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इधर कुआं, उधर खाई

एक तरफ इजराइल-हमास युद्ध को तत्काल रोके जाने की बाबत संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक प्रस्ताव पारित किया है और इजरायल के मित्र राष्ट्र अमेरिका ने इस युद्ध को तत्काल रोके जाने का दबाव नेतन्याहू पर बनाना शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नेतन्याहू की वॉर कैबिनेट में शामिल गठबंधन के नेताओं ने युद्ध रोके जाने का खुलकर विरोध कर यह धमकी दी है कि यदि नेतन्याहू युद्ध विराम की तरफ कदम बढ़ाते हैं तो गठबंधन टूट जाएगा और सरकार गिर जाएगी

करीब नौ महीनों से जारी हमास-इजरायल के बीच खूनी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। इस युद्ध में दोनों देशों के अब तक करीब पचास हजार लोगों की जान जा चुकी है, वहीं लगभग एक लाख से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबरें हैं। जबकि गाजा के करीब 80 फीसदी लोग बेघर हो गए हैं। इस बीच जंग रोकने के लिए अमेरिका द्वारा पेश प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पास हो गया है। इस प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग में शामिल 15 में से 14 देशों ने इसके पक्ष में वोट डाला, जबकि वीटो पावर रखने वाले रूस ने प्रस्ताव से दूरी बनाई रखी। वहीं दूसरी तरफ इजराइल की नेतन्याहू सरकार को बड़ा झटका लगा है। खबर है कि नेतन्याहू की 3 सदस्यों वाली वॉर कैबिनेट के मुख्य सदस्य बेनी गैंट्ज ने इस्तीफा दे दिया है। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार गैंट्ज के इस्तीफे की वजह गाजा युद्ध में विराम को लेकर नेतन्याहू का रवैया बताया जा रहा है।

गैंट्ज का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इजराइल बंट्टाकों को छुड़ाने की जद्दोजहद में लगा है और पश्चिम एशिया में स्थिति नाजुक बनी हुई है। यही नहीं बीते दिनों जहां इजराइल पर वैश्विक दबाव को पुनर्जीवित करने के लिए नॉर्वे, स्पेन और आयरलैंड ने फिलिस्तीन को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता देने का ऐलान तक किया। इन तीनों देशों की इस घोषणा ने उस जड़ता को तोड़ने का काम किया है जो पश्चिमी शक्तियों ने लंबे समय से बना रखी थी। स्पेन, आयरलैंड और नॉर्वे का मानना है कि फिलिस्तीन को मान्यता दिए बिना मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित होनी असंभव है।

संयुक्त राष्ट्र के 194 सदस्य देशों में से 143 देशों ने पहले से ही फिलिस्तीन को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता दे रखी है। अब इन तीनों का नाम जुड़ने के बाद यह संख्या बढ़कर 146 हो गई है। यहां तक कि अब भारत ने भी पहली बार गाजा में किए जा रहे इजराइली हमलों की आलोचना की है। ऐसे में सवाल है कि क्या इतने जतनों के बाद युद्ध विराम हो जाएगा? क्या अमेरिका का प्रस्ताव नेतन्याहू को झुकने पर मजबूर कर पाएगा? क्या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पारित होने से रुकेगी जंग? इन सवालों की बीच नेतन्याहू की स्थिति इधर कुआं, उधर खाई जैसी हो गई है।

क्या है अमेरिका का युद्ध विराम प्रस्ताव

अमेरिका द्वारा युद्ध विराम की बात करें तो पहली बार अमेरिका की तरफ से पेश किए गए सीजफायर प्रस्ताव में के अनुसार तीन चरणों में जंग खत्म करने की बात कही गई है। पहले में छह हफ्ते का सीजफायर होगा। इस दौरान हमास की कैद में मौजूद कुछ इजराइली बंट्टाक और इजराइल की जेल में बंद फिलिस्तीनियों की रिहाई की बात की गई है।

दूसरे चरण में जंग को पूरी तरह से खत्म कर बंट्टाकों को रिहा किया जाएगा और आखिरी में गाजा पट्टी को फिर से बसाने का जिक्र है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस प्रस्ताव की घोषणा की है। अमेरिका के मुताबिक, इजराइल पहले ही इस प्रस्ताव को स्वीकार कर चुका है। लेकिन बावजूद इसके नेतन्याहू इस लड़ाई को बिना हमास के खात्मे के खत्म नहीं करने पर अड़े हैं।

यूएनएससी में प्रस्ताव पारित होने से रुकेगी जंग?
कानूनी जानकारों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को अंतरराष्ट्रीय कानून माना जाता है। इसके सदस्य देशों के लिए इनका पालन करना अनिवार्य होता है। लेकिन इजराइल यूएनएससी का स्थायी या अस्थायी सदस्य नहीं है। ऐसे में वो इस प्रस्ताव को मानने के लिए बाट्टय नहीं है। अगर सुरक्षा परिषद में कोई प्रस्ताव पास हो भी जाए तो यहां इसे लागू कराने का कोई जरिया नहीं है। हां यह जरूर है कि सदस्य देशों की सहमति से इजराइल पर कई प्रतिबंट्टा लगाए जा सकते हैं।

इससे पहले इजराइल-हमास जंग रोकने के लिए पहला प्रस्ताव नवंबर 2023 में माल्टा ने पेश किया था। दूसरी बार यूएई ने दिसंबर 2023 में और तीसरी बार फरवरी 2024 में नॉर्थ अफ्रीकी देश अल्जीरिया ने प्रस्ताव पेश किया था। अमेरिका ने तीनों बार इसे ठुकरा दिया था।

नेतन्याहू से नाराज उनके मंत्री दे रहे इस्तीफा

गत् सप्ताह इजराइल की नेतन्याहू सरकार को बड़ा झटका लगा है। 3 सदस्यों वाली वॉर कैबिनेट के मुख्य सदस्य बेनी गैंट्ज ने इस्तीफा दे दिया। अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक गैंट्ज के इस्तीफे की वजह गाजा युद्ध विराम (युद्ध बंट्टाक) समझौते को लेकर नेतन्याहू का रवैया है।
गैंट्ज का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इजराइल बंट्टाकों को छुड़ाने की जद्दोजहद में लगा है और पश्चिम एशिया में स्थिति नाजुक बनी हुई है। एक टीवी चैनल पर अपना फैसला सुनाते हुए गैंट्ज ने कहा-नेतन्याहू की वजह से हम हमास का खात्मा नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए इमरजेंसी गवर्नमेंट को भारी मन से, लेकिन आत्मविश्वास के साथ छोड़ रहे हैं। दूसरी ओर, नेतन्याहू ने गैंट्ज से फैसला वापस लेने की बात कही है। उन्होंने कहा कि यह समय लड़ाई से पीछे हटने का नहीं बल्कि इसमें शामिल होने का है।

भरोसेमंद सरकार के लिए चुनाव करवाएं: नेतन्याहू

गैंट्ज ने नेतन्याहू से अपील की कि सर्वमान्य तारीख पर चुनाव होने चाहिए, जिससे ऐसी सरकार बने जो लोगों का विश्वास जीत सके और चुनौतियों का सामना कर सके। गैंट्ज ने कहा कि विरोट्टा-प्रदर्शन महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उन्हें कानूनी ढंग से चलाने की जरूरत है। उन्हें नफरत को बढ़ावा नहीं देना चाहिए। हम एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं। हमारे दुश्मन हमारी सीमाओं के बाहर हैं। गैंट्ज ने इजरायल के रक्षा मंत्री योआव गैलेंट से भी अपील करते हुए कहा कि वे वही करें जो सही है।

हमास हमले के बाद नेतन्याहू कैबिनेट में शामिल थे गैंट्ज

इजराइल में पूर्व सैन्य प्रमुख गैंट्ज को नेतन्याहू के प्रमुख राजनीतिक विरोट्टाी के रूप में देखा जाता है। वॉर कैबिनेट में शामिल होने से पहले,वे विपक्ष के एक प्रमुख सदस्य थे। वे 7 अक्टूबर को हमास के हमले के तुरंत बाद नेतन्याहू की सरकार में शामिल हो गए थे। नेतन्याहू सरकार में उनकी मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल की विश्वसनीयता को भी बढ़ाया। गैंट्ज के अमेरिकी अट्टिाकारियों के साथ भी अच्छे कामकाजी संबंट्टा हैं। हालांकि गैंट्ज के इस कदम से प्रट्टाानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। क्योंकि वे अभी भी इजराइली संसद नीसेट में बहुमत वाले गठबंट्टान पर कंट्रोल रखते हैं। 120 सीटों वाली नीसेट में गैंट्ज के जाने के बाद भी 64 सीटों पर बहुमत नेतन्याहू के साथ ही रहेगा।

हमास के खात्मे से पहले नहीं रुकेगी जंग: नेतन्याहू

एक तरफ जहां इजराइल का हिमायती अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीजफायर के लिए प्रस्ताव पास करवा रहा है, वहीं इजराइली प्रट्टाानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जंग रोकने से इनकार कर दिया है। नेतन्याहू ने कहा कि बाइडेन ने सीजफायर प्रस्ताव का केवल कुछ हिस्सा ही
सार्वजनिक किया है। इजराइल परमानेंट सीजफायर पर तभी बात करेगा जब तक हमास पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाएगा।

दूसरी तरफ हमास ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पास हुए प्रस्ताव का स्वागत किया है। वोटिंग के बाद हमास ने कहा कि वह मट्टयस्थों के साथ इस पर चर्चा करने के लिए तैयार है। इसके अलावा गाजा में सीजफायर के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इजराइल और मिडिल ईस्ट देशों के दौरे पर हैं। उन्होंने नेतन्याहू से मुलाकात भी की। ब्लिंकन ने इस बात पर जोर दिया कि सीजफायर से इजराइल के सभी बंट्टाक बिना किसी कठिनाई के घर लौट सकेंगे। साथ ही गाजा में मानवीय सहायता भी आसानी से पहुंचाई जा सकेगी।

भारत में पहली बार गाजा हमलों को ठहराया गलत

भारत ने पहली बार गाजा में लगातार किए जा रहे इजराइली हमलों की कड़ी आलोचना की है। पिछले हफ्ते रूस में हुई ब्रिक्स देशों की एक बैठक के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में ब्रिक्स देश के विदेश मंत्रियों ने फिलिस्तीन की स्थिति बिगड़ने और विशेष रूप से गाजा पट्टी में जारी हिंसा को लेकर

गंभीर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रियों ने यूएनजीए
प्रस्तावों और यूएनएससी संकल्प 2720 को प्रभावी तरीके से लागू करने के साथ-साथ गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी नागरिकों को मानवीय सहायता तत्काल शुरू करने और निर्वाट्टा तरीके से इसके वितरण का आह्वान किया है। हालांकि ब्रिक्स देशों ने हमास की कार्रवाई की भी निंदा की है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सभी बंट्टाकों और नागरिकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई होनी चाहिए। उन्हें अवैट्टा रूप से बंदी बनाया जा रहा है।
गौरतलब है कि ब्रिक्स देशों में प्रमुख रूप से ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल है। रूस वर्तमान में ब्रिक्स की अट्टयक्षता कर रहा है। ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों ने राफा पर इजरायल द्वारा बढ़ते हमलों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने राफा में इजरायली सैन्य कार्रवाई और इसके परिणामों की निंदा की है। उन्होंने फिलिस्तीनी लोगों को उनकी भूमि से जबरन विस्थापित करने के किसी भी प्रयास को गलत ठहराया है। उन्होंने मट्टय पूर्व क्षेत्र के बाकी हिस्सों में तनाव बढ़ने के प्रभावों के प्रति आगाह किया। यही नहीं ब्रिक्स देशों ने दक्षिण अफ्रीका द्वारा इजरायल के खिलाफ शुरू की गई कानूनी कार्यवाही में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के द्वारा किए जाने वाले फैसले को स्वीकार किया। मंत्रियों ने इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और कोर्ट के आदेशों की निरंतर हो रही अवहेलना पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन की पूर्ण सदस्यता के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की और अंतरराष्ट्रीय कानून के आट्टाार पर समाट्टाान के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराई।

हमास का अल्टीमेटम

पिछले साल 7 अक्टूबर को इजराइल पर हुए हमलों में हमास करीब 234 लोगों को बंट्टाक बनाकर गाजा ले गया था। दोनों पक्षों के बीच अब तक सिर्फ एक बार 24 से 30 नवंबर तक युद्ध विराम हुआ है। तब हमास और इजराइली सेना ने 7 दिनों के लिए हमले रोके थे। इस दौरान करीब 107 बंट्टाकों को रिहा किया गया था।

अब हमास ने जंग के आठ महीने बाद अपने लड़ाकों को आदेश दे दिए हैं कि अगर इजराइली सेना उनकी तरफ आगे बढ़े तो बंट्टाक बनाए गए इजराइली बंट्टाकों को सीट्टाा गोली मार दें। अमेरिकी मीडिया हाउस ने न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में ये दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक नुसीरत कैंप में इजराइल बंट्टाकों को छुड़ाने के लिए चलाए गए अभियान के बाद यह फैसला लिया गया है।

गौरतलब है कि इजराइल ने 8 जून को हमास की कैद से अपने 4 नागरिकों को रेस्क्यू किया था। इस दौरान 270 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए थे। हमास ने दावा किया था कि हमलों में 3 बंट्टाकों की भी मौत हुई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल के इंटेलिजेंस और मिलिट्री की टीम लगातार ड्रोन्स, सैटेलाइट और दूसरे तरीकों से गाजा में बंट्टाकों को ट्रैक करने की कोशिश कर रही हैं। इजराइल अब तक अपने 7 बंट्टाकों को रेस्क्यू करने में कामयाब रहा है। दूसरी तरफ हमास ने अब बंट्टाकों को ऐसी जगहों पर शिफ्ट कर दिया है जहां उन्हें ढूंढ पाना और मुश्किल होगा। बंट्टाकों की जगह भी लगातार बदली जा रही है जिससे इजराइली सैनिक उन तक न पहुंच सकें।

अमेरिका ने प्रस्ताव पर तीन बार वीटो, एक बार दूरी बनाई
इससे पहले मार्च में भी मानवीय संकट को आट्टाार बनाकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीजफायर का एक प्रस्ताव पारित किया गया था। प्रस्ताव में गाजा में हमले बंद करने और बिना शर्त के सभी बंट्टाकों की तत्काल रिहाई की मांग की गई थी। इस प्रस्ताव के लिए भी 15 में से 14 सदस्यों ने पक्ष में वोटिंग की थी, जबकि अमेरिका ने इससे दूरी बनाई थी। यह पहली बार था जब अमेरिका ने सीजफायर के प्रस्ताव पर वोट नहीं डाला था। इससे पहले तीन बार वह इन प्रस्तावों पर वीटो लगा चुका है। तब अमेरिका के वोटिंग से दूरी बनाने पर इजराइल ने नाराजगी जता वॉशिंगटन जा रहे रक्षा मंत्री योव गैलेंट की यात्रा रद्द कर दी थी।

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