world

क्या यूरोपीय यूनियन से अलग होगा ब्रिटेन ?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को ब्रेग्जिट को लेकर अपने ही घर में झटका लगा है। उनके छोटे भाई जो जॉनसन ने कैबिनेट के सदस्य और कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद के तौर पर इस्तीफा दे दिया है । व्यापार मंत्री और ओर्पिंगटन से संसद के सदस्य ने कहा कि ‘परिवार के प्रति निष्ठा और राष्ट्रीय हित के बीच खुद को फंसा हुआ महसूस कर रहा था।’ इस वजह से उन्होंने मजबूरन यह कदम उठाया। जो जॉनसन का इस्तीफा इस बात का संकेत देता है कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ में सदस्यता को लेकर किस कदर बंटा हुआ है। उन्होंने ट्विटर पर जारी बयान में कहा, ‘हाल के हफ्तों में मैं परिवार के प्रति निष्ठा और राष्ट्रीय हित के बीच फंसा हुआ महसूस करा रहा था। इस तनाव का कोई हल नहीं था और यही सही समय है कि अन्य लोग सांसद और मंत्री की मेरी भूमिका को ग्रहण करें। जो जॉनसन ने कहा कि नौ साल तक ओर्पिंगटन का प्रतिनिधित्व करना तथा तीन प्रधानमंत्रियों के तहत मंत्री बनाना सम्मान की बात है। उन्होंने 2016 में ब्रेग्जिट में रहने के लिए मतदान किया था जबकि उनके भाई ने ब्रेग्जिट से अलग होने के लिए अभियान की सह अगुवाई की थी। जो जॉनसन को ब्रिटेन में भारत के प्रति मित्रवत रूझान रखने वाले राजनेता के तौर पर देखा जाता है। वह ‘द फाइनेंशल टाइम्स’ के पत्रकार के तौर पर भारत में भी रह चुके हैं।

मौजूदा समय में ब्रिटेन में  ब्रेक्सिट मुद्दे को लेकर काफी राजनीतिक उथल पुथल का दौर जारी है तो वही  ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को 3 अगस्त को एक बड़ा झटका लगा था , जब उनकी ही पार्टी द्वारा विद्रोही सांसदों ने विपक्षी सांसदों के साथ सम्मिलित हो कर उन्हें एक महत्वपूर्ण मतदान में हरा दिया गया। दरअसल ,ब्रेक्सिट मुद्दे पर एक प्रस्ताव पर हुई वोटिंग में उन्हें 301 सांसदों का समर्थन मिला जबकि 328 सांसदों ने उनका विरोध किया।  इस पर बोरिस जॉनसन का कहना है कि डील हो या न हो, 31 अक्टूबर तक ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर ये समयसीमा बढ़ाने के लिए उन्हें विवश किया गया तो देश को आम चुनावों की ओर बढ़ना बढ़ना पड़ सकता है। इससे पहले ब्रेक्सिट प्रस्ताव पर कई बार हार का सामना करने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री टेरीसा द्वारा मई में इस्तीफ़ा दे दिया था। इसके बाद ही बोरिस जॉनसन प्रधानमंत्री बने थे। मौजूदा समय में ब्रिटेन में हो रही सारी उथल-पुथल इस मसले को लेकर जारी है कि 31 अक्टूबर को यूरोपीय संघ से ब्रिटेन अलग हो जायेगा। हालांकि जॉनसन ने यूरोपीय संघ से इस मुद्दे पर ज़्यादा समय की मांग नहीं की है पर उन्होंने जल्दी चुनाव कराने की बात ज़रूर कर दी है। और अब 4 अगस्त को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने समय से पहले चुनाव करवाने की बात कही है। प्रधानमंत्री का कहना है कि वो ब्रसेल्स में होने वाले यूरोपीय संघ के सम्मेलन से दो दिन पहले 15 अक्टूबर को चुनाव करवाना चाहते है।

 क़ानूनी तौर पर ब्रिटेन में पाँच साल बाद ही अगले चुनाव करवाए जाते हैं और इस आधार पर 2022 से पहले चुनाव नहीं होने चाहिए। माना जा रहा है कि मध्यावधि चुनाव करवाने के अपने ख़तरे हैं लेकिन बोरिस जॉनसन इसके ज़रिए कंज़र्वेटिव पार्टी के लिए अधिक सीटें सुनिश्चित कर सकते हैं। ऐसा कर के वो यूरोपीय संघ से अगल होने से जुड़े नए क़ानून आसानी से पास करा सकेंगे। फिक्स्ड टर्म पार्लियामेंट्स ऐक्ट के तहत प्रस्ताव पास कराने पर चुनाव की तारीख़ तय करने का फ़ैसला प्रधानमंत्री के हाथों में होता है। इससे पहले जब साल 2017 में पूर्व प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने मध्यावधि चुनाव का प्रस्ताव पेश किया था तो जिस प्रस्ताव पर सासंदों ने मतदान किय था उसमें मात्र ये लिखा था कि “जल्द आम चुनाव करवाए जाने चाहिए।” लेकिन इसकी कोई ख़ास तारीख़ नहीं दी गई थी।  लेकिन बोरिस जॉनसन का कहना है कि वो एक ख़ास तारीख 15 अक्टूबर को चुनाव करवाना चाहते हैं। कुछ सांसदों का मानना है कि सरकार चुनाव की तारीख़ बदल सकती है और 31 अक्टूबर के बाद भी चुनाव करवा सकती है और इस तारीख़ तक ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर जा चुका होगा।

क्योंकि इससे पहले भी 1975 में एक बार जनमत संग्रह में लोगों ने यूरोपीय संग में रहने के पक्ष में समर्थन दिया था। तब ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग इसलिए होना चाहता था क्योंकि साल 2008 में ग्रेट ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ गई थी। देश में बेरोजगारी बढ़ गई थी। और इसकी वजह से एक बहस ने जन्म लिया कि क्या ब्रिटेन को यूरोपियन यूनियन से अलग हो जाना चाहिए? इस मांग को 2015 में ब्रिटेन में हुए आम चुनावों में यूनाइटेड किंगडम इंडिपेंडेंस पार्टी (यूकेआईपी) ने उठाया था। इस धड़े का मानना था कि अगर ब्रिटेन यूरोपियन यूनियन से अलग हो जाता है तो देश की सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी।

बोरिस जॉनसन इस वादे के साथ ही प्रधानमंत्री बने थे कि अगर 31 अक्टूबर तक ब्रेक्जिट पर समझौता नहीं हुआ तो भी ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा, जबकि विरोधी चाहते हैं कि यह समयसीमा बढ़ायी जाए। लेकिन अब यह मुद्दा क्या मोड़ लेगा इस पर सारी दुनिया की नज़रे टिकी हुई है।

You may also like