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नाइजर में शोक की लहर, 20 स्कूली बच्चे जिंदा जले

नाइजर में शोक की लहर तब फैल गई जब एक स्कूल में एक साथ 20 बच्चे जलकर राख हो गए। ये सभी बच्चे 5 से 7 साल की आयु के थे। देश की राजधानी नियामी के बाहरी इलाके में स्कूल में लगी आग में बच्चे फंसे हुए थे।

साथ ही एक युवक की मौत तब हुई जब उसके ऊपर लकड़ियो से बने फट्टे गिर गए थे। यह युवक स्कूल के पास सटे इलाके में रहता था। बुधवार 14 अप्रैल को बच्चों के माता-पिता और शिक्षक स्कूल में इकट्ठा हुए। स्कूल के निदेशक हबीबा गया ने कहा कि इस दुखद घटना से नाइजर के सभी लोग शोक में हैं।

स्कूल निदेशक ने बताया कि मासूम छोटे बच्चे इस आग में जिंदा जल गए। वे बहुत छोटे थे, इसलिए वह बाहर की तरफ दौड़ नहीं पाए। अब्दुलाये नाम के एक पीड़ित ने बताया कि आग इतनी जल्दी फैल गई, कि जब तक आग बुझाने वाली गाड़िया घटनास्थल पर पहुंची तब तक कक्षाओं में सब कुछ नष्ट हो चुका था। बाद में बचाव दल ने पहुंचकर आग पर काबू कर लिया था, लेकिन आग की तीव्रता काफी तेज थी।

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मलबे के बीच अभी भी केवल डेस्क और नालीदार धातु की चादरें ही दिखाई दे रही थीं। राख के बीच बिखरी हुई किताबें, पेंसिल केस और बैकपैक्स जले हुए पड़े थे। स्कू्ल के पास रहने वाले बलरबा इब्राहिम ने बताया कि हवा से आग की लपटें एक कक्षा से दूसरी कक्षा तक पहुंची। पीड़ितों में उनकी पांच वर्षीय भतीजी यासमिना भी शामिल थी।

इब्राहिम ने कहा कि उनकी भतीजी पहले वह घर आई और उसके बाद वापिस स्कूल चली गई। यह लगभग वैसा ही है जैसे वह मौत की पुकार का जवाब दे रही हो।

आग लगने के कारणों की जांच चल रही है और यह तुरंत पता नहीं चल पाया कि यह कहां से शुरू हुई थी। नाइजर जो संयुक्त राष्ट्र के 189 देशों के मानव विकास सूचकांक के तहत दुनिया का सबसे गरीब देश है। इस देश की स्थिति इतनी ज्यादा खराब है कि ज्यादा आबादी वाले स्कूलों में छात्रों के लिए जगह बनाने लिए अक्सर पुआल की झोपड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। नाइजर के शिक्षक संघ ने बयान जारी कर कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि यहां से अधिकारी पुआल से बनी झोपड़ियों में कक्षाएं रोकें।

सुरक्षा बलों ने घटनास्थल को बंद कर दिया है जांचकर्ताओं ने सबूतों की तलाश जुटाना शुरु कर दिया है। नाइजर के स्कूल में हुई यह घटना काफी भयावह है, क्योंकि कुछ ही समय में 20 मासूम बच्चे जिंदा जल गए। यह नाइजर के लोगों के लिए बहुत बड़ा सदमा है। एक पीड़ित मां ने कहा कि अल्लाह चाहता था कि ऐसा हो और इसके बारे में हम कुछ नहीं कर सकते।

 

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