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ईरान की इकलौती महिला ओलंपिक पदक विजेता ने क्यों छोड़ा देश?

ईरान की इकलौती महिला ओलंपिक पदक विजेता ने क्यों छोड़ा देश?

ईरान और अमेरिका के बीच लगातार तनाव बढ़ गया है वहीं दूसरी ओर ईरान की इकलौती महिला ओलंपिक पदक विजेता खिलाड़ी ने देश छोड़ने का फैसला किया है। किमिया अलीजादेह ने कहा है कि ईरान में वो पाखंड, झूठ, अन्याय और चापलूसी का हिस्सा नहीं बनना चाहती हैं इसलिए वो ईरान को छोड़ रही हैं।

21 साल की किमिया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मैं ईरान की लाखों सताई गई महिलाओं में से एक हूं जो सालों तक देश के लिए खेलती रही हूं। अधिकारियों ने जो भी कहा मैं उसे मानती रही। हर आदेश का पालन किया है। लेकिन उनके लिए हममें से कोई भी अहमियत नहीं रखता। हम उनके लिए केवल इस्तेमाल होने वाले हथियार भर हैं।”

इसके अलावा किमिया लिखा, “सरकार उनकी कामयाबी को राजनीतिक तौर पर भुनाती रही। अधिकारी हमारा अपमान करते करती है। अधिकारी कमेंट करते थे कि किसी महिला के लिए अपने पैरों को स्ट्रेच करना पुण्य का काम नहीं है।”

10 जनवरी को किमिया ने ईरान छोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने नीदरलैंड में शरण ली है। वहीं से ओलंपिक की तैयारी में जुटी हैं। उन्होंने देश छोड़ने के बाद अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) से अनुरोध किया है कि वो उन्हें ओलंपिक झंडे के नीचे टोक्यो में खेलने की अनुमति दें।

ईरान की इकलौती महिला ओलंपिक पदक विजेता ने क्यों छोड़ा देश?

साथ ही किमिया ने ईरान की मौजूदा सरकार और धार्मिक कट्टरपंथियों पर भी जमकर हमला भी बोला। किमिया ने लिखा, “मैं उनके (सरकार) लिए मायने नहीं रखती थी। असल में ईरान की कोई महिला उनके लिए मायने नहीं रखती। हम उनके लिए साधन थे क्योंकि इसी सरकार ने मेडल जीतने के बाद यहां तक कहा था कि पैर फैलाना महिलाओं को शोभा नहीं देता।”

किमिया ने लिखा, “मैं देश में बढ़ रहे झूठ, पाखंड और अन्याय का हिस्सा नहीं बनना चाहती। मैं एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन चाहती हूं। इसीलिए मैंने यह फैसला किया है। लेकिन मैं जहां भी रहूंगी, ईरान की बेटी कहलाऊंगी।”

अपने ट्विटर हैंडल पर किमिया ने लिखा, “मैं वहां गई जहां लोगों ने चाहा। मैंने वही पहना जो उन्होंने कहा। मुझे जो भी कहा गया, मैंने किया। जहां मौका मिला, वहां मेरा शोषण किया गया लेकिन अब मैं यह सब बर्दाश्त नहीं कर सकती।” इस मामले पर ईरानी संसद के सदस्य अब्दुल करीम हैसेनजादेह ने कहा है कि मौजूदा सरकार की नीतियों के कारण मानव संसाधन देश छोड़कर जा रहा है।

किमिया ईरानी और अजरबैजानी माता-पिता की पढ़ी-लिखी संतान हैं। किमिया ने 2016 के रियो ओलंपिक में ताइक्वांडो में 57 किग्रा वर्ग का कांस्य पदक जीता था। ऐसा नहीं है कि यह किमिया की पहली सफलता थी। उससे पहले साल 2014 में यूथ ओलंपिक में 63 किग्रा वर्ग का स्वर्ण पदक जीता था।

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उसके बाद 2015 में उन्होंने विश्व चैम्पियनशिप में 57 किग्रा में कांस्य और फिर 2017 में विश्व चैम्पियनशिप में रजत जीता था। इन सबके अलावा किमिया ने 2018 के एशियाई चैम्पियनशिप में 62 किग्रा वर्ग में कांस्य जीता था। लेकिन रियो की सफलता किमिया के लिए खास थी। क्योंकि वह ईरान के लिए ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली महिला एथलीट बनी थीं।

यह पहला मौका नहीं है जब ईरान का कोई खिलाड़ी देश छोड़ गया है। इससे पहले भी कई ईरानी खिलाड़ी या तो देश छोड़कर कहीं और चले गए या फिर उन्होंने खेलना बंद कर दिया। सितम्बर 2019 में जूडो के विश्व चैम्पियन सैयद मोलाई ने जर्मनी में शरण ली थी।

दिसम्बर में ईरान की टॉप रैंक्ड शतरंज चैम्पियन अलीरेजा फिरौजा ने ईरान के लिए खेलना छोड़ दिया। इसी तरह ईरान के इंटरनेशनल रेफरी अलीरेजा फाघानी ने 2019 में आस्ट्रेलिया की शरण ली। ओलंपिक की तैयारियों के बहाने किमिया नीदरलैंड गई थीं। फिर दो दिन बाद ही उन्होंने स्वदेश कभी नहीं लौटने की घोषणा की।

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