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गृहयुद्ध की कगार पर वेनेजुएला

दक्षिण अमेरीकी देश वेनेजुएला के गंभीर राजनीतिक और आर्थिक हालात अंतत उस देश को गृह युद्ध के कगार पर ले आए हैं। देश में भारी आर्थिक संकट के कारण जनता ने विद्रोह कर दिया है। हजारों की संख्या में लोग राजधानी की सड़कों पर उतर आए हैं और उनकी सेना के साथ हिंसक झड़पें हो रही हैं। सेना भी दो गुटों में बंट चुकी है। एक राष्ट्रपति मादुरो के साथ है, तो दूसरा गुट स्व घोषित राष्ट्रपति जुआन गुएडो के पक्ष में दिखाई देता है। इन हालात में राष्ट्रपति मादुरो क्यूबा भागने वाले थे, लेकिन रूस ने हस्तक्षेप कर उन्हें देश में ही रुकने के लिए कहा है। अमेरिकी विदेशमंत्री माइक पांपिओ ने कहा कि घिर चुके राष्ट्रपति के पास क्यूबा जाने के लिए एक विमान खड़ा था, लेकिन व्लादिमीर पुतिन उन्हें वेनेजुएला में रुकने के लिए मनाया।

जुआन गुएडो के आह्नान पर राजधानी की सड़कों पर बड़े पैमाने पर फायरिंग हुई, जिसमें राष्ट्रपति मादुरो को हटाने की मांग की गई। सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों और शासन के सैनिकों के बीच लड़ाई पूरी राजधानी में जारी रही। ऐसे वीडियो फुटेज आ रहे हैं जिनमें नेशनल गार्ड को हिंसक झड़पों के दौरान प्रदर्शनकारियों की भीड़ के बीच भागते हुए देखा जा सकता है। राष्ट्रपति के प्रति निष्ठावान सशस्त्र सैनिकों द्वारा संचालित बख्तरबंद गाड़ियों को काराकास में ला कार्लोटा बेस के सामने प्रदर्शनकारियों के बीच उतरते देखा गया। ऑनलाइन ग्रुप द्वारा जारी की गई वीडियो क्लिप में प्रदर्शनकारियों के समूह द्वारा सफेद बख्तरबंद वाहनों पर मिसाइल फेंकते हुए देखा गया। जैसा कि प्रदर्शनकारियों ने हमला किया तो एक टैंक बांई ओर गया जो कई लोगों को गिराते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग के डिवाडर पर चढ़ गया, जिसकी चपेट में कई लोग आ गए, जिससे वे घायल हो गए। हिंसा की घटनाओं पर दुनिया भर की सरकारों ने चिंता व्यक्त की है।

हालांकि सरकार ने कहा है कि उसने सैनिकों के एक छोटे से समूह के विद्रोह को दबा दिया है, लेकिन स्व घोषित राष्ट्रपति जुआन गुएडो के साथ एक महीने से ज्यादा समय से चल रहे गतिरोध में सत्ता पर पकड़ बनाए रखने में मददगार सैनिकों को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। यह सत्ता पर मादुरो की पकड़ ढीली होने का संकेत है। हालांकि ट्विटर पर मादुरो ने दावा किया है कि सेना प्रमुख ने उन्हें पूरी तरह समर्थन का भरोसा दिया है। सेना प्रमुख जनरल व्लादिमीर पादरिनो ने भी है कहा कि वह हिंसा के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराते हैं। पादरिनो देश के रक्षा मंत्री भी हैं।

राष्ट्रपति मादुरो के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से है। क्रेमलिन के हस्तक्षेप के बावजूद वेनेजुएला की सीक्रेट पुलिस (एसईबीआईएन) के प्रमुख मैनुअल रिकॉर्डों क्रिस्टोफर फिगुएरा ने कहा कि अब राजनीति करने के नए तरीके तलाशने का समय आ गया है। जनता के एक गुट के विद्रोह के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर दबाव बढ़ गया है। उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने ट्वीट कर अंग्रेजी और स्पेनिश में विपक्ष के लिए ट्रम्प प्रशासन के समर्थन की आवाज उठाई और कहा है कि हम आपके साथ हैं।

सीक्रेट पुलिस के प्रमुख रिकॉर्डों क्रिस्टोफर फिगुएरा ने देशवासियों को पत्र लिखकर कहा है कि ये देश के पुनर्निर्माण का समय है। अमेरिकी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोशल मीडिया पर जारी किए गए नोट की सत्यता की पुष्टि की है। फिगुएरा ने लिखा है कि वह हमेशा मादुरो के प्रति निष्ठावान रहे हैं, लेकिन वेनेजुएला ने एक हानिकारक गिरावट का अनुभव किया है। गुएडो ने दावा किया है कि मादुरो ने सैनिकों का समर्थन खो दिया है, लेकिन राष्ट्रपति मादुरो ने कहा है कि उन्होंने अपने अधिकारियों के साथ बात की थी, जिन्होंने उन्हें अपनी संपूर्ण वफादारी का आश्वासन दिया है। विपक्ष के नेता ने प्रदर्शनकारियों और सेना के सदस्यों से शामिल होने का आग्रह किया है। उन्होंने राजधानी कराकास के ला कार्लोटा एयरबेस में बनाए गए वीडियो में ‘ऑपरेशन लिबर्टी के अंतिम चरण’ को भारी हथियारों से लैस सैनिकों से घिरा बताया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मादुरो की सेना के पहुंचने से पहले सैनिकों ने बेस के चारों ओर रक्षात्मक स्थिति बना ली थी और वहां पर आंसू गैस के साथ आग लगा दी।

वेनेजुएला की स्वास्थ्य सेवाओं ने कहा कि प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों से काराकास में लगभग 69 लोग घायल हो गए, जिनमें से दो बंदूकधारी थे। दरअसल, वेनेजुएला के मौजूदा संकट की एक प्रमुख वजह यह है कि देश के आर्थिक हालात बेहद खराब हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की हाल में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां की चौथाई जनसंख्या को भोजन और बुनियादी आपूर्ति की सख्त जरूरत है। इससे आगे स्थिति भयावह हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का भी अनुमान है कि इस साल वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था 25 फीसदी तक गिर सकती है। बुनियादी ढांचे में भी नुकसान जारी रहेगा। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक विपरीत हालात में हर रोज वेनेजुएला के 5500 लोग देश छोड़कर जा रहे हैं। यह स्थिति दुनिया में शरणार्थियों की समस्या खड़ी कर देगी।

जानकारों के मुताबिक वेनेजुएला की इस हालत के लिए यहां के राजनेता जिम्मेदार हैं।वर्तमान में यहां निकोलस मादुरो की सरकार है। वह साल 2013 से देश के राष्ट्रपति का पद संभाल रहे हैं। बीते साल यहां राष्ट्रपति चुनाव हुए थे। इन चुनावों में भी निकोलस मादुरो ने जीत हासिल की। वह दूसरी बार देश के राष्ट्रपति बने। लेकिन मादुरो के चुनाव जीतने के बाद विपक्षी पार्टी के नेता जुआन गुएजे ने उन पर चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाया। गुएजे ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान खुद को राष्ट्रपति घोषित कर दिया। उन्होंने राजधानी कराकास में जब पहली रैली की थी, तो उसमें देशभर से 2.5 लाख लोग शामिल हुए थे।
अमेरिका ने भी इस काम में उनका साथ दिया।

अमेरिका ने कहा कि ‘पूर्व राष्ट्रपति मादुरो’ के पास अब कोई अधिकार नहीं है। अमेरिका ने सेना से भी अपील करते हुए कहा कि गुएजे ही समर्थन करें। 11 महीनों से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव चल रहा है। सरकार ने उन पर 15 साल का प्रतिबंध लगाया है। संविधान सभा में भी उनके खिलाफ वोटिंग हुई। दूसरी तरफ रूस मादुरो के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है। यानी बेनेजुएला के मामले में दुनिया की दो महाशक्तियां दिलचस्पी लेती रही हैं। कुछ जानकार तो इन दो महाशक्तियों के हस्तेक्षेप को ही वेनेजुएला के मौजूदा संकट की वजह मानते हैं।

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