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हिंसक होता अमेरिकी समाज

अमेरिकी समाज दिनों दिन हिंसक होता जा रहा है। हर दिन अमेरिका के किसी न किसी शहर में हर दिन गोलीबारी की घटना आती रहती है। साल 1968 में जब पुलिस ने वियतनाम युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को पीटा था, तब प्रदर्शनकारियों ने कहा था ‘द होल वर्ल्ड इच वॉचिंग। दशकों बाद आज पूरा विवाद आज अमेरिका में बढ़ती नस्लीय हिंसा और मानवाधिकारों के हनन को वॉच करता नजर आ रहा है। कैपिटल हिल में ट्रंप समर्थकों ने जिस तरह लोकतांत्रिक तरीकें से चुनी सरकार पर हमला किया। इसे पूरी दुनिया ने देखा और अमेरिका की किरकरी हुई।

भारत में आम लोगों के लिए हथियार खरीदना आसान नहीं है। लेकिन अमेरिका में हथियार खऱीदना बहुत ही आसान है। अमेरिकी चुनाव से पहले अमेरिका में दबाकर लोगों ने हथियार खरीदे थे। यूनाइटेड स्टेट्स में आएदिन बंदूकधारी लोग स्कूलों या शॉपिंग प्लेस में गोलाबारी से जान लेते आए हैं। हाल के सालों में ऐसी वारदातें बढ़ी हैं। हर ऐसी वारदात के बाद देश में गन लाइसेंस के नियमों पर बहस होती है लेकिन तब भी यहां लाइसेंस अपेक्षाकृत आसानी से मिल जाता है। यहीं कारण है कि अमेरिका मे हर 100 लोगों में से 80 के पास बंदूक है। ये स्टडी स्माल आर्म्स सर्वे ने साल 2011 में किया था। इसके नौ साल बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि यह आकड़ा दो गुना बढ़ा है। इसी का फल है कि अमेरिका में हर साल 114,994 लोगों की जान किसी न किसी गन वायलेंस में जाती है।

8 मार्च को अमेरिका के टेक्सास में ब्रायन शहर में एक अज्ञात व्यक्ति अंधाधुंध गोलीबारी की, गोलीबारी में एक व्यक्ति की जान चली गई और 6 लोग घायल हो गए। पुलिस फिलहाल फायरिंग करने वाले की तलाश में जुटी हुई है। अभी तक इस मामले में एक सदिंग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। यह पहली बार नहीं जब लोकतंत्र के मसीहा देश में किसी व्यक्ति ने खुले में फायरिंग की हो। गोलीबारी की ये घटना अमेरिका में ऐसे वक्त में हो रही है जब राष्ट्रपति जो बाइडेन सत्ता में आने के बाद पहली बार बंदूक नियंत्रण उपायों के तहत बंदूक हिंसा से जन स्वास्थ्य महामारी पर लगाम लगाने की कोशिस कर रहे हैं। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अमेरिका में हो रही ही गोलीबारी पर चिंता जताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने कहा है कि देश में बंदूक से की गई हिंसा एक महामारी है और यह हमारे लिए शर्मनाक है।

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कुछ दिन पहले ही यूएस कैपिटल हिल इलाके में दो पुलिस ऑफिसरों को एक गाड़ी ने टक्कर मार दी। जिसमें एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई है और एक घायल है। इस हादसे में संदिग्ध की भी मौत हो गई है। नस्लीय हिंसा के कारण अमेरिका में अब तक काफी संख्या में अश्वेतों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। जार्ज फ्लाइड की मौत के बाद अमेरिका के कई शहरों दंगे भी हुए थे। अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बराक ओबामा ने यह करने की कोशिश की, लेकिन आखिकार वे नाकाम हुए। उनके कार्यकाल के दौरान फर्गुसन में 18 साल के निहत्थे काले युवक माइकल ब्राउन को आठ बार गोली मारी गई। उसके बाद देश भर में प्रदर्शन हुए।

इसके अलावा 1 अप्रैल को अमेरिका के कैलिफोर्निया में गोली की घटना से एक बच्चे समेत चार लोगों की मौत हो गई थी। जब एक अज्ञात व्यक्ति ने कैलिफोर्निया के आरेंज सिटी के एक बिजनेस काम्प्लेक्स में गोलीबारी की। गोलीबारी में एक व्यक्ति गंभीर रुप से घायल भी हो गया। हालांकि पुलिस ने गोली चलाने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को पुलिस के साथ हुई झड़प में काफी चोटें भी आई थी। अमेरिका में पिछले दो हफ्तों में गोलीबारी की यह तीसरी घटना थी। एशियन के साथ भेदभाव को लेकर अमेरिका में इन दिनों खूब उत्पात मचा हुआ है। हर दिन एशियन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। हजारों की संख्या में लोग एकत्रित होकर अमेरिका इज रेसिज्म वायरस के नारे लगा रहे है।

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