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अमेरिका के रहमोकरम पर पाक

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान 3 दिन के दौर पर अमेरिका पहुंचे हैं. उनके ,एजेंडे में आंतक, अफ़ग़ानिस्तान में शांति और भारत के साथ रिश्तों पर चर्चा है, लेकिन जिस तरह से हवाई अड्‌ड़े पर पाक पीएम का स्वागत हुआ है उसको देख कहा जा रहा है ट्रम्प प्रशासन ने इमरान खान की अमेरिका यात्रा को कोई ख़ास तवज्जो नही दी है. दरअसल पैसा बचाने की मुहिम के तहत इमरान खान ने हाल में प्रधानमंत्री आवास की गाड़ी बेचने से लेकर भैंस तक बेची हैं और अब वो इस अमेरिकी दौरे को सबसे सस्ता दौरा बनाने की कोशिश में कमर्शियल फ्लाइट से वहां पहुंचे. ऐसे में हर सरकारी दौरे पर आ रहे मेहमान को एयरपोर्ट पर मिलने वाला स्वागत तक उन्हें नहीं मिला।  आज  वे राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ बैठक करेंगे।

अपनी यात्रा की शुरुआत में ही खान को प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। इमरान खान कल वाशिंगटन डीसी में एक सामुदायिक कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे। तभी कुछ बलूच के कार्यकर्ताओं ने खान के भाषण के दौरान हंगामा शुरू कर दिया।

इसके अलावा मुत्तहिदा कासमी मूवमेंट (एमक्यूएम) और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के प्रदर्शनकारियों ने इमरान खान की संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा के विरोध में वाशिंगटन डीसी में विरोध प्रदर्शन किया।

पाक प्रधानमंत्री इमरान जब अपना भाषण दे रहे थे उसी दौरान बलूच कार्यकर्ता पाक सरकार द्वारा बलूचिस्तान में बलूच लोगों के साथ हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज बुलंद करने लगे। इसके बाद उन्होंने पाक सरकार और पीएम इमरान के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की।
इससे पहले शनिवार शाम को इमरान खान के अमेरिका पहुंचने के बाद एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी के लिए अमेरिकी प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी नहीं पहुंचा। पीएम इमरान खान को मेट्रो में बैठकर होटल जाना पड़ा।
खुद पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी अमेरिका में रहने वाले कुछ पाकिस्तानी लोगों के साथ एयरपोर्ट पहुंचे थे। पाक प्रधानमंत्री के तौर पर इससे पहले अक्टूबर 2015 में नवाज शरीफ ने अमेरिका की आधिकारिक यात्रा की थी।
क्रिकेटर से राजनेता बने 66 वर्षीय इमरान खान देश के पीएम होने के बावजूद किसी चार्टर्ड विमान से न जाकर कतर एयरवेज की फ्लाइट से अमेरिका पहुंचे। जिसका प्रमुख कारण पाक का आर्थिक संकट बताया जा रहा है।

क़रीब चार साल में किसी भी पाकिस्तानी नेता की अमरीकी राष्ट्रपति से यह पहली मुलाक़ात है।ऐसा माना जा रहा है कि इमरान ख़ान के अमरीकी दौरे में सेना की अहम भूमिका रहेगी क्योंकि उनके साथ सेना प्रमुख क़मर जावेद बाजवा और आईएसआई (इंटरसर्विसेज इंटेलिजेंस एजेंसी) प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फ़ैज़ हमीद भी हैं।

ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी पाक प्रधानमंत्री के साथ पहली बार सेनाप्रमुख और आईएसआई प्रमुख भी राजकीय यात्रा में साथ हैं। ऐसे में मना जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन इन दोनों सैन्य अधिकारीयों संग पाकिस्तान से ऑपरेट कर रहे आतंकी संगठनों पर लगाम लगाने को कहेगा।

पाकिस्तान के लिए इस वक्त सबसे बड़ी मुसीबत एफ़एटीएफ़ बना हुआ है। पाकिस्तान को वित्तीय अनियमितताओं, मनी लॉन्ड्रिंग और चरमपंथ के वित्तपोषण पर नज़र रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) ने अक्तूबर तक का वक़्त दिया कि वो चरमपंथ की फंडिंग को रोकने वाले अभियानों में सुधार लाए।

पाकिस्तान पहले एक जनवरी और फिर एक मई वाले टारगेट को  पूरा नहीं कर पाया है. अब उस पर दबाव है कि वो अक्तूबर तक अपनी कार्ययोजना पर तेज़ी से काम पूरा करे, नहीं तो एफ़एटीएफ़ उसके ख़िलाफ़ अगला कदम उठाएगा।

दुनियाभर में हो रही मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए नीतियां बनाने वाली इस संस्थान ने साल 2001 में अपनी नीतियों में चरमपंथ के लिए वित्तपोषण को भी शामिल कर लिया था।

अमेरिका ने जनवरी 2018 में पाकिस्तान को सुरक्षा सहायता रोक दी थी और अभी तक इस रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। पकिस्तान में इमरान की यात्रा को संकट उम्मीद जताई जा रही है कि ट्रम्प प्रशासन अब रोकी गई आर्थिक सहायता को जारी करने पर सहमत हो जाएगा।

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