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सऊदी में बदलाव की बयार

सऊदी अरब की गिनती दुनिया के सबसे कट्टरपंथी देशों में होती है, जहां महिलाओं पर कई पाबंदियां हैं। उन पर अभी भी सदियों पुराने कड़े नियम- कानून लागू हैं। रूढ़िवादिता के कारण उनकी स्थिति अच्छी नहीं है। लेकिन अब यह देश समय के साथ अपनी सोच में बदलाव लाने को विवश है। यहां के शासक महसूस करने लगे हैं कि आर्थिक मोर्चे पर दुनिया में अपनी साख बरकरार रखनी है, तो रुढ़िवादिता को छोड़ना ही होगा। महिलाओं को उनके अधिकार देने ही होंगे।

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सत्ता में आने के बाद से सऊदी अरब में महिलाओं को कई अधिकार देते हुए लगातार कड़े नियम टूट रहे हैं। साल 2017 से सऊदी अरब में महिलाओं के हितों के लिए कई अहम फैसले लिये जा रहे हैं। प्रिंस सलमान की आधुनिक सोच के चलते अब सख्त नियमों में शिथिलता प्रदान की जा रही है। इसी कड़ी में विदेशी पुरुषों और महिलाओं को होटल का कमरा किराए पर लेने की अनुमति दे दी गई है। अब तक महिला एवं पुरुष पर्यटकों को कमरा लेने से पहले साबित करना पड़ता था कि वे साथ हैं। रूढ़िवादी मुस्लिम देश ने हाल ही में पर्यटक वीजा देने की व्यवस्था शुरू की है। उसके बाद ही ये फैसला लिया गया है। खास बात यह है कि ये अनुमति सिर्फ बाहरी मुल्कों के महिला और पुरुषों को नहीं दी गई है, बल्कि इससे सऊदी अरब की महिलाएं भी अब पर्यटन के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगी। सऊदी पर्यटन आयोग और राष्ट्रीय विरासत की ओर से अरबी भाषा के समाचार पत्र ‘ओकाज’ के माध्यम से बताया गया कि सभी सऊदी नागरिकों को होटलों में चैक- इन करने से पहले परिवार की आईडी या रिश्ते का प्रूफ दिखाने के लिए कहा जाता था, लेकिन विदेशी पर्यटकों के लिए अब यह आवश्यक नहीं है। साथ ही कहा गया है कि सभी सऊदी महिलाएं अकेले होटलों में बुकिंग कर सकती हैं और चेक-इन के वक्त आईडी प्रदान कर सकती हैं।

इस ऐतिहासिक फैसले से पहले महिलाओं को स्थाई रूप से नाबालिग समझा जाता था। उनके सरंक्षकों यानी पति, पिता और अन्य पुरुष संबंधियों का उन पर मनमाना अधिकार था। सऊदी महिलाओं को अकेले विदेश यात्रा करने की इजाजत नहीं थी। इस नियम की पिछले वर्ष विश्व जगत में काफी निंदा हुई थी। इसके बाद सऊदी सरकार ने महिलाओं के हक में यह सुधारात्मक कदम उठाया था और एक अगस्त को कहा था कि महिलाएं किसी संरक्षक की इजाजत के बिना विदेश यात्रा पर जा सकेंगी। इस घोषणा के 20 दिन बाद 21 अगस्त 2019 को यह नियम अमल में आ गया था।

सऊदी अरब में शरीयत कानून लागू होने के कारण यह दुनिया का ऐसा अकेला देश था, जहां महिलाओं को गाड़ी चलाने की भी मनाही थी, परंतु साल 2018 को 24 जून को यहां महिलाओं को गाड़ी चलाने की भी अनुमति देने का फैसला लिया गया। अब सऊदी अरब ने विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के मकसद से नया वीजा प्रोग्राम लॉन्च किया है। इस नए फैसले के जरिए इस देश के बदलते रुख की झलक देखने को मिली है। इस नए वीजा प्रोग्राम से पहले सऊदी अरब में एक कमरे में पुरुष और महिला साथ में नहीं रुक सकते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब सऊदी अरब ने 49 देशों के पर्यटकों को वीजा देने की पेशकश कर दी है। सरकार ने तेल आयात पर निर्भर अपनी अर्थव्यवस्था में उछाल लाने के लिए ये फैसला लिया है।

धीरे-धीरे ही सही, लेकिन सऊदी अरब में महिलाओं को पुरुषों जैसे अधिकार मिलने लगे हैं। फिर भी वहां महिलाओं पर कुछ पाबंदियां अब भी लागू हैं, मसलन वे पुरुष की अनुमति के बिना विवाह नहीं कर सकतीं। परिवार के अलावा किसी भी पुरुष से मिल-जुल नहीं सकती हैं।

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