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नाइजर में थम नहीं रही हिंसा, नए राष्ट्रपति का स्वागत भीषण नरसंहार से

पश्चिमी अफ्रीका का सबसे बड़ा देश नाइजर इन दिनों भारी राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। विश्व की सबसे ज्यादा विस्थापन की समस्या से जूझ रहे देशों में शुमार नाइजर इन दिनों लगातार सामूहिक हत्याओं से दहला हुआ है। 22 मार्च को मोटरसाईकिल पर सवार हमलावारों ने ताबड़तोड़ गोलियां चला 137 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। एक दिन पहले, 21 मार्च को ही नाइजर के नए राष्ट्रपति ने यह पद संभाला है। 2020 तक के उपलब्ध आकड़ों के अनुसार अब तक 10 लाख से ज्यादा लोग प्राकृतिक आपदाओं के चलते विस्थापित हो चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्दारा जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार यहा की 12.7 प्रतिशत जनता के पास खाना उपलब्ध नहीं है। साथ ही 50 प्रतिशत जनता के पास शिक्षा पाने का कोई माध्यम नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र की रैंकिंग के अनुसार नाइजर दुनिया के सबसे गरीब देशों की लिस्ट में आता है। विश्व के विकासशील देशों की लिस्ट में नाइजर 189 वें स्थान पर है। नाइजर माली और नाइजीरिया से उभरे सश्त्र समूहों को पिछले काफी समय से झेल रहा है। अब तक इन बंदूकधारियों ने सैकड़ों लोगों को मार डाला और लगभग आधा मिलियन लोगों को विस्थापित कर दिया। रविवार को जिन गांवों में हमला किया गया वह तहौआ क्षेत्र में स्थित हैं। नाइजर की सीमा टिलाबेरी क्षेत्र में समाप्त हो जाती है। पिछले दस सालों से सेहेल के पश्चिमी हिस्से में लगातार संघर्ष हो रहा है। इन बंदूकधारियों को अलकायदा और आईएसआईएल से जुड़े लड़ाकों द्दारा सरंक्षित किया जाता है।

15 मार्च को तिलाबेरी क्षेत्र में हमलावारों ने एक बस पर हमला करके 66 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके बाद हमलावारों ने डेरे-डे गांव पर हमला किया और आम लोगों को मशाल से जलाकर मार डाला था। उसी दिन त्रिकोणीय सीमा क्षेत्र में आईएसआईएल द्वारा किए गए एक हमले का दावा किया गया था, जहां नाइजर, बुर्किना फासो और माली के फ्रंटियर्स ने 33 माली सैनिकों को मार डाला था। 21 फरवरी को निर्वाचित बज़ौम, एक पूर्व आंतरिक मंत्री हैं, जो निवर्तमान राष्ट्रपति महामदौ इस्सौफौ के पसंदीदा उत्तराधिकारी थे। उन्होंने असुरक्षा से लड़ने का संकल्प लिया है और 15 मार्च के हमले के बाद तिलबेरी क्षेत्र में सेना के सुदृढीकरण का आदेश दिया है।

2 जनवरी को, मंगला जिले के तिलबीरी में दो गांवों पर हुए हमलों में 100 लोग मारे गए थे। यह नरसंहार नाइजर के इतिहास का सबसे बड़ा नरसंहार था, और यह उस समय हुआ जब देश में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हो रहे थे्। एक साल पहले, 9 जनवरी, 2020 को नाइजर सेना ने चिनगोडर में एक सैन्य शिविर पर हमले में 89 लोगों को खो दिया था। 22 मार्च को हुए नरसंहार की बाबत नाइजर सरकार ने अपने अधिकारिक बयान में कहा है “हमलावर जानबूझकर स्थानीय लोगों को लक्ष्य बनाते है, हमलावारों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दी हैं।” यह हमले नाइजर के नए अध्यक्ष मोहम्मद बज़ौम के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। पिछले महीने ही देश में हुए चुनावों में मोहम्मद बज़ौम नए अध्यक्ष बने है, जिनकी सरकार की पुष्टि शीर्ष अदालत ने रविवार 21 मार्च को की थी। जिस दिन मोहम्मद बज़ौम राष्ट्रपति बनें उस दिन ही गांवों के लोगों पर हमला हुआ।

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