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अमेरिका दौरे से लोकप्रिय हुए इमरान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के हाल के अमेरिका दौरे में बेशक देश की विपक्षी पार्टियांे को कोई खास उपलब्धि नहीं दिखाई दे रही है। लेकिन सच यह है कि इससे इमरान काफी हद तक अपनी जनता के बीच लोकप्रिय हुए हैं। उन्हें यह जतलाने में कामयाबी मिली है कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान को जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक सफलता मिल रही है, वहीं वे देश की आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में भी प्रयासरत हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले दिनों अमेरिका दौरे पर गये थे। वहां पर उन्होंने व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रैम्प  के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की थी। जिसमें कश्मीर का मुद्दा दक्षिण एशिया में खूब गरमाया था| दूसरा अमरीका द्वारा पाकिस्तान को सैन्य राशि की मदद करने का आश्वासन था | इमरान खान अपनी इस कामयाबी को लेकर स्वदेश लौट जहां समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया ।अभी एक अमरीकी न्यूज़ के अनुसार  अमरीका  पकिस्तान को शुरुआती सैन्य राशि  125 मिलियन डॉलर से होगी| . यह रक़म पाकिस्तान के पास मौजूद अमरीकी एफ़-16 लड़ाकू विमानों की तकनीकी ज़रूरतों को पूरा करने और इसके इस्तेमाल की निगरानी करने पर ख़र्च होगी|
 इमरान खान ने अपनी यात्रा से पहले अफगानिस्तान के तालिबान को अमेरिका के साथ बातचीत करने में अहम किरदार अदा किया था । उन्होंने अपनी ही सरजमीन पर पल रहे आतंकी संगठन जमात-उद-दावा के हाफिज सईद को गिरफ्तार करवाकर इंटरनेशनल बिरादरी में दिखाया कि हम आतंक के सचेत है। खान ने  बड़ी ही बेबाकी से यह भी माना कि उनकी जमीन पर 40 आतंकवादी संगठन चल रहे है। जो पुरानी सरकारों की ही देन है। इन पर हमारी सरकार प्रतिबंद लगाने जा रही है। वही अमरीकी राष्ट्पति ट्रैम्प के एक बयान ने दक्षिण एशिया में खलबली मचा दी थी| जब ट्रैम्प ने कहां था कि वो  कश्मीर मुद्दे पर  पाकिस्तान और भारत की मध्यस्थता में करेंगे  |  अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसका न सिर्फ सार्वजनिक तोर पर इजहार किया बल्कि यह भी बोल दिया कि मध्यस्थता करने के लिए उनको भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था। हालांकि भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट करके इसका तुरंत खंडन भी कर दिया था। उन्होंने यह भी कहां की यह सिर्फ दिपक्षीय मुद्दा हैं पाकिस्तान ने शिमला समझौता का उल्ल्घन किया हैं  |  लेकिन मोदी सरकार अभी तक इस पर खामोशी बनाये हुए। वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी आवाम को यह संदेश देने में कामयाब रहे है कि हम कश्मीर को लेकर सविंदा  है।
हालांकि इस मुलाकात में  बुनियादी रूप से और रणनीति के मामले में दोनों देशों ने कुछ कहने से गुरेज किया। पाकिस्तान ने परमाणु समुह में शामिल होने के बारे में कोई बात नहीं की न ही अमेरिका ने कोई इशारा किया है। इसके अलावा पाकिस्तान में चीन का बढ़ते व्यापार और सामरिक हितों के बारे में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कोई खुलकर बात नहीं हुई है।
पकिस्तान के प्रधानमंत्री की असल चुनौती चीन के  साथ अच्छे रिश्तों को लेकर भी है आशंका हैं की  अमेरिका इसकी राह में रुकावट ना बन जाये।यह भी देखना होगा की अमेरिका चीन से  पाकिस्तान को रिश्तों में कितनी तरजीह देगा

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