वे  अपने ग्रुप के साथ फ़ील्ड में थीं। इसी दौरान उनकी चीख़ का एक वीडियो वायरल हो गया, सारा बताती हैं “वो वीडियो एक जर्नलिस्ट ने अपनी मां के ऑनलाइन ग्रुप से उठाया था। उस वीडियो के वायरल होने के बाद मेरे फोन पर दुनिया भर से लोगों के फोन आने लगे, और दुनिया भर की महिलाएं इनसे जुड़ने लगी।

2020 में ‘इंग्लैंड के ‘इंस्टिट्यूट ऑफ़ फिस्कल स्टडीज’ के एक सर्वे के मुताबिक  5000 दंपतियों पर कराए गए सर्वे में ये सामने आया कि लॉकडाउन के दौरान घरेलू काम-काज का जिम्मा पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं ने ज्यादा उठाया। इसकी वजह से उनके दफ्तर के काम के घंटे भी कम हुए जिस कारण वह घरेलू परेशानियों में अधिक शामिल हुई हैं। ऐसा उन महिलाओं के साथ भी हुआ जो अपने पतियों समेत पूरे परिवार में सबसे ज़्यादा सैलरी पाती थीं।


सर्वे में ऐसे कई देश हैं जहां महिलाओं का गुस्सा पुरुषों के मुकाबले ग्लोबल एवरेज से ज्यादा है। सबसे ज़्यादा ये कंबोडिया में पाया गया है। जो ग्लोबल एवरेज से 17 फीसदी ज्यादा है। जबकि पाकिस्तान और भारत में ये 12 फीसदी ज्यादा है । महिलाओं में बढ़ते गुस्से को लेकर मनोचिकिस्तक डॉक्टर लक्ष्मी विजय कुमार का कहना है कि इसकी सबसे 
 बड़ी वजह तनाव और गुस्सा है।  इन देशों में महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के स्तर का बढ़ना भी इसके मुख्य कारण  हैं। बढ़ती आत्मनिर्भरता के साथ महिलाएं पुरातन और पितृसत्तात्मक संस्कृति होने की वजह से तमाम पाबंदियों का भी सामना करती हैं। घर के अंदर पितृसत्तात्मक व्यवस्था और घर के बाहर का मुक्त माहौल, इन दोनों के बीच अंतर बड़ा होने की वजह से महिलाओं में गुस्सा ज्यादा बढ़ता है।”

सर्वेक्षण का तरीका
‘गैपल’   हर साल 150 देशों में एक लाख 20 हज़ार लोगों से बातचीत करता है। जो दुनिया की 98 फीसदी  से ज़्यादा वयस्क आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। हर देश से इनका चुनाव रैंडम तरीके से किया जाता है। सावंता कॉमरेज ने 18 साल से ज़्यादा उम्र की 15 हजार 723 महिलाओं को ऑनलाइन सर्वे में शामिल किया था।  इसमें से 1 हजार 67 मिस्र , 1 हजार 22 केन्या , 1 हजार 18 नाइजीरिया , 1 हजार 109 मेक्सिको , 1 हजार 42 अमेरिका , 1 हजार 8 ब्राज़ील , 1 हजार 25 चीन , 1 हजार 107 भारत , 1 हजार 61 इंडोनेशिया , 1 हजार 06 पाकिस्तान , 110 रूस , 1 हजार 160 तुर्की , 1 हजार 67 ब्रिटेन  और 1 हजार 09 यूक्रेन से थीं। 

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